गर्मी और बरसात में चक्कर पानी की कमी, पसीना, नम मौसम, कम पानी, संक्रमण, ब्लड प्रेशर बदलाव और यात्रा की वजह से बढ़ सकता है। अगर चक्कर बार-बार आता है या चलने में असंतुलन होता है तो केवल मौसम मानकर नजरअंदाज न करें।

गर्मी और बरसात में चक्कर कई लोगों में ज्यादा बढ़ जाता है। मेरे क्लिनिक में जुलाई-अगस्त और फिर मई-जून के महीनों में चक्कर के मरीजों की संख्या साफ बढ़ती हुई दिखती है। लोग अक्सर पूछते हैं कि मौसम बदलते ही चक्कर क्यों बढ़ जाता है।

मैं हरदोई में काम करता हूँ। उत्तर प्रदेश की गर्मी में जून के महीने में तापमान 45-47 डिग्री तक पहुँच जाता है, और बरसात में नमी बहुत बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में शरीर के पानी, नमक और संतुलन तंत्र पर असर पड़ता है, इसलिए चक्कर बढ़ सकता है।

एक किसान महेश मेरे पास आए और बोले कि जैसे ही गर्मी शुरू होती है, उन्हें चक्कर आ जाता है, और बरसात में यह फिर बढ़ जाता है। ऐसे ही सवालों के जवाब मैं इस लेख में सरल भाषा में दे रहा हूँ।

गर्मी और बरसात में चक्कर क्यों बढ़ जाता है?

गर्मी में चक्कर का मुख्य कारण है, पानी की कमी। जी भइया, जब बाहर गर्मी होती है, तो शरीर पसीना निकालने लगता है। बहुत तेज़ पसीना। और इस पसीने में पानी के साथ-साथ नमक और minerals भी निकल जाते हैं।

अब हमारे शरीर का खून volume कम हो जाता है। खून का गाढ़ापन बढ़ जाता है। खून दबाव में बदलाव आता है। और सबसे अहम बात, हमारे कान के अंतरिक हिस्से में तरल संतुलन गड़बड़ा जाता है।

इसके अलावा गर्मी में कुछ और भी चीज़ें होती हैं:

1. चक्कर on Standing (खड़े होते समय चक्कर): जब आप बैठे हो या लेटे हो, तो ठीक हो। लेकिन जैसे ही खड़े होते हो, चक्कर आ जाता है। यह तब होता है जब खून दबाव में अचानक गिरावट आती है।

2. गर्मी थकावट (गर्मी से थकावट): शरीर गर्मी को सहन नहीं कर पाता। थकावट आ जाती है। सुस्ती आ जाती है। और चक्कर भी।

3. इलेक्ट्रोलाइट Imbalance (खनिज का असंतुलन): जब नमक-खनिज निकल जाते हैं, तो शरीर की कोशिकाएं को परेशानी होती है। और ये कोशिकाएं हमारे संतुलन को नियंत्रण करते हैं।

4. पानी की कमी (निर्जलीकरण): खून में पानी की कमी। और जब खून में पानी कम होता है, तो सब कुछ गड़बड़ा जाता है।

बरसात में चक्कर क्यों आता है?

अब बरसात की बात करते हैं। गर्मी का उल्टा होना चाहिए न? नहीं भइया। बरसात में अपना अलग ही मसला है।

1. नमी (नमी): बरसात में हवा में नमी इतनी होती है कि 80-90 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। यह नमी शरीर से पसीना सूखने में बाधा डालती है। तो शरीर का तापमान नियंत्रण ख़राब हो जाता है।

2. दबाव Changes (दबाव में बदलाव): जब बादल आते हैं, तो वायुमंडलीय दबाव में बदलाव आता है। और यह बदलाव हमारे कान के internal तरल को प्रभावित करता है।

3. संक्रमण (संक्रमण): बरसात में कान में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। पानी कान में चला जाता है। और फिर संक्रमण हो जाता है। यह संक्रमण भी चक्कर का कारण बन सकता है।

4. फफूंद और एलर्जी कारक: बरसात में मोल्ड और allergenic कण बढ़ जाते हैं। ये कण सूजन बढ़ाते हैं। और सूजन से चक्कर आ सकता है।

5. Indoor Confinement (घर में बंद रहना): बरसात में लोग घर में ज़्यादा समय बिताते हैं। ताज़ी हवा कम मिलती है। व्यायाम कम होता है। और यह सब संतुलन को प्रभावित करता है।

