अगर शांति में बैठते ही आपके कान में घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ सुनाई देती है, तो यह वाकई एक परेशान करने वाली स्थिति हो सकती है। इसके चलते, यह आवाज़ आपकी नींद, एकाग्रता और रोज़मर्रा के कामों को प्रभावित कर सकती है, जिससे आप चिड़चिड़े और थके हुए महसूस कर सकते हैं। क्लिनिक में ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि रात को सोने के समय यह आवाज़ और तेज़ महसुस होती है, और उन्हें लगता है कि उनका संतुलन बिगड़ रहा है।

डॉक्टरी भाषा में इसे Chronic subjective dizziness या PPPD कहते हैं, और यह एक वास्तविक समस्या है जिसका इलाज संभव है।

अभी क्या करें

  • घर पर राहत: अगर आपको लगातार अस्थिरता या झूलने जैसा महसूस हो रहा है, तो सबसे पहले शांत जगह पर लेट जाएं और अपनी आँखें बंद कर लें। गहरी साँसें लें और किसी भी अचानक हरकत से बचें। इससे चक्कर की तीव्रता कुछ हद तक कम हो सकती है।
  • डॉक्टर को दिखाएं: यदि आपको यह अस्थिरता या चक्कर 3 महीने से ज़्यादा समय से महसूस हो रहा है और यह आपके रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित कर रहा है, तो बिना देर किए ENT specialist से मिलें। खासकर अगर यह खड़े होने पर, हिलने-डुलने पर या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ज़्यादा होता है।
  • तुरंत जाएं: अगर चक्कर के साथ-साथ आपको अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी, बोलने में दिक्कत, देखने में परेशानी, या बहुत तेज़ सिरदर्द जैसे नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हों, तो तुरंत किसी अस्पताल जाएं। ये किसी गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं? कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

  • नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण: अगर आपको चक्कर के साथ-साथ शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी, सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, या देखने में परेशानी हो रही है, तो यह दिमाग़ से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
  • लगातार बिगड़ती स्थिति: यदि आपके चक्कर या अस्थिरता समय के साथ कम होने के बजाय लगातार बिगड़ती जा रही है, तो यह किसी अंदरूनी बीमारी का लक्षण हो सकता है जिसकी तुरंत जांच ज़रूरी है।
  • चलते समय दुनिया हिलती हुई दिखना: अगर चलते समय आपको ऐसा महसूस हो कि आपके सामने की चीज़ें हिल रही हैं या कूद रही हैं, तो यह दोनों कानों के संतुलन तंत्र में समस्या का संकेत हो सकता है।
  • एक कान से नई सुनाई कम होना, टिनिटस या चेहरे का सुन्न होना: ये लक्षण कान की नस या दिमाग़ के पास की किसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।
  • आवाज़ या दबाव से चक्कर आना: अगर तेज़ आवाज़ या कान पर दबाव पड़ने से आपको चक्कर आते हैं, तो यह कान के अंदर की किसी दुर्लभ समस्या (जैसे SSCD या third-window) का संकेत हो सकता है।
  • बहुत ज़्यादा चिंता या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार: अगर चक्कर की वजह से आपको इतनी ज़्यादा चिंता या उदासी हो रही है कि आप खुद को नुकसान पहुँचाने के बारे में सोचने लगे हैं, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या आपातकालीन सेवा से मदद लें।

