अगर आपको कोई दवाई लेने के बाद अचानक सिर घूमने लगे, हल्कापन महसूस हो या ऐसा लगे कि आप अभी गिर जाएंगे, तो यह अनुभव बहुत परेशान करने वाला हो सकता है। यह सिर्फ एक छोटी सी बेचैनी नहीं होती, बल्कि इसकी वजह से आपकी रोज़मर्रा की गतिविधियों, जैसे गाड़ी चलाना या सीढ़ियां चढ़ना, में भी दिक्कत आ सकती है और गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है। क्लिनिक में हरदोइ से ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि दवाई खाकर चक्कर आने से उनकी नींद और एकाग्रता पर भी असर पड़ता है।

अक्सर यह समस्या कुछ खास दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण होती है, जिसे डॉक्टरी भाषा में Drug-induced dizziness कहते हैं।

अभी क्या करें

  • घर पर राहत: अगर आपको दवाई से चक्कर आ रहा है, तो तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं। अपनी आंखें बंद करके गहरी सांस लें। अचानक खड़े होने या चलने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त पानी पिएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें, खासकर गर्मी में। खासकर अगर आपको लगता है कि यह किसी नई दवाई के कारण हो रहा है।
  • तुरंत जाएं: अगर चक्कर के साथ अचानक एक कान से सुनने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए, या आपको बेहोशी आ जाए, या फिर बोलने या चलने में अचानक दिक्कत महसूस हो, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत अस्पताल जाएं। ये गंभीर समस्याओं के संकेत हो सकते हैं।

दवाई से चक्कर के कारण

दवाई से चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं, और यह समझना ज़रूरी है कि कौन सी दवाई किस तरह से आपके संतुलन को प्रभावित कर रही है। यह सिर्फ एक साइड इफेक्ट नहीं होता, बल्कि यह आपके शरीर के संतुलन बनाने वाले सिस्टम में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। कुछ दवाएं सीधे आपके अंदरूनी कान को नुकसान पहुंचाती हैं, जबकि कुछ आपके दिमाग या रक्तचाप पर असर डालती हैं।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें दवाई से चक्कर आने पर बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ये रेड फ्लैग्स गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं और इनमें तुरंत मेडिकल अटेंशन की ज़रूरत होती है।

  • एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक लेते समय अचानक एकतरफा सुनने की क्षमता में कमी: यह अंदरूनी कान को गंभीर नुकसान का संकेत है। तुरंत दवाई बंद करें और ENT विशेषज्ञ से मिलें।
  • दौरे की दवा (एंटीकन्वल्सेंट) लेने वाले मरीज़ में आंखों की अनियंत्रित हरकतें और चलने में अस्थिरता: यह दवा के अत्यधिक स्तर के कारण हो सकता है। तुरंत ब्लड टेस्ट करवाकर दवा का स्तर जांचें।
  • खड़े होने पर बेहोशी, सिर्फ हल्कापन नहीं: यह दिल की गंभीर समस्या या रक्तचाप में खतरनाक गिरावट का संकेत हो सकता है। तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच करवाएं।
  • कैंसर के मरीज़ में सिसप्लेटिन लेते समय नया चक्कर आना: यह अंदरूनी कान को नुकसान या दिमाग में मेटास्टेसिस (कैंसर का फैलना) का संकेत हो सकता है। MRI ब्रेन स्कैन से इसकी जांच करवाना ज़रूरी है।
  • किडनी फेलियर के साथ एमिनोग्लाइकोसाइड का लगातार उपयोग: किडनी खराब होने पर दवा शरीर से ठीक से बाहर नहीं निकल पाती, जिससे अंदरूनी कान को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। दवा की खुराक की तुरंत समीक्षा करें और सुनने की जांच करवाएं।
  • दवाई बदलने के बाद भी चक्कर के साथ नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण (जैसे शरीर के एक हिस्से में कमज़ोरी या सुन्नपन): यह दिमाग में किसी अन्य संरचनात्मक समस्या का संकेत हो सकता है। MRI स्कैन से इसकी जांच करवाना ज़रूरी है।

दवाई से चक्कर के लक्षण

जब आपको दवाई से चक्कर आता है, तो यह सिर्फ एक तरह का महसूस नहीं होता, बल्कि इसके कई अलग-अलग रूप हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सी दवाई आपके शरीर के किस हिस्से को प्रभावित कर रही है। मेरे OPD में मैंने देखा है कि मरीज़ अक्सर इन लक्षणों को लेकर आते हैं:

  • खड़े होने पर चक्कर आना: यह सबसे आम लक्षणों में से एक है, जिसमें आपको खड़े होते ही सिर हल्का महसूस होता है या लगता है कि आप बेहोश हो जाएंगे। यह अक्सर रक्तचाप कम होने के कारण होता है।
  • अस्थिरता और संतुलन बिगड़ना: इसमें आपको ऐसा महसूस होता है कि ज़मीन हिल रही है या आप सीधे चल नहीं पा रहे हैं, लेकिन सब कुछ घूमता हुआ महसूस नहीं होता। यह अंदरूनी कान के संतुलन तंत्र को नुकसान पहुंचने पर होता है।
  • आंखों की अनियंत्रित हरकतें और बोलने में दिक्कत: यह लक्षण कुछ खास दवाओं, जैसे दौरे की दवाओं के अत्यधिक स्तर के कारण हो सकता है, जिसमें दिमाग के संतुलन केंद्र प्रभावित होते हैं।
  • सामान्य अस्थिरता और सुस्ती: कुछ दवाएं, जैसे नींद की गोलियां या दर्द निवारक, आपके पूरे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को धीमा कर देती हैं, जिससे आपको सुस्ती और चलने में अस्थिरता महसूस होती है।
  • SSRI शुरू करने के पहले 1-2 हफ्तों में हल्का चक्कर: कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाएं शुरू करने पर शुरुआती दिनों में हल्का चक्कर आ सकता है, जो आमतौर पर कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है।
  • संतुलन के लक्षणों के साथ सुनने की क्षमता में कमी: कुछ दवाएं, जैसे एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक और कीमोथेरेपी की दवाएं, अंदरूनी कान के सुनने और संतुलन दोनों हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • खड़े होने पर संक्षिप्त बेहोशी या लगभग बेहोशी: यह रक्तचाप में अचानक और गंभीर गिरावट के कारण हो सकता है, जिससे दिमाग को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता और आप कुछ पल के लिए बेहोश हो सकते हैं।

जांच और निदान

जब आप दवाई से चक्कर आने की शिकायत लेकर मेरे पास में आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेता हूं। इसमें मैं आपसे पूछता हूं कि आपको कब से चक्कर आ रहा है, यह कैसा महसूस होता है, और आप कौन-कौन सी दवाएं ले रहे हैं — डॉक्टर की पर्ची वाली और बिना पर्ची वाली दोनों।

इसके बाद, मैं आपका शारीरिक परीक्षण करता हूं, जिसमें आपके रक्तचाप को खड़े होने और बैठने दोनों स्थितियों में मापा जाता है। इससे यह पता चलता है कि क्या आपका रक्तचाप स्थिति बदलने पर बहुत ज़्यादा गिर रहा है। मैं आपके संतुलन और आंखों की हरकतों की भी जांच करता हूं।

कुछ मामलों में, दवा के स्तर की जांच के लिए खून का टेस्ट भी किया जा सकता है, खासकर यदि आप दौरे की दवाएं ले रहे हों। अंदरूनी कान के संतुलन तंत्र की विस्तृत जांच के लिए Video Head Impulse Test (vHIT) और कैलोरिक टेस्टिंग की जा सकती है। यदि सुनने की क्षमता में कमी का संदेह हो, तो सुनने की जांच भी की जाती है। किडनी के कार्य की जांच भी ज़रूरी है, खासकर यदि आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो किडनी को प्रभावित करती हैं। इन सभी जांचों से हमें समस्या की जड़ तक पहुंचने में मदद मिलती है।

इलाज के विकल्प

दवाई से चक्कर का इलाज मुख्य रूप से उस दवा की पहचान करने और उसे बदलने या उसकी खुराक को समायोजित करने पर केंद्रित होता है जो समस्या पैदा कर रही है।

डॉक्टर का इलाज

आपके डॉक्टर सबसे पहले उन दवाओं की पहचान करेंगे जो चक्कर का कारण बन रही हैं। WHO guidelines के अनुसार, यदि संभव हो, तो उस दवा को बंद किया जा सकता है, उसकी खुराक कम की जा सकती है, या उसे किसी दूसरी दवा से बदला जा सकता है। यदि रक्तचाप कम होने के कारण चक्कर आ रहा है, तो रक्तचाप की दवाओं को समायोजित किया जाएगा।