उत्तर प्रदेश की गर्मी-बरसात में खास चीज़ें

अरे भइया, उत्तर प्रदेश में तो खास ही मसला है। यहाँ की गर्मी तो कहीं और की नहीं होती। मई-जून में तो लोग सड़क पर पैदल नहीं चल सकते। और फिर जुलाई-अगस्त में बरसात आती है, लेकिन गर्मी भी रहती है। यानी गर्मी + नमी = चक्कर का perfect recipe।

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और हरदोई, Kanpur, Varanasi में तो यह और भी बुरा होता है। हवा रुकी-रुकी रहती है। दिल्ली या northern parts में तो wind भी होती है, लेकिन यहाँ तो stagnant हवा होती है।

इसके अलावा, गन्ने की खेती के कारण भी moisture बहुत बढ़ जाती है। और जहाँ खेती हो, वहाँ कभी-कभी नली पानी भी होता है, जो नमी बढ़ाता है।

कौन लोग ज़्यादा प्रभावित होते हैं?

1. Elderly लोग (बुज़ुर्ग): बुज़ुर्गों का शरीर तापमान change को ठीक से handle नहीं कर पाता। उनके शरीर में पानी भी कम होता है।

2. लोग साथ Diabetes (डायबिटीज़ के मरीज़): शुगर के मरीज़ों को पहले से ही संतुलन की समस्या होती है। गर्मी-बरसात में यह और बढ़ जाती है।

3. लोग साथ ज्यादा खून दबाव (ज्यादा BP के मरीज़): BP का fluctuation ज़्यादा होता है।

4. लोग साथ Heart Disease (दिल की बीमारी): दिल पूरी तरह काम नहीं कर पाता।

5. Outdoor Workers (मज़दूर, किसान): जो लोग बाहर काम करते हैं, उन्हें सबसे ज़्यादा प्रभाव।

6. Children (बच्चे): बच्चों का शरीर अभी fully बनना नहीं होता। तो उन्हें भी परेशानी होती है।

गर्मी में चक्कर से कैसे बचें?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल, गर्मी में चक्कर से कैसे बचें?

1. पानी पिएँ, बहुत ज़्यादा पानी: मैं अपने सभी मरीज़ों को कहता हूँ, “गर्मी में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएँ।” और यह पानी पूरे दिन में धीरे-धीरे पिएँ। एक बार में सब न पिएँ।

अगर आप बाहर हो, तो पानी bottle साथ रखो। हर 15 मिनट में एक घूँट पानी पी लो।

2. नमक-चीनी वाला घोल बनाओ (ओआरएस): केवल पानी से काम नहीं होगा। शरीर को नमक और glucose भी चाहिए। तो एक litre पानी में एक छोटी चम्मच नमक और 6 चम्मच चीनी मिलाकर ओआरएस बना लो। या आप बाज़ार से ओआरएस powder ले आ सकते हो।

3. नारियल पानी पिएँ: नारियल पानी में naturally इलेक्ट्रोलाइट होते हैं। गर्मी में यह बहुत अच्छा होता है। दिन में एक-दो नारियल पानी पी लो।

4. छाछ या लस्सी: Yogurt से बने छाछ में भी प्रोबायोटिक्स और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं।

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5. फल खाओ: तरबूज़, खरबूज़े, आम, सब में पानी ज़्यादा है। और ये nutritious भी हैं।

6. चाय-कॉफ़ी से बचो: गर्मी में चाय-कॉफ़ी न पिएँ। ये शरीर को dehydrate करते हैं।

7. धीरे-धीरे उठो: जब आप बैठे-बैठे हो, तो तेज़ी से न उठो। पहले बैठे-बैठे कुछ seconds रुको। फिर धीरे-धीरे उठो। यह करने से खड़े होते समय चक्कर नहीं आएगा।

8. गर्म जगहों से बचो: दोपहर की गर्मी में बाहर न निकलो। अगर जाना ही है, तो 6-7 बजे सुबह या 6-7 बजे शाम को जाओ।

9. AC कमरा में ज़्यादा देर न रहो: AC कमरा से तेज़ गर्मी में अचानक न जाओ। धीरे-धीरे शरीर को समायोजित होने दो।

10. सूती कपड़े पहनो: गर्मी में सूती कपड़े पहनो। ये पसीना सोख लेते हैं।

बरसात में चक्कर से कैसे बचें?

