अगर शांति में बैठते ही कान में घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ सुनाई देती है, और कभी-कभी अचानक चक्कर आने लगते हैं, तो यह काफी परेशान करने वाली स्थिति हो सकती है। यह आवाज़ और चक्कर आपकी नींद, एकाग्रता और रोज़मर्रा के कामों को बहुत प्रभावित कर सकते हैं। डॉक्टरी भाषा में इसे Delayed Endolymphatic Hydrops (DEH) कहते हैं, जो अक्सर पुराने बहरेपन के कई सालों बाद होता है।
अभी क्या करें
- घर पर राहत: अगर चक्कर आ रहे हैं, तो तुरंत लेट जाएं और अपनी आँखें किसी एक स्थिर चीज़ पर टिका लें। धीरे-धीरे गहरी साँस लें। अचानक उठने या चलने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है। नमक कम खाने की कोशिश करें, क्योंकि यह अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के जमाव को कम करने में मदद कर सकता है।
- डॉक्टर को दिखाएं: अगर आपको अचानक चक्कर के दौरे पड़ रहे हैं, खासकर अगर आपको पहले कभी एक कान में गंभीर बहरापन रहा हो, तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से मिलें। यह अपने आप ठीक होने वाली समस्या नहीं है और सही जांच व इलाज की ज़रूरत होती है।
- तुरंत जाएं: अगर चक्कर के साथ आपको अचानक दूसरे कान में भी सुनने में कमी महसूस हो, या नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण जैसे बोलने में दिक्कत, शरीर के एक तरफ कमज़ोरी, या चलने में बहुत ज़्यादा लड़खड़ाहट हो, तो बिना देर किए इमरजेंसी में जाएं।
तो देखिये, Delayed Endolymphatic Hydrops (DEH) में होता क्या है कि यह अंदरूनी कान की एक जटिल समस्या है जो अक्सर किसी पुरानी चोट या इन्फेक्शन के कई सालों बाद सामने आती है। हमारे कान के अंदर एक तरल पदार्थ होता है जिसे endolymph कहते हैं, और यह तरल पदार्थ कान के संतुलन और सुनने की क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। जब बचपन में हुए गलसुआ, मेनिन्जाइटिस, या किसी चोट के कारण कान के अंदर की कुछ खास संरचनाओं को नुकसान पहुँचता है, तो यह तरल पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है।
कई सालों या दशकों में, यह असंतुलन अंदरूनी कान में endolymph के असामान्य जमाव का कारण बनता है, जिसे endolymphatic hydrops कहते हैं। यह जमाव फिर अचानक चक्कर के दौरे, सुनने में उतार-चढ़ाव और कान में भारीपन जैसे लक्षण पैदा करता है। यह एक धीमी प्रक्रिया है जहाँ शुरुआती नुकसान अंततः अंदरूनी कान के नाजुक वातावरण को बाधित करता है, जिससे ये देर से दिखने वाले लक्षण पैदा होते हैं।
WHO guidelines के अनुसार, इस तरह के delayed onset की पहचान करना सही इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है।
तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?
कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। अगर आपको Delayed Endolymphatic Hydrops के साथ ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- दूसरे कान में अचानक सुनने में कमी: अगर आपके उस कान में भी अचानक सुनने में कमी आ जाए जो पहले ठीक था, तो यह एक इमरजेंसी है। यह आपके एकमात्र functional कान को प्रभावित कर सकता है।
- नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण: चक्कर के साथ अगर आपको बोलने में दिक्कत, शरीर के एक तरफ कमज़ोरी, देखने में परेशानी या चलने में बहुत ज़्यादा लड़खड़ाहट महसूस हो, तो यह दिमाग से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
- तेज़ी से बिगड़ती हुई दोनों कानों की सुनने की क्षमता: अगर आपको कुछ हफ्तों के भीतर दोनों कानों में सुनने में तेज़ी से कमी आ रही है, तो यह autoimmune inner ear disease जैसी स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।
- कान में धड़कन जैसी आवाज़: अगर आपको कान में ऐसी आवाज़ सुनाई दे जो आपकी दिल की धड़कन के साथ तालमेल बिठाती हो, तो यह किसी vascular समस्या का संकेत हो सकता है।
- लगातार गंभीर चक्कर के साथ चलने में असमर्थता: अगर आपको बहुत ज़्यादा चक्कर आ रहे हैं और आप बिल्कुल भी चल नहीं पा रहे हैं, तो यह किसी केंद्रीय कारण का संकेत हो सकता है और तुरंत जांच की ज़रूरत है।
Delayed Endolymphatic Hydrops के लक्षण अक्सर Meniere रोग जैसे होते हैं, लेकिन ये आमतौर पर पहले से मौजूद गंभीर बहरेपन के कई सालों बाद दिखाई देते हैं। मेरे OPD में मैंने देखा है कि मरीज़ अक्सर इन लक्षणों को लेकर आते हैं:
- अचानक चक्कर आना: आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप या आपके आस-पास की चीज़ें तेज़ी से घूम रही हैं। यह दौरा 20 मिनट से लेकर कई घंटों तक चल सकता है और बहुत परेशान करने वाला होता है।
- उल्टी और मतली: चक्कर के दौरे के दौरान आपको अक्सर उल्टी जैसा महसूस होगा या उल्टी हो भी सकती है। यह शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
- दूसरे कान में सुनने में उतार-चढ़ाव: अगर आपको contralateral DEH है, तो आपके उस कान में सुनने की क्षमता कम या ज़्यादा हो सकती है जो पहले ठीक था। यह खासकर कम फ्रीक्वेंसी की आवाज़ों को प्रभावित करता है।
- पहले से एक कान में गंभीर बहरापन: इस बीमारी की पहचान ही यह है कि आपको बचपन में या पहले कभी एक कान में बहुत ज़्यादा सुनने में कमी रही होगी। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी है।
- कान में घंटी या भारीपन: आपको प्रभावित कान में लगातार घंटी बजने, सीटी बजने या भनभनाहट जैसी आवाज़ सुनाई दे सकती है। कुछ लोगों को कान में भारीपन या दबाव भी महसूस होता है।
Delayed Endolymphatic Hydrops (DEH) एक ऐसी स्थिति है जो अंदरूनी कान को हुए किसी पुराने नुकसान के कारण विकसित होती है। यह नुकसान कई सालों पहले हुआ हो सकता है, और इसके लक्षण बहुत बाद में दिखाई देते हैं। कुछ मुख्य कारण जो इस स्थिति को जन्म दे सकते हैं, वे इस प्रकार हैं:
- बचपन में गलसुआ के साथ एकतरफा बहरापन: यह DEH का एक क्लासिक कारण माना जाता है। गलसुआ वायरस अंदरूनी कान की उन संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकता है जो तरल पदार्थ के संतुलन को बनाए रखती हैं, जिससे सालों बाद DEH विकसित होता है।
- पहले मेनिन्जाइटिस या वायरल लेबिरिंथाइटिस: ये इन्फेक्शन भी अंदरूनी कान में सूजन और क्षति का कारण बन सकते हैं। इस तरह की सूजन से अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के प्रवाह में गड़बड़ी हो सकती है, जिससे बाद में चक्कर के दौरे पड़ सकते हैं।