एमिनोग्लाइकोसाइड एंटीबायोटिक लेने वाले मरीज़ों में, डॉक्टर खुराक को ध्यान से प्रबंधित करते हैं और सुनने की क्षमता की निगरानी करते हैं। यदि अंदरूनी कान को स्थायी नुकसान हुआ है, तो वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन नामक विशेष व्यायाम दिए जा सकते हैं, जो दिमाग को संतुलन की कमी के साथ तालमेल बिठाने में मदद करते हैं। बुज़ुर्गों में, सभी दवाओं की समीक्षा की जाती है ताकि अनावश्यक दवाओं को हटाया जा सके।

सर्जरी कब?

दवाई से चक्कर आने की समस्या के लिए आमतौर पर सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती है। यह एक मेडिकल कंडीशन है जिसका इलाज दवाओं के समायोजन या वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन से किया जाता है। सर्जरी केवल तभी विचार की जाती है जब चक्कर का कारण कोई अन्य संरचनात्मक समस्या हो, जो दवाई से संबंधित न हो, और वह भी बहुत ही दुर्लभ मामलों में।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

दवाई से चक्कर आने पर घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि आप सुरक्षित रहें और लक्षणों को कम कर सकें।

क्या करें

  • धीरे-धीरे उठें: लेटने या बैठने की स्थिति से खड़े होते समय हमेशा धीरे-धीरे उठें। पहले बैठकर 30 सेकंड का विराम लें, फिर पूरी तरह खड़े हों। इससे रक्तचाप को समायोजित होने का समय मिलता है।
  • पर्याप्त पानी पिएं: हर दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। गर्मी में निर्जलीकरण से चक्कर बढ़ सकता है, इसलिए हाइड्रेटेड रहना बहुत ज़रूरी है।
  • दवाओं की डायरी बनाएं: एक डायरी में अपनी सभी दवाओं और चक्कर आने के समय को नोट करें। यह जानकारी आपके डॉक्टर को कारण जानने में मदद करेगी।
  • सहारे का उपयोग करें: जब तक चक्कर आ रहा हो, सीढ़ियां चढ़ते समय या चलते समय रेलिंग या किसी सहारे का उपयोग करें। इससे गिरने का खतरा कम होता है।
  • संपीड़न मोज़े पहनें: यदि आपके डॉक्टर ने ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन के लिए संपीड़न मोज़े पहनने की सलाह दी है, तो उन्हें नियमित रूप से पहनें।

क्या न करें

  • चक्कर आने पर गाड़ी न चलाएं: यदि आपको CNS-डिप्रेसेंट दवाओं के कारण चक्कर आ रहा है, तो गाड़ी चलाना या मशीनरी चलाना बहुत खतरनाक हो सकता है।
  • दवा की खुराक खुद न बदलें: अपने डॉक्टर से पूछे बिना किसी भी निर्धारित दवा की खुराक को कम या ज़्यादा न करें। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • शराब और दवाओं का मिश्रण: एंटीकन्वल्सेंट, बेंजोडायजेपाइन या एंटीहिस्टामाइन जैसी दवाओं के साथ शराब का सेवन न करें। यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अवसाद को कई गुना बढ़ा देता है।
  • अचानक दवा बंद न करें: दौरे की दवाएं या बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाओं को अचानक बंद करने से दौरे या गंभीर वापसी के लक्षण हो सकते हैं।

बचाव

दवाई से चक्कर आने से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर वातावरण में।

  • दवाओं की नियमित समीक्षा: यदि आप कई दवाएं ले रहे हैं, खासकर यदि आप बुज़ुर्ग हैं, तो अपने डॉक्टर से अपनी सभी दवाओं की नियमित समीक्षा करवाएं। इससे अनावश्यक दवाओं को हटाया जा सकता है और खुराक को समायोजित किया जा सकता है।
  • निर्जलीकरण से बचें: गर्म और शुष्क जलवायु में पर्याप्त पानी पीना बहुत ज़रूरी है। निर्जलीकरण रक्तचाप को कम कर सकता है और चक्कर आने का खतरा बढ़ा सकता है।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट की जानकारी: कोई भी नई दवा शुरू करने से पहले उसके संभावित साइड इफेक्ट्स के बारे में अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछें। यदि चक्कर आना एक संभावित साइड इफेक्ट है, तो उसके लिए तैयार रहें।
  • किडनी के स्वास्थ्य का ध्यान: यदि आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो किडनी को प्रभावित कर सकती हैं (जैसे कुछ एंटीबायोटिक्स), तो अपनी किडनी के कार्य की नियमित जांच करवाएं। स्वस्थ किडनी दवाओं को शरीर से ठीक से बाहर निकालने में मदद करती है।