1. कान को पानी से बचाओ: बरसात में कान में पानी न जाने दो। तैराकी करते समय cotton या wax से कान बंद कर दो। और बाहर से आकर कान को सूखे कपड़े से पोंछ दो।

2. नमी कम करो: घर में dehumidifier रखो अगर हो सके। या सिर्फ़ खिड़कियाँ खुली रखो ताकि हवा आती रहे।

3. व्यायाम करते रहो: भले ही बाहर पानी बरस रहा हो, लेकिन घर में व्यायाम करो। कुछ योग आसन करो। संतुलन कसरत करो।

4. पानी पिएँ, पर ठीक मात्रा में: बरसात में पानी की कमी कम होता है। लेकिन फिर भी कम से कम 2-2.5 लीटर पानी पिएँ।

5. संक्रमण से बचो: अगर कान दर्द हो, या कान से liquid निकल रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाओ। संक्रमण को बढ़ने मत दो।

6. एलर्जी कारक से बचो: अगर आपको allergy है, तो बरसात में सावधानी रखो। सूखे कपड़े पहनो। नियमित रूप से नहाओ।

7. साफ़-सफ़ाई रखो: फफूंद और fungus की growth को रोकने के लिए घर को साफ़-सुथरा रखो।

मौसमी चक्कर, एक अलग श्रेणी

मेरे प्रैक्टिस में कुछ ऐसे मरीज़ हैं जिन्हें साल में सिर्फ़ एक मौसम में चक्कर आता है। गर्मी में ठीक रहते हैं, बरसात में आता है। या vice versa। इसे “मौसमी वर्टिगो” कहते हैं।

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जी भइया, यह असल है। कुछ लोगों का शरीर एक particular मौसम के साथ समायोजित नहीं कर पाता। तो हर साल एक मौसम में परेशानी होती है।

इन लोगों के लिए मेरी सलाह है, जब आप जानते हो कि कौन-सा मौसम आपके लिए मुश्किल है, तो उस मौसम से 15 दिन पहले से ही तैयारी शुरू कर दो। ज़्यादा पानी पिएँ। व्यायाम करो। और ज़रूरत पड़े तो कुछ बचाव दवाइयाँ भी ले सकते हो।

क्या यात्रा करना चाहिए गर्मी-बरसात में?

अरे, यह सवाल भी अच्छा है। अगर आपको मौसमी वर्टिगो है, तो क्या आप यात्रा नहीं कर सकते?

अरे हाँ, कर सकते हो। लेकिन सावधानी रखनी होती है।

1. अपना चिकित्सकीय history अपने साथ रखो।
2. ज़रूरत की दवाइयाँ साथ रखो।
3. पानी-ओआरएस साथ रखो।
4. अपने डॉक्टर का number साथ रखो।
5. ठीक से सो-चल कर चलो। अचानक हलचल मत करो।
6. क्लाइमेट कंट्रोल्ड vehicles में यात्रा करो अगर possible हो।

गर्मी और बरसात डॉ. पोरवाल के पास मौसमी वर्टिगो का इलाज

प्राइम ईएनटी सेंटर में मैं मौसमी वर्टिगो के मरीज़ों को विशेष ध्यान देता हूँ। मैं उन्हें बताता हूँ कि कौन-से मौसम में क्या करना चाहिए। और अगर दवा की ज़रूरत है, तो कौन-सी दवा लेनी चाहिए।

कुछ मरीज़ों को मैं वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन कसरत भी सिखाता हूँ। ये कसरत संतुलन को बेहतर बनाते हैं।

अगर आपको गर्मी-बरसात में चक्कर आता है, तो आज ही फ़ोन करो। 7393062200

निष्कर्ष

गर्मी और बरसात में चक्कर आना एक आम समस्या है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश में जहाँ गर्मी बहुत तेज़ होती है और बरसात में नमी बहुत होती है। लेकिन सावधानी से, सही जीवनशैली बदलाव से, आप इस समस्या को manage कर सकते हो।

याद रखो, पानी की मात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। गर्मी में पानी पिएँ। बरसात में संक्रमण से बचो। और अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से मिलो।

डॉ. प्रतीक पोरवाल, प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई, उत्तर प्रदेश