- पहले अचानक सुनने में कमी: कुछ लोगों को पहले कभी अचानक एक कान में सुनने में कमी आई होगी। भले ही उस समय इसका कारण स्पष्ट न हुआ हो, यह अंदरूनी कान में residual endolymph dysregulation छोड़ सकता है, जो बाद में DEH के रूप में सामने आता है।
- पहले temporal bone में चोट या ototoxicity: सिर में गंभीर चोट, खासकर temporal bone में, या कुछ दवाओं के कारण अंदरूनी कान को हुए toxic नुकसान से भी DEH विकसित हो सकता है। यह संरचनात्मक या toxic चोट अंदरूनी कान के सामान्य कामकाज को बाधित करती है।
जांच और निदान
जब आप क्लिनिक में Delayed Endolymphatic Hydrops के लक्षणों के साथ आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेता हूँ। मैं आपसे आपके पहले के बहरेपन, चक्कर के दौरे की प्रकृति, और किसी भी संबंधित लक्षण के बारे में विस्तार से पूछता हूँ। इसके बाद, कुछ खास जांचें की जाती हैं ताकि सही निदान तक पहुँचा जा सके:
- Audiogram: यह एक विस्तृत सुनने की जांच है जो यह दस्तावेज़ करती है कि आपके सुनने वाले कान में सुनने की क्षमता में कोई उतार-चढ़ाव है या नहीं। यह हमें आपके सुनने के पैटर्न को समझने में मदद करती है।
- Delayed gadolinium 3D-FLAIR MRI of the inner ear: यह एक खास तरह का MRI स्कैन है जो अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के जमाव को सीधे देखने में मदद करता है। यह DEH के निदान में बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।
- Electrocochleography: यह जांच अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के दबाव को मापने में मदद करती है। इसमें SP/AP ratio का बढ़ा हुआ होना hydrops का संकेत दे सकता है।
- VNG, vHIT, VEMP: ये जांचें आपके संतुलन तंत्र की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करती हैं और यह पता लगाने में मदद करती हैं कि कान के संतुलन वाले हिस्से में कोई असामान्यता है या नहीं।
- Syphilis serology, autoimmune screen: कुछ मामलों में, हम सिफलिस या autoimmune बीमारियों जैसी अन्य स्थितियों को बाहर करने के लिए रक्त जांच भी करते हैं, क्योंकि ये भी सुनने में कमी और चक्कर का कारण बन सकती हैं। इन सभी जांचों से हमें आपकी स्थिति की पूरी तस्वीर मिलती है और सही इलाज की दिशा तय होती है।
इलाज के विकल्प
Delayed Endolymphatic Hydrops का इलाज लक्षणों को नियंत्रित करने और अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के संतुलन को बनाए रखने पर केंद्रित होता है। चूंकि यह एक जटिल स्थिति है, इसलिए इलाज का तरीका हर मरीज़ के लिए अलग हो सकता है।
डॉक्टर का इलाज
आपके डॉक्टर कुछ दवाएं और जीवनशैली में बदलाव सुझा सकते हैं:
- कम नमक वाला आहार: अक्सर, हम आपको प्रतिदिन लगभग 1.5-2 ग्राम सोडियम लेने की सलाह देते हैं। नमक कम करने से अंदरूनी कान में तरल पदार्थ का जमाव कम हो सकता है।
- वेस्टिबुलर हिस्टामाइन-एगोनिस्ट दवा: यह दवा चक्कर के लक्षणों को कम करने में मदद करती है और अंदरूनी कान में रक्त प्रवाह को बेहतर बना सकती है।
- थियाजाइड-जैसे मूत्रवर्धक: ये दवाएं शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने में मदद करती हैं, जिससे अंदरूनी कान में तरल पदार्थ का दबाव कम हो सकता है।
- इंट्राटिम्पेनिक कॉर्टिकोस्टेरॉइड: गंभीर हमलों के दौरान, हम सीधे कान के पर्दे के पीछे कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इंजेक्शन दे सकते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद करता है।
- एंटी-नॉज़िया फेनोथियाज़ीन-क्लास दवा: चक्कर के तीव्र एपिसोड के दौरान मतली और उल्टी को नियंत्रित करने के लिए थोड़े समय के लिए ये दवाएं दी जा सकती हैं।
सर्जरी कब?