बच्चों और बुज़ुर्गों में

दवाई से चक्कर आने की समस्या बच्चों और बुज़ुर्गों में अलग तरह से दिख सकती है और इसके जोखिम भी अलग होते हैं।

बच्चों में

बच्चों में दवाई से चक्कर आना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि वे अपने लक्षणों को ठीक से बता नहीं पाते। माता-पिता को ध्यान देना चाहिए अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए, चलने में लड़खड़ाए, या खेलने में रुचि खो दे। कुछ एंटीबायोटिक्स या एलर्जी की दवाएं बच्चों में सुस्ती और अस्थिरता पैदा कर सकती हैं।

बच्चों के मामले में, कोई भी नई दवा शुरू करने पर उनके व्यवहार और संतुलन पर नज़र रखना बहुत ज़रूरी है।

बुज़ुर्गों में

बुज़ुर्गों में दवाई से चक्कर आने का जोखिम काफी ज़्यादा होता है। इसका मुख्य कारण पॉलीफ़ार्मेसी (एक साथ कई दवाएं लेना) और उम्र के साथ शरीर में होने वाले बदलाव हैं, जैसे किडनी के कार्य में कमी और रक्तचाप को नियंत्रित करने की क्षमता में गिरावट। बुज़ुर्गों में चक्कर आने से गिरने और गंभीर चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।

NICE guidelines के अनुसार, बुज़ुर्गों में हर नई दवा शुरू करने से पहले उसके संभावित साइड इफेक्ट्स और अन्य दवाओं के साथ उसके इंटरैक्शन पर विचार करना चाहिए।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे अपनी दवा से होने वाले चक्कर के बारे में कब चिंतित होना चाहिए?

यदि आपके चक्कर के साथ अचानक, गंभीर सुनने की क्षमता में कमी आती है, खासकर यदि आप कुछ एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। साथ ही, यदि आपको खड़े होने पर बेहोशी के दौरे पड़ते हैं, या आपकी दृष्टि में नई समस्याएं आती हैं जैसे अनियंत्रित आंखों की हरकतें, या दौरे की दवा लेते समय गंभीर अस्थिरता और चलने में कठिनाई होती है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। कैंसर के मरीजों के लिए, नए वर्टिगो का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने की आवश्यकता होती है ताकि अन्य गंभीर कारणों को खारिज किया जा सके। चक्कर के साथ कोई भी नया न्यूरोलॉजिकल संकेत तुरंत जांच का वारंट करता है।

क्या यह सच है कि कुछ एंटीबायोटिक्स की कम खुराक मेरे कानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी?

यह एक आम गलतफहमी है। कुछ एंटीबायोटिक्स, जैसे एमिनोग्लाइकोसाइड्स से अंदरूनी कान को होने वाला नुकसान संचयी होता है और यह केवल उच्च खुराक के साथ ही नहीं, बल्कि मानक खुराक के साथ भी हो सकता है। यदि आपको पहले से ही किडनी की समस्या या सुनने की क्षमता में कमी है तो जोखिम अधिक होता है। इसके प्रभाव अपरिवर्तनीय हो सकते हैं, जो सुनने और संतुलन दोनों को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि डॉक्टरों के लिए ऐसे उपचारों से पहले और दौरान आपकी सुनने की क्षमता और किडनी के कार्य की निगरानी करना आवश्यक है ताकि किसी भी समस्या का जल्द पता लगाया जा सके।

अगर मेरी ब्लड प्रेशर की दवाई से मुझे चक्कर आते हैं, तो क्या मुझे खुराक आधी कर देनी चाहिए?

