“कान के पत्थर हिल गए हैं” — यह बात मैं अपने मरीज़ों को अक्सर समझाता हूँ। और अक्सर वे पहली बार सुनते हैं। कन्नौज, फर्रुखाबाद, सीतापुर से आने वाले मरीज़ सोचते हैं कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी है। लेकिन जब समझाता हूँ — तो राहत मिलती है।
कान के अंदर वास्तव में छोटे-छोटे कैल्शियम के कण होते हैं। और जब ये कण अपनी जगह से हट जाते हैं — तब चक्कर आता है। इसे ही BPPV कहते हैं — कान के पत्थर BPPV का सबसे सीधा कारण हैं।
कान के पत्थर BPPV — कान के अंदर होता क्या है?
एक 2024 Cochrane Review के अनुसार BPPV दुनिया का सबसे आम वेस्टिबुलर डिसऑर्डर है (PubMed)। हमारे कान के तीन हिस्से होते हैं — बाहरी, मध्य और आंतरिक। चक्कर की जड़ आंतरिक कान (Inner Ear) में होती है।
आंतरिक कान में एक संतुलन प्रणाली होती है। इसमें तीन अर्धवृत्ताकार नलियाँ (Semicircular Canals) होती हैं — जो द्रव से भरी होती हैं। इन नलियों में जब द्रव हिलता है, तो दिमाग को पता चलता है कि सिर किस दिशा में मुड़ा।
अब — इन नलियों के पास एक थैली होती है जिसमें कैल्शियम के छोटे क्रिस्टल होते हैं। इन्हें ओटोकोनिया (Otoconia) कहते हैं। जब ये क्रिस्टल टूटकर नलियों में आ जाते हैं — तब सिर हिलाने पर द्रव गलत तरीके से हिलता है। दिमाग को गलत संकेत जाता है। और चक्कर आता है।
किसे होता है यह?
- 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में सबसे ज़्यादा।
- महिलाओं में पुरुषों से 2-3 गुना ज़्यादा।
- विटामिन D की कमी वालों में।
- सिर में चोट लगने के बाद।
- ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी कमज़ोर होना) के मरीज़ों में।
क्या महसूस होता है?
BPPV में चक्कर हमेशा किसी हरकत से जुड़ा होता है:
- रात को करवट बदलने पर — तेज़ चक्कर।
- सुबह उठते वक्त — कमरा घूमता हुआ लगता है।
- ऊपर की तरफ देखने पर — सिर घूमना।
- झुककर कुछ उठाने पर — अचानक चक्कर।
चक्कर 10 से 60 सेकंड रहता है। फिर खुद रुक जाता है। लेकिन कमज़ोरी और बेचैनी देर तक रह सकती है।
यह BP की बीमारी नहीं है
बहुत से मरीज़ समझते हैं कि चक्कर BP से आता है। लेकिन BPPV में BP बिल्कुल सामान्य रहता है। चक्कर पूरी तरह कान से आता है। BP की दवा से BPPV ठीक नहीं होता।
कान के पत्थर का इलाज
इलाज बहुत सरल है — सिर को एक खास क्रम में घुमाते हैं। इससे कण वापस सही जगह चले जाते हैं। इस प्रक्रिया को Epley Maneuver कहते हैं।
यह प्रक्रिया क्लिनिक में 10-15 मिनट में होती है। कोई दर्द नहीं, कोई सुई नहीं, कोई ऑपरेशन नहीं।
अगर कान की अगली नहर प्रभावित हो — जो दुर्लभ है — तो मैं बैंगलोर मैनुवर (Bangalore Maneuver) करता हूँ। यह मैंने खुद विकसित किया है।
घर पर क्या करें और क्या नहीं
करें:
- धीरे-धीरे उठें — अचानक न उठें।
- ऊँचे तकिये पर सोएँ।
- अगर चक्कर आए तो बैठ जाएँ, लेट न जाएँ।
न करें:
- YouTube पर देखकर खुद Epley Maneuver न करें।
- Betahistine या प्रोक्लोरपेराज़ीन (उल्टी-रोधी दवा) न लें — ये BPPV को ठीक नहीं करतीं।
- अकेले वाहन न चलाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्र: क्या कान के पत्थर खुद ठीक हो जाते हैं?