फ़ोन: 7393062200

अतिरिक्त जानकारी, डॉ. प्रतीक पोरवाल से

मैं डॉ. प्रतीक पोरवाल, प्राइम ईएनटी सेंटर Lucknow में वर्टिगो विशेषज्ञ। पिछले 15 साल में 10,000 से ज़्यादा वर्टिगो रोगियों का इलाज किया है। उत्तर प्रदेश, Bihar, MP, Delhi, Rajasthan, पूरे North भारत से मरीज़ आते हैं। सबसे ज़्यादा case बीपीपीवी का होता है, और ये 10 मिनट में ठीक हो जाता है! जी हाँ, 10 मिनट।

2025 में Budapest में VAI award मिला। बैंगलोर मैनुवर, मेरी developed technique, भारत भर में ईएनटी डॉक्टरों इस्तेमाल कर रहे हैं। 85-90% success rate एक session में। मेरे पास हरदोई, Sitapur, Unnao, Barabanki से रोजाना मरीज़ आते हैं। उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों में वर्टिगो सही इलाज नहीं मिलता, इसीलिए ऑनलाइन सलाह शुरू किया।

भारतीय खाना और चक्कर, क्या खाएं, क्या न खाएं

फ़ायदेमंद: केला (potassium), मछली (omega-3), दही/लस्सी (probiotic, नमक कम), अदरक वाली चाय, हल्दी दूध, पानी खूब पिएं (3 लीटर रोजाना)।

परहेज़: बहुत ज़्यादा नमक (अचार, पापड़, चिप्स), ज़्यादा चाय-कॉफ़ी (भीतरी कान खून vessels shrink होते हैं), शराब (वेस्टिबुलर toxin), तेज़ मसालेदार खाना (वेस्टिबुलर माइग्रेन ट्रिगर)।

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उत्तर प्रदेश में गर्मियों में, लू से पानी की कमी वर्टिगो बहुत आम। ओआरएस पीएं, छाँव में रहें।

घर पर संतुलन कसरत

कसरत 1, Brandt-Daroff: बिस्तर पर सीधे बैठें। तेज़ी से बाईं तरफ लेट जाएं, 30 सेकेंड रहें। उठ कर बैठें। दाईं तरफ लेट जाएं, 30 सेकेंड। यही एक चक्र है। 5 चक्र, दिन में 3 बार।

कसरत 2, Gaze Stabilization: दीवार पर एक point देखें। आँखें वहीं fixed रखें, सिर धीरे धीरे left-right घुमाएं। 20 बार, दिन में 2 बार।

कसरत 3, एक पैर Stand: दीवार पकड़ कर एक पैर पर 10 सेकेंड खड़े रहें। दूसरा पैर। 3 round।

चेतावनी: तीव्र चक्कर में कसरत न करें। डॉक्टर की सलाह पहले लें।

कब डॉक्टर के पास जाएं, आपातकालीन संकेत

ये लक्षण हों तो तुरंत अस्पताल जाएं, स्ट्रोक हो सकता है: अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द जो पहले कभी न हुआ हो। चेहरे का एक तरफ लटक जाना। हाथ-पैर अचानक कमज़ोर होना। बोलने में तकलीफ। दोहरा दिखाई देना। बेहोश होना।

Normal ईएनटी सलाह: 1 हफ्ते से ज़्यादा चक्कर। बार बार वापस आना। कम सुनाई देना साथ में। कान में आवाज़ के साथ चक्कर। गिरने का डर। दवाई से भी आराम न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्मी में चक्कर आना कितना आम है?

बहुत आम है। गर्मी के महीने में मेरे क्लिनिक में 40% ज़्यादा चक्कर के मरीज आते हैं। गर्मी में क्या होता है – पानी की कमी पसीना ज़्यादा आता है, गर्मी स्ट्रोक risk, गर्मी थकावट, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, Vasodilation खून दबाव drop हो सकता है। इसलिए गर्मी में चक्कर को काफी seriously लेना चाहिए।

बरसात में चक्कर आने के कारण क्या अलग हैं?

बरसात में अलग dynamics होते हैं – वायुमंडलीय दबाव बदलाव, ज्यादा नमी, वायरल संक्रमण flu ज़्यादा आम होता है, Dampness फफूंद और एलर्जी, Cold और कम sunlight। मैंने हरदोई में देखा है कि बरसात के दौरान काफी चक्कर के मामले आते हैं।

गर्मी में पानी की कमी से चक्कर को कैसे prevent करें?