Chronic subjective dizziness के लक्षण

Chronic subjective dizziness (CSD) में चक्कर आने का अनुभव थोड़ा अलग होता है, यह आमतौर पर घूमने वाला नहीं होता बल्कि एक अजीब सी अस्थिरता या असंतुलन का एहसास होता है। * लगातार अस्थिरता, झूलने या डगमगाने जैसा महसूस होना: आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किसी नाव पर हैं या ज़मीन हिल रही है, भले ही आप स्थिर खड़े हों। यह एक गैर-घूमने वाला चक्कर है, जिसमें सब कुछ घूमता हुआ नहीं लगता। * खड़े होने पर लक्षणों का बिगड़ना; लेटने पर बेहतर महसूस होना: जब आप सीधे खड़े होते हैं या चलते हैं, तो यह अस्थिरता बढ़ जाती है, जबकि लेट जाने पर आपको काफी आराम मिलता है। यह postural sensitisation का एक मुख्य लक्षण है। * सक्रिय या निष्क्रिय गति के साथ लक्षणों का बिगड़ना: चाहे आप खुद चल रहे हों या किसी चलती हुई गाड़ी में बैठे हों, आपकी अस्थिरता बढ़ जाती है। आपका दिमाग़ गति को ज़्यादा संवेदनशील तरीके से संसाधित करता है। * जटिल दृश्य वातावरण में लक्षणों का बिगड़ना (जैसे बाज़ार, भीड़, स्क्रीन, पैटर्न वाली फ़र्श): भीड़-भाड़ वाले बाज़ारों में, चलती हुई स्क्रीन देखते समय, या पैटर्न वाली फ़र्श पर चलते समय आपको ज़्यादा अस्थिरता महसूस होती है। आपका दिमाग़ देखने वाली चीज़ों पर ज़्यादा निर्भर करने लगता है। * कोई वास्तविक घूमने वाला चक्कर नहीं, कोई ऑसिलोप्सिया नहीं: इस स्थिति में आपको ऐसा नहीं लगता कि सब कुछ घूम रहा है, और न ही चलते समय चीज़ें हिलती हुई दिखती हैं। यह इसे कान की अन्य समस्याओं से अलग करता है। * लगातार 3 महीने से ज़्यादा समय तक लक्षण: यह अस्थिरता या चक्कर ज़्यादातर दिनों में, 3 महीने से ज़्यादा समय तक बना रहता है। यह इसकी क्रॉनिक प्रकृति को दर्शाता है।

Chronic subjective dizziness (CSD) अक्सर कान के संतुलन तंत्र में किसी शुरुआती समस्या के बाद शुरू होता है, लेकिन वह समस्या ठीक होने के बाद भी दिमाग़ का संतुलन बनाने का तरीका बदल जाता है। * वेस्टिबुलर न्यूरिटिस के बाद: कान की नस में इन्फेक्शन के बाद, जब नस ठीक हो जाती है, तब भी कुछ लोगों का दिमाग़ संतुलन को सही से एडजस्ट नहीं कर पाता। * BPPV के बाद (पथरी को सही जगह लाने के बाद): BPPV में कान की पथरी को सही जगह लाने के बाद भी, कुछ मरीज़ों को लगातार अस्थिरता महसूस होती है। * वेस्टिबुलर माइग्रेन के दौरे के बाद: माइग्रेन के साथ होने वाले चक्कर के दौरे के बाद, दिमाग़ का संतुलन सिस्टम अतिसंवेदनशील हो सकता है, जिससे लगातार अस्थिरता बनी रहती है। * सिर में चोट के बाद: सिर में हल्की चोट लगने के बाद, दिमाग़ के संतुलन केंद्रों में बदलाव आ सकता है, जिससे CSD के लक्षण पैदा हो सकते हैं। * पैनिक अटैक के बाद चक्कर आना: कुछ लोगों को गंभीर पैनिक अटैक के दौरान चक्कर आते हैं, और उसके बाद भी उन्हें लगातार अस्थिरता महसूस हो सकती है।