नहीं, आपको अपने डॉक्टर से पूछे बिना अपनी दवाई की खुराक कभी नहीं बदलनी चाहिए। ब्लड प्रेशर की गोलियों से चक्कर आना यह संकेत दे सकता है कि वे काम कर रही हैं, लेकिन खुराक को सिर्फ आधा करना खतरनाक हो सकता है। इससे आपका ब्लड प्रेशर अप्रत्याशित रूप से ऊपर-नीचे हो सकता है, जिससे रीबाउंड हाइपरटेंशन या अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आपके डॉक्टर को स्थिति का ठीक से आकलन करने की आवश्यकता है। वे दवाई का प्रकार बदलने या खुराक को सावधानी से समायोजित करने पर विचार कर सकते हैं, बजाय इसके कि इसे सिर्फ आधा कर दिया जाए।

अगर मुझे लगता है कि मेरी दवाई से चक्कर आ रहे हैं तो मुझे क्या करना चाहिए?

सबसे पहला कदम है अपने डॉक्टर से बात करना। अपनी दवाई को खुद से बंद या न बदलें, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है। आपके डॉक्टर आपकी सभी मौजूदा दवाइयों की समीक्षा करेंगे, जिनमें बिना पर्ची वाली दवाएं भी शामिल हैं, ताकि किसी भी संभावित कारण की पहचान की जा सके। वे खुराक को समायोजित कर सकते हैं, दवाई बदल सकते हैं, या लक्षणों को प्रबंधित करने के तरीके सुझा सकते हैं, जैसे संतुलन के लिए विशिष्ट व्यायाम (वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन) या खड़े होने पर चक्कर आने के लिए सरल जीवनशैली में बदलाव। सबसे अच्छा समाधान खोजने के लिए एक पूरी जांच महत्वपूर्ण है।

दवा से होने वाला चक्कर क्या होता है और यह कैसा महसूस होता है?

दवा से होने वाला चक्कर का मतलब है कि आप जो दवा ले रहे हैं, उसकी वजह से आपको अस्थिरता, हल्कापन या सब कुछ घूमता हुआ (वर्टिगो) महसूस होना। इससे आपको ऐसा भी लग सकता है कि आप बेहोश हो सकते हैं (प्रीसिंकोप)। कई अलग-अलग तरह की दवाएं, चाहे वे डॉक्टर की पर्ची वाली हों या बिना पर्ची वाली,
ये लक्षण पैदा कर सकती हैं। यह एक आम समस्या है, खासकर उन बुजुर्गों में जो कई दवाएं ले रहे होते हैं। यह कैसा महसूस होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दवा आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती है, चाहे वह सीधे आपके अंदरूनी कान, आपके मस्तिष्क के संतुलन केंद्रों या आपके रक्तचाप को प्रभावित कर रही हो।

कुछ दवाएं खड़े होने पर मुझे चक्कर क्यों देती हैं?

कुछ दवाएं, जैसे कि हाई ब्लड प्रेशर के लिए, पानी की गोलियां (ड्यूरेटिक्स), या कुछ एंटीडिप्रेसेंट दवाएं (SSRI-क्लास एंटीडिप्रेसेंट), खड़े होने पर चक्कर का कारण बन सकती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे आपकी रक्त वाहिकाओं को आराम दे सकती हैं या आपके शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा को कम कर सकती हैं, जिससे स्थिति बदलने पर रक्तचाप में अस्थायी गिरावट आती है। आपके मस्तिष्क को कुछ समय के लिए पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं मिल पाता, जिससे हल्कापन या अस्थिरता महसूस होती है। यह चक्कर आने का एक बहुत ही सामान्य कारण है, खासकर उन बुजुर्गों में जो कई दवाएं ले रहे हैं।


इस विषय पर अन्य गाइड

  • कारण और लक्षण
  • कब डॉक्टर को दिखाएं
  • घर पर देखभाल
  • डॉक्टर से कैसे मिलें
  • बचाव के उपाय

चक्कर, वर्टिगो, या कान-नाक-गले से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए Dr. Prateek Porwal से सलाह लें। अभी WhatsApp करें या क्लिनिक पर अपॉइंटमेंट बुक करें।

  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
  • Dr. Prateek Porwal — ENT & Vertigo Specialist
  • Prime ENT Center — Hardoi, Uttar Pradesh, India
  • Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP, India 241001
  • 📍 Location on Maps
  • 📞 +91-7393062200
  • 💬 WhatsApp
  • 🌐 drprateekporwal.com
  • 🏥 primeentcenter.in

इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.