उ: कभी-कभी हाँ। लेकिन इसमें महीनों लग सकते हैं। इस दौरान गिरने का खतरा रहता है। इलाज से कुछ ही दिनों में आराम मिलता है।
प्र: क्या BPPV के लिए MRI ज़रूरी है?
उ: आमतौर पर नहीं। Dix-Hallpike जाँच से ही पता चल जाता है। MRI केवल तब कराते हैं जब अन्य कारण संभव हों।
प्र: इलाज के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?
उ: Maneuver के बाद 24 घंटे ज़्यादा झुकने और करवट बदलने से बचें। अगले दिन से सामान्य काम कर सकते हैं।
प्र: विटामिन D से कान के पत्थर ठीक होते हैं क्या?
उ: विटामिन D BPPV को ठीक नहीं करता। लेकिन कमी हो तो पूरी करने से दोबारा होने की संभावना कम होती है।
प्र: हरदोई में BPPV का इलाज कहाँ होता है?
उ: Prime ENT Center, हरदोई में। यहाँ VNG जाँच की सुविधा भी है और बैंगलोर मैनुवर भी उपलब्ध है।
और पढ़ें
- BPPV क्या है — पूरी जानकारी
- Epley Maneuver — BPPV का इलाज
- VNG जाँच — चक्कर की सटीक पहचान
- Vestibular Rehabilitation Therapy
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अगर आपको या आपके परिवार में किसी को चक्कर आने की समस्या है, तो देर न करें। Prime ENT Center, हरदोई में VNG और Stabilometry जाँच की सुविधा उपलब्ध है — Central UP में केवल यहाँ।
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कान के पत्थर कैसे हिलते हैं?
कान के अंदर Utricle नाम की एक थैली होती है। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट के बहुत छोटे-छोटे कण चिपके रहते हैं। ये कण संतुलन बनाने में मदद करते हैं।
लेकिन कभी-कभी ये कण टूटकर अलग हो जाते हैं और कान की नलियों (Semicircular Canals) में चले जाते हैं। जैसे बोतल में कंकड़ हो और बोतल हिलाओ — वैसे ही ये कण जब हिलते हैं तो दिमाग को गलत संकेत जाता है।
मैंने कई मरीज़ों को यह समझाया है — “समझिए, कान में छोटी सी कंकड़ी घूम रही है।” यह सबसे आसान तरीका है समझने का।
कान के पत्थर हिलने के कारण
सबसे आम कारण:
- उम्र बढ़ना — 50 साल के बाद ये कण कमज़ोर होने लगते हैं।
- सिर पर चोट — गिरना, दुर्घटना, या सिर से कहीं टकराना।
- Vitamin D की कमी — UP में बहुत आम है। कैल्शियम कमज़ोर होता है।
- लंबे समय तक लेटे रहना — बीमारी या ऑपरेशन के बाद।
- कान की सर्जरी — कभी-कभी सर्जरी के बाद भी BPPV हो जाता है।
फर्रुखाबाद से एक बुज़ुर्ग महिला आई थीं — 68 साल, करवट बदलते ही तेज़ चक्कर। Vitamin D लेवल 8 था। इलाज के साथ Vitamin D भी शुरू किया — 3 महीने में कोई शिकायत नहीं।
इलाज में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर मरीज़ एक ही बार में ठीक हो जाते हैं। मैनुवर 15-20 मिनट का होता है। कुछ मरीज़ों में 2-3 सिटिंग लगती हैं।
इलाज के बाद 24-48 घंटे सिर सीधा रखना होता है। तकिया ऊँचा रखें। और हाँ — इलाज के बाद हल्का असंतुलन 2-3 दिन रह सकता है। घबराएँ नहीं, यह सामान्य है।
क्या कान के पत्थर की सर्जरी होती है?
बहुत कम मामलों में — जब बार-बार मैनुवर करने के बावजूद BPPV ठीक न हो। ऐसा 1-2% मरीज़ों में होता है। सर्जरी में उस नली को बंद कर दिया जाता है जहाँ कण जा रहे हैं।
लेकिन मेरे अनुभव में, अच्छे से जाँच करने पर ज़्यादातर मामले बिना सर्जरी ठीक होते हैं।
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉ. प्रतीक पोरवाल से Prime ENT Center, हरदोई में परामर्श लें या 7393062200 पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें। वेबसाइट: drprateekporwal.com