जांच और निदान

जब आप क्लिनिक में Chronic subjective dizziness की समस्या लेकर आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी बात सुनता हूँ। मैं आपसे आपके लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछता हूँ — कब शुरू हुए, कैसे महसूस होते हैं, और किन परिस्थितियों में बिगड़ते हैं। इसके बाद, मैं आपकी शारीरिक जांच करता हूँ, जिसमें आपके कान, आँख की गति और संतुलन की जांच शामिल होती है। CSD का निदान मुख्य रूप से आपके लक्षणों के पैटर्न और कुछ क्लीनिकल मानदंडों (जैसे Bárány PPPD या Staab CSD मानदंड) के आधार पर किया जाता है। कुछ वेस्टिबुलर फ़ंक्शन टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे calorics, vHIT, या VEMP। ये टेस्ट यह देखने के लिए किए जाते हैं कि आपके कान का संतुलन तंत्र ठीक से काम कर रहा है या नहीं। अक्सर CSD में ये टेस्ट सामान्य आते हैं, या केवल शुरुआती घटना से बचा हुआ कोई छोटा-मोटा दोष दिखाते हैं। अगर ज़रूरी हो, तो MRI brain और IAM का स्कैन भी करवाया जा सकता है। यह स्कैन दिमाग़ या कान की नस में किसी और गंभीर समस्या, जैसे ट्यूमर या अन्य केंद्रीय पैथोलॉजी, को बाहर करने के लिए किया जाता है। मैं Dizziness Handicap Inventory जैसे प्रश्नावली का भी उपयोग करता हूँ ताकि यह समझा जा सके कि यह चक्कर आपके जीवन को कितना प्रभावित कर रहा है, और चिंता या डिप्रेशन के लिए भी स्क्रीनिंग की जाती है, क्योंकि ये अक्सर CSD के साथ जुड़े होते हैं। इन सभी जांचों से हमें सही निदान तक पहुँचने और आपके लिए सबसे अच्छा इलाज तय करने में मदद मिलती है।

इलाज के विकल्प

Chronic subjective dizziness (CSD) का इलाज एक बहुआयामी दृष्टिकोण से किया जाता है, जिसमें कई तरह के उपचार शामिल होते हैं ताकि दिमाग़ को संतुलन की जानकारी को फिर से सही तरीके से संसाधित करना सिखाया जा सके। ### डॉक्टर का इलाज।
आपके डॉक्टर आपके लक्षणों और आपकी स्थिति के आधार पर एक व्यक्तिगत इलाज योजना बनाएंगे। इसमें कस्टमाइज़्ड वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) शामिल हो सकता है, जिसमें हैबिट्यूएशन और विज़ुअल डीसेंसिटाइज़ेशन एक्सरसाइज़ शामिल होती हैं। ये एक्सरसाइज़ आपके दिमाग़ को उन गतिविधियों और दृश्यों के प्रति कम संवेदनशील बनाना सिखाती हैं जो चक्कर को ट्रिगर करते हैं। कभी-कभी, SSRI-क्लास एंटीडिप्रेसेंट या SNRI-क्लास एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाएँ भी दी जा सकती हैं। ये दवाएँ दिमाग़ के उन सर्किट्स को नियंत्रित करती हैं जो संतुलन और चिंता को प्रभावित करते हैं, भले ही आपको डिप्रेशन न हो। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) भी बहुत मददगार हो सकती है, जो आपको चक्कर के बारे में सोचने के तरीके को बदलने और उससे निपटने के नए तरीके सीखने में मदद करती है। ### सर्जरी कब? Chronic subjective dizziness (CSD) के इलाज में सर्जरी की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है। यह एक फ़ंक्शनल डिसऑर्डर है, जिसका मतलब है कि इसमें कान या दिमाग़ में कोई संरचनात्मक क्षति नहीं होती है जिसे सर्जरी से ठीक किया जा सके। सर्जरी केवल तभी विचार की जाती है जब कोई अंतर्निहित संरचनात्मक समस्या हो जो CSD जैसे लक्षण पैदा कर रही हो, लेकिन CSD के लिए खुद कोई सर्जिकल इलाज नहीं है। इसलिए, ज़्यादातर मामलों में, इलाज दवाइयों, थेरेपी और जीवनशैली में बदलाव पर केंद्रित होता है।

घर पर क्या करें, क्या न करें? Chronic subjective dizziness (CSD) के साथ जीना मुश्किल हो सकता है, लेकिन कुछ बातें हैं जो आप घर पर कर सकते हैं और कुछ जिनसे आपको बचना चाहिए ताकि आपके लक्षण बेहतर हो सकें। ### क्या करें