कुछ मामलों में, जब दवाएं और जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त राहत नहीं देते, तो सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
- Endolymphatic sac decompression: इस सर्जरी में अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के दबाव को कम करने के लिए endolymphatic sac को decompress किया जाता है।
- Vestibular nerve section: यह सर्जरी संतुलन तंत्र से दिमाग तक जाने वाली nerve को काट देती है, जिससे चक्कर के दौरे रुक जाते हैं। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब प्रभावित कान पहले से ही बहरा हो।
- Labyrinthectomy: यह एक ablative प्रक्रिया है जिसमें अंदरूनी कान के संतुलन वाले हिस्से को हटा दिया जाता है। यह केवल तभी किया जाता है जब प्रभावित कान में सुनने की क्षमता पूरी तरह से खत्म हो चुकी हो और चक्कर बहुत गंभीर हों।
- Hearing aid / CROS-BiCROS / cochlear implant: यदि सुनने में कमी बहुत ज़्यादा है, तो सुनने में सुधार के लिए hearing aid या cochlear implant जैसे उपकरण पर भी विचार किया जा सकता है।
घर पर क्या करें, क्या न करें?
Delayed Endolymphatic Hydrops के लक्षणों को घर पर मैनेज करने के लिए कुछ बातें ध्यान में रखना बहुत ज़रूरी है। सही देखभाल से आप अपने जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।
क्या करें
- कम नमक वाला भोजन खाएं: अचार, पापड़, नमकीन और अतिरिक्त नमक वाले खाद्य पदार्थों से बचें। कम नमक वाला आहार अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के जमाव को कम करने में मदद करता है, जिससे चक्कर के दौरे की संभावना कम हो सकती है।
- रोज़ 1.5-2 लीटर पानी पिएं: पर्याप्त पानी पीने से शरीर में तरल पदार्थ का संतुलन बना रहता है। यह अंदरूनी कान के तरल पदार्थ के homeostasis के लिए भी महत्वपूर्ण है, बशर्ते आपको दिल की कोई बीमारी न हो।
- एक vertigo diary बनाएं: इसमें चक्कर आने की तारीख, अवधि, संभावित ट्रिगर, और सुनने व tinnitus से संबंधित कोई भी नोट लिखें। यह आपके डॉक्टर को आपकी स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
- हमले के दौरान स्थिर लेट जाएं: अगर आपको चक्कर का दौरा पड़े, तो तुरंत अपनी तरफ लेट जाएं और अपनी आँखें किसी एक स्थिर बिंदु पर टिका लें। इससे आपको स्थिरता महसूस होगी और गिरने का खतरा कम होगा।
- नियमित सोने और खाने का समय तय करें: एक नियमित दिनचर्या बनाए रखने से शरीर के प्राकृतिक ताल को बनाए रखने में मदद मिलती है, जो अंदरूनी कान के संतुलन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है।
क्या न करें
- लंबे समय तक एंटी-नॉज़िया या वेस्टिबुलर सप्रेसेन्ट दवाएं न लें: तीव्र हमलों के बाद इन दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करने से बचें। ये आपके मस्तिष्क को चक्कर के प्रति अनुकूलन करने से रोक सकती हैं और इनके अपने दुष्प्रभाव भी होते हैं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के मूत्रवर्धक दवाएं न लें: खुद से diuretics लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और डिहाइड्रेशन हो सकता है, जो खतरनाक है। हमेशा डॉक्टर की देखरेख में ही इनका सेवन करें।
- कान में सरसों का तेल या कोई गर्म तेल न डालें: यह एक आम गलतफहमी है कि तेल डालने से कान की समस्या ठीक हो जाती है। अंदरूनी कान की बीमारियों के लिए यह बिल्कुल अप्रभावी है और अगर कान के पर्दे में छेद हो तो इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा सकता है।
- सालाना audiogram करवाना न छोड़ें: अपने सुनने वाले कान में सुनने की क्षमता में किसी भी उतार-चढ़ाव की निगरानी के लिए नियमित audiogram बहुत ज़रूरी है। इसे छोड़ने से महत्वपूर्ण बदलावों का पता नहीं चल पाएगा।