बचाव बहुत सरल है – रोजाना 2-3 लीटर पानी पिओ, Thirst का wait मत करो, इलेक्ट्रोलाइट drinks भी लो, Fruits जो पानी-rich हो, बचें excessive caffeine और alcohol, Light colored loose fitting कपड़े, बचें peak गर्मी hou AM तक 3 PM, Monitor urine color अगर dark है तो dehydrated हो।

गर्मी थकावट से चक्कर कब आता है?

गर्मी थकावट एक गंभीर स्थिति है। लक्षण – Heavy sweating, Weakness, चक्कर, Nausea, सिरदर्द, Fast pulse, Muscle cramps। यह तब होता है जब शरीर गर्मी को regulate नहीं कर पाता। अगर इलाज न दो तो गर्मी स्ट्रोक हो सकता है जो गंभीर है। अगर गर्मी स्ट्रोक लक्षण हों तो आपात स्थिति services कॉल करो।

गर्मी में चक्कर होने पर immediate क्या करें?

तुरंत शेड में या air-conditioned जगह में जाओ, Tight कपड़े हटा दो, बैठ जाओ या लेट जाओ, Cool पानी पिओ, अगर पसीने से भीगे हो तो wet cloth से पोंछ लो, कुछ मिनट आराम करो, अगर मतली है तो lying position रहो। अगर 30 मिनट में ठीक न हो तो डॉक्टर कॉल करो।

क्या गर्मी में बीपीपीवी ज़्यादा हो सकता है?

अप्रत्यक्ष रूप से हाँ। पानी की कमी से बीपीपीवी के लक्षण बढ़ना हो सकते हैं। लेकिन बीपीपीवी खुद से गर्मी में ज़्यादा नहीं होता। लेकिन लक्षण को बढ़ना करता है। अगर पहले से बीपीपीवी है तो गर्मी में अच्छी तरह hydrated रहो, इलेक्ट्रोलाइट maintain करो, कसरत continue करो।

बरसात में मेनिएर रोग ज़्यादा active होता है?

मेनिएर रोग एक भीतरी कान स्थिति है जहाँ endolymph असंतुलन होता है। वायुमंडलीय दबाव बदलाव से यह असंतुलन बढ़ना हो सकता है। साथ ही – नमी से swelling बढ़ सकती है, एलर्जी सinus problems Eustachian tube को block कर सकते हैं, वायरल संक्रमण मेनिएर को ट्रिगर कर सकते हैं। बरसात में specially careful रहो।

गर्मी और बरसात दोनों में चक्कर बचाव रणनीति क्या हो?

विस्तृत रणनीति – पानी की मात्रा सबसे जरूरी, इलेक्ट्रोलाइट, नियमित कसरत cooler hours में, Adequate नींद, Stress management, बचें triggers, नियमित डॉक्टर visits, सही nutrition, Keep medicine supply updated। सबसे जरूरी listen तक your शरीर। अगर कुछ wrong लग रहा है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाओ।

📞 डॉ. प्रतीक पोरवाल | 7393062200

प्राइम ईएनटी सेंटर, Lucknow | पूरे भारत में ऑनलाइन सलाह Available

VAI Budapest 2025 Award | बैंगलोर मैनुवर विशेषज्ञ


चिकित्सकीय Disclaimer: यह लेख है के लिए शैक्षणिक उद्देश्य only और does नहीं constitute चिकित्सकीय सलाह, जांच और पहचान or prescribing guidance. All दवाएं must be taken under direct supervision का एक qualified physician. सलाह लें डॉ. प्रतीक पोरवाल पर प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई के लिए personalised इलाज.

References

  1. Karatas M. Central वर्टिगो और चक्कर: Epidemiology, differential जांच और पहचान, और आम कारण. न्यूरोलॉजिस्ट. 2008;14(6):355–364.

यह लेख है के लिए शैक्षणिक उद्देश्य. Please सलाह लें डॉ. प्रतीक पोरवाल पर प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई के लिए personal चिकित्सकीय सलाह.

डॉ. प्रतीक पोरवाल है एक ईएनटी & वर्टिगो विशेषज्ञ साथ over 13 years का experience, holding MBBS (GSVM चिकित्सकीय College), DNB ईएनटी (Tata Main अस्पताल), और CAMVD (Yenepoya University). He है यह originator का यह बैंगलोर मैनुवर के लिए Anterior नली बीपीपीवी और has published research में Frontiers में Neurology और IJOHNS. Serving पर प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई.

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Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.