  • रोज़ाना रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज़ करें: अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट द्वारा बताई गई वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज़ को रोज़ाना करें, भले ही उनसे आपको थोड़ा चक्कर महसूस हो। यह आपके दिमाग़ को संतुलन को फिर से सीखने में मदद करता है।
  • धीरे-धीरे उत्तेजक वातावरण में लौटें: भीड़-भाड़ वाले बाज़ारों, सीढ़ियों या बसों जैसी जगहों पर धीरे-धीरे वापस जाना शुरू करें। शुरुआत में कम समय के लिए जाएं और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। इससे आपका दिमाग़ इन वातावरणों के प्रति कम संवेदनशील होगा।
  • नियमित नींद लें: हर रात पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें। अच्छी नींद आपके दिमाग़ को ठीक होने और संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करती है।
  • प्रोग्रेस डायरी बनाएँ: एक डायरी में अपने लक्षणों, आपने कौन सी एक्सरसाइज़ कीं, और आपने किन वातावरणों का सामना किया, इसका रिकॉर्ड रखें। इससे आपको समय के साथ अपनी प्रगति देखने में मदद मिलेगी।
  • चिंता का इलाज करें: अगर आपको चिंता या डिप्रेशन है, तो डॉक्टर की सलाह से थेरेपी या दवा लें। यह CSD के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

क्या न करें

  • लंबे समय तक सभी गतिविधियों या भीड़ से बचें: चक्कर से बचने के लिए सभी गतिविधियों या भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना आपकी स्थिति को और खराब कर सकता है। यह आपके दिमाग़ के गलत अनुकूलन को मज़बूत करता है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के वेस्टिबुलर सप्प्रेसेंट दवाएँ बार-बार लें: चक्कर कम करने वाली दवाएँ (जैसे एंटी-हिस्टामाइन) लंबे समय तक लेने से आपके दिमाग़ की प्राकृतिक संतुलन बनाने की प्रक्रिया रुक जाती है। ये दवाएँ केवल थोड़े समय के लिए ही लेनी चाहिए।
  • जल्दी ठीक होने की उम्मीद करें: CSD का इलाज एक लंबी प्रक्रिया है। आमतौर पर लक्षणों में सुधार दिखने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं। धैर्य रखें और इलाज योजना का पालन करें।
  • गर्दन की कायरोप्रैक्टिक हेरफेर करवाएं: चक्कर के लिए गर्दन की कायरोप्रैक्टिक हेरफेर से बचें, क्योंकि CSD का कारण आमतौर पर गर्दन की समस्या नहीं होती है, और यह गलत निदान और संभावित चोट का कारण बन सकता है।

WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।

बचाव

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे अपने चक्करों के लिए कब चिंता करनी चाहिए या तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

हालांकि लगातार आने वाले चक्कर (क्रोनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस) खतरनाक नहीं होते, कुछ लक्षणों के लिए तुरंत डॉक्टरी सलाह की ज़रूरत होती है। आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए यदि आपको कोई नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हों, यदि आपके चक्कर स्थिर रहने के बजाय लगातार बिगड़ रहे हों, या यदि चलते समय आपको दुनिया हिलती हुई या कूदती हुई दिखे (ऑसिलोप्सिया)। एक कान से नई सुनाई कम देना, कान में घंटी बजना (टिनिटस), चेहरे का सुन्न होना, या आवाज़ या दबाव से चक्कर आना खतरे के संकेत हैं जिनकी तुरंत जांच होनी चाहिए। बहुत ज़्यादा चिंता या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आने पर भी तुरंत मदद लें।

क्या घरेलू उपचार या पूरा आराम मेरे पुराने चक्करों में मदद कर सकते हैं?

बहुत से लोग घरेलू उपचारों के बारे में सोचते हैं या सोचते हैं कि पूरा आराम करने से चक्कर चले जाएंगे। हालांकि, क्रोनिक सब्जेक्टिव चक्कर (PPPD) के लिए, यह एक गलत धारणा है। पूरा आराम और गतिविधियों से बचना वास्तव में दिमाग की गलत प्रतिक्रिया को और बढ़ा देते हैं, जिससे लंबे समय में आपके लक्षण और बिगड़ जाते हैं। इसके बजाय, ग्रेडेड एक्सपोजर और वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन के साथ एक संरचित दृष्टिकोण सही रास्ता है। जबकि कुछ उपचार अस्थायी आराम दे सकते हैं, वे मूल समस्या का समाधान नहीं करेंगे। सही निदान और प्रभावी उपचार योजना के लिए एक ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

क्रॉनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस (CSD) क्या है?