- गंभीर लक्षणों को नियति मानकर स्वीकार न करें: यह सोचना कि “अब तो कुछ नहीं हो सकता” गलत है। DEH के लक्षणों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। सही इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें।
बचाव
Delayed Endolymphatic Hydrops एक ऐसी स्थिति है जो अक्सर पुरानी अंदरूनी कान की चोटों के कारण होती है, इसलिए इसे पूरी तरह से रोकना हमेशा संभव नहीं होता। हालांकि, स्थानीय परिवेश को ध्यान में रखते हुए, कुछ कदम उठाए जा सकते हैं जो अंदरूनी कान के स्वास्थ्य को बनाए रखने और लक्षणों को बिगड़ने से रोकने में मदद कर सकते हैं:
- पानी की शुद्धता सुनिश्चित करें: मानसून के दौरान जलजनित बीमारियों से बचने के लिए उबला हुआ या फ़िल्टर किया हुआ पानी पिएं। वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शनों से बचाव अंदरूनी कान को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा सकता है।
- कान के इन्फेक्शनों का तुरंत इलाज: बचपन में होने वाले कान के इन्फेक्शनों, जैसे कि गलसुआ या मेनिन्जाइटिस, का तुरंत और प्रभावी ढंग से इलाज करवाएं। यह अंदरूनी कान को स्थायी नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।
- नियमित स्वास्थ्य जांच: अगर आपको पहले कभी एक कान में सुनने में कमी आई है, तो नियमित रूप से ENT विशेषज्ञ से जांच करवाते रहें। यह किसी भी नए लक्षण या अंदरूनी कान में बदलाव का जल्दी पता लगाने में मदद करेगा।
- संतुलित आहार और जीवनशैली: एक स्वस्थ और संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद लें और तनाव का प्रबंधन करें। एक स्वस्थ जीवनशैली शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है, जो अंदरूनी कान के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डिलीड एंडोलिम्फैटिक हाइड्रोप्स के लिए कौन से उपचार उपलब्ध हैं?
DEH को नियंत्रित करने के हमारे पास कई तरीके हैं। अक्सर, हम जीवनशैली में बदलाव से शुरुआत करते हैं, जैसे कम नमक वाला आहार, जिसका लक्ष्य प्रतिदिन लगभग 1.5-2 ग्राम सोडियम लेना होता है। दवाओं में चक्कर (वर्टिगो) में मदद करने के लिए वेस्टिबुलर हिस्टामाइन-एगोनिस्ट दवा, या तरल पदार्थ के जमाव को कम करने के लिए थियाजाइड-जैसे मूत्रवर्धक शामिल हो सकते हैं। ज़्यादा गंभीर हमलों के लिए, हम सीधे कान में कॉर्टिकोस्टेरॉइड के इंट्राटिम्पेनिक इंजेक्शन पर विचार कर सकते हैं। कुछ खास स्थितियों में, इंट्राटिम्पेनिक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए सावधानीपूर्वक विचार की आवश्यकता होती है। थोड़े समय के लिए एंटी-नॉज़िया फेनोथियाज़ीन-क्लास दवाएं भी तीव्र चक्कर (वर्टिगो) के एपिसोड के दौरान मदद कर सकती हैं।
क्या कोई उपचार या तरीके हैं जिनसे मुझे बचना चाहिए?
हाँ, सावधानी बरतना ज़रूरी है। यदि आपके चक्कर आपके एकमात्र सुनने वाले कान (कंट्रालैटरल DEH) को प्रभावित करते हैं, तो हम इंट्राटिम्पेनिक एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक इंजेक्शन से सख्ती से बचते हैं, क्योंकि इनसे आपकी बची हुई सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है। साथ ही, एंटी-नॉज़िया फेनोथियाज़ीन-क्लास दवाओं या वेस्टिबुलर सप्रेसेन्ट का लंबे समय तक उपयोग आमतौर पर अनुशंसित नहीं है, क्योंकि वे चक्कर के प्रति आपके मस्तिष्क के प्राकृतिक अनुकूलन में बाधा डाल सकते हैं। बिना उचित डॉक्टरी देखरेख और इलेक्ट्रोलाइट निगरानी के कभी भी खुद से मूत्रवर्धक दवाएं न लें। अंत में, कृपया अपने कानों में सरसों का तेल या कोई भी गर्म तेल डालने से बचें, क्योंकि ये पारंपरिक उपाय अप्रभावी होते हैं और नुकसान पहुँचा सकते हैं।
लंबे समय से बहरेपन के बाद चक्कर आना, क्या यह सिर्फ एक इत्तेफ़ाक है?