क्रॉनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस, या CSD, लगातार अस्थिरता, झूलने या डगमगाने जैसा महसूस होना है, जो असली चक्कर आने जैसा नहीं है जिसमें सब घूमता हुआ लगे। यह आमतौर पर कान के अंदर की किसी अचानक समस्या या किसी और वजह से शुरू होता है, लेकिन चक्कर आना तब भी जारी रहता है जब मूल समस्या ठीक हो जाती है। मरीज़ अक्सर ध्यान देते हैं कि खड़े होने पर, हिलने-डुलने पर, या भीड़-भाड़ वाले बाज़ारों जैसी जगहों पर यह ज़्यादा महसूस होता है। इस स्थिति को अब परसिस्टेंट पोस्टुरल-परसेप्चुअल डिज़ीनेस (PPPD) के नाम से जाना जाता है, और दोनों शब्दों का मतलब एक ही तरह के लगातार असंतुलन से है।

अगर मेरी जाँचें सामान्य हैं, तो क्या यह चक्कर सिर्फ मेरे दिमाग़ की उपज है?

यह एक आम ग़लतफ़हमी है कि अगर मेडिकल जाँचें सामान्य हैं, तो समस्या काल्पनिक है। क्रॉनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस के लिए यह बिलकुल सच नहीं है। CSD, जिसे अब PPPD कहा जाता है, एक बहुत ही वास्तविक और मापा जा सकने वाला फ़ंक्शनल वेस्टिबुलर डिसऑर्डर है। आपके दिमाग़ के संतुलन बनाने वाले सिस्टम में एक तरह का ‘मालअडैप्टेशन’ (गलत अनुकूलन) हो गया है, जिसका मतलब है कि यह कुछ इंद्रियों पर ज़्यादा निर्भर करने लगा है, जिससे संरचनात्मक क्षति न होने पर भी लगातार लक्षण बने रहते हैं। हमारे पास ऐसे इलाज हैं जो आपको ठीक होने में मदद कर सकते हैं, और अपने लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना वास्तव में चीज़ों को और खराब कर सकता है।

शुरुआती समस्या के ठीक होने के बाद भी मुझे बार-बार चक्कर क्यों आते रहते हैं?

कान के अंदर के इन्फेक्शन या गंभीर माइग्रेन जैसी किसी अचानक घटना के बाद, आपके दिमाग़ का संतुलन बनाने वाला सिस्टम कभी-कभी संवेदी जानकारी को संसाधित करने का तरीका बदल देता है। सामान्य होने के बजाय, यह देखने वाली चीज़ों और आपके शरीर की मुद्रा से मिलने वाले संकेतों पर ज़्यादा निर्भर करने लगता है, भले ही ये विश्वसनीय न हों। इस ‘मालअडैप्टिव सेंसरी रीवेटिंग’ का मतलब है कि मूल कारण ठीक होने के बाद भी, आपका दिमाग़ अस्थिरता, झूलने या डगमगाने की भावनाएँ पैदा करता रहता है, खासकर जब आप सीधे खड़े होते हैं या हिलते-डुलते हैं।

क्रॉनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस का इलाज कैसे किया जाता है?

क्रॉनिक सब्जेक्टिव डिज़ीनेस, या PPPD, के इलाज में कई तरीकों वाला इलाज शामिल है। कस्टमाइज़्ड वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) बहुत ज़रूरी है, जो आपके दिमाग़ को ‘हैबिट्यूएशन एक्सरसाइज़’ और ‘विज़ुअल डीसेंसिटाइज़ेशन’ के ज़रिए संतुलन के संकेतों को फिर से संसाधित करना सिखाता है। कभी-कभी, हम कुछ दवाएँ भी इस्तेमाल करते हैं, जैसे SSRI-क्लास एंटीडिप्रेसेंट या SNRI-क्लास एंटीडिप्रेसेंट, जो दिमाग़ के संबंधित सर्किट्स को नियंत्रित कर सकती हैं, भले ही आप उदास न हों। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी भी बहुत मददगार हो सकती है। धीरे-धीरे गतिविधियों में फिर से शामिल होना और किसी भी लंबे समय तक चलने वाली वेस्टिबुलर सप्प्रेसेंट दवाओं को बंद करना भी महत्वपूर्ण है।


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  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.