नहीं, आमतौर पर यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं होता। भले ही इतने लंबे समय के बाद यह असंबद्ध लगे, गंभीर एकतरफा बहरेपन के कई सालों या दशकों बाद चक्कर आना एक मान्यता प्राप्त मेडिकल स्थिति है जिसे ‘Delayed Endolymphatic Hydrops (DEH)’ कहते हैं। यह एक देर से होने वाली जटिलता है जिसमें कान की शुरुआती चोट अंततः अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के असंतुलन का कारण बनती है, जिससे Meniere जैसे चक्कर के दौरे पड़ते हैं। इस स्थिति का विशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों से इलाज किया जा सकता है, जो Meniere रोग के लिए उपयोग की जाती हैं, वैसी ही। इसलिए, यदि आपको चक्कर के नए लक्षण महसूस होते हैं, तो सही निदान और इलाज के लिए एक ENT विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
DEH की स्थिति में नियमित सुनने की जाँच क्यों ज़रूरी है?
नियमित सुनने की जाँच, खासकर हर साल एक audiogram, बहुत ज़रूरी है, खासकर अगर आपको Contralateral DEH है जहाँ आपका पहले से अच्छा कान अब प्रभावित हो गया है। इससे हमें उस कान में सुनने की क्षमता में किसी भी उतार-चढ़ाव की निगरानी करने और उसकी प्रगति पर नज़र रखने में मदद मिलती है। बदलावों का जल्दी पता चलने से हमें आपके इलाज की योजना को तुरंत बदलने में मदद मिलती है,
ताकि आपकी बची हुई सुनने की क्षमता को बचाया जा सके। इन सालाना जाँचों को छोड़ने का मतलब है कि हम छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलावों को चूक सकते हैं, जिससे ज़रूरी इलाज में देरी हो सकती है। यह अपनी स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने और अपनी सुनने की क्षमता को बनाए रखने के लिए एक आसान लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
डिलीड एंडोलिम्फैटिक हाइड्रोप्स (DEH) क्या है?
DEH एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपको मेनियर रोग जैसी चक्कर आने की समस्या (वर्टिगो) का अनुभव होता है, कभी-कभी सुनने में बदलाव के साथ। यह आमतौर पर कई सालों – अक्सर दशकों – बाद विकसित होता है, जब आपको एक कान में गंभीर या बहुत ज़्यादा सुनने की कमी हो चुकी होती है। यह एक देर से होने वाली जटिलता है, जिसका मतलब है कि कान की मूल चोट, शायद बचपन में हुए गलसुआ या किसी इन्फेक्शन के कारण, इसकी नींव रखती है, और चक्कर आने के लक्षण बहुत बाद में दिखाई देते हैं। यह समझना ज़रूरी है कि यह सिर्फ एक संयोग नहीं है; यह उस पहले हुए सुनने के नुकसान का एक ज्ञात परिणाम है।
मेरी शुरुआती सुनने की कमी के इतने लंबे समय बाद DEH क्यों होता है?
आपके अंदरूनी कान की मूल चोट, शायद बचपन के किसी इन्फेक्शन जैसे गलसुआ, मेनिन्जाइटिस, या किसी चोट के कारण, उन खास संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकती है जो तरल पदार्थ का संतुलन बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार होती हैं। कई सालों में, यह नुकसान अंदरूनी कान में तरल पदार्थ के जमाव का कारण बन सकता है, जिसे एंडोलिम्फैटिक हाइड्रोप्स कहते हैं। यह तरल असंतुलन फिर अचानक, रुक-रुक कर आने वाले चक्कर (वर्टिगो) के हमलों को ट्रिगर करता है, जो मेनियर रोग में देखे जाने वाले हमलों के समान होते हैं। यह एक धीमी प्रक्रिया है जहाँ शुरुआती नुकसान अंततः अंदरूनी कान के नाजुक वातावरण को बाधित करता है, जिससे ये देर से दिखने वाले लक्षण पैदा होते हैं।
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- Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
