BPPV का इलाज Hindi guide: यह pending draft अब published BPPV क्या है page से अलग intent रखता है. इसका focus diagnosis के बाद treatment options, Epley maneuver, doctor visit और recurrence prevention पर रहेगा.
BPPV क्या है? यह वही चक्कर है जो सिर झुकाने, बिस्तर पर लेटने या तेजी से सिर घुमाने पर अचानक शुरू होता है। अगर ऐसा चक्कर कुछ सेकंड या मिनट तक रहता है, तो आपको BPPV (बेनाइन पैरॉक्सिसमल पजिशनल वर्टिगो) हो सकता है। यह चक्कर का सबसे आम कारण है, जो 50 से 80 प्रतिशत रोगियों में पाया जाता है। यह लेख समझाता है कि BPPV क्या है, कान में क्रिस्टल कहाँ होते हैं, वे क्यों खिसकते हैं, Epley maneuver कैसे काम करता है, और इसका इलाज कैसे चुना जाता है।
Table of Contents
- BPPV क्या है? — समझें आसान भाषा में
- कान की संरचना और संतुलन प्रणाली
- BPPV तब होता है जब क्रिस्टल खिसक जाते हैं
- BPPV क्यों होता है?
- Epley Maneuver: BPPV का इलाज
- BPPV कितने समय में ठीक होता है?
- क्या BPPV दोबारा होता है?
- विटामिन डी और BPPV का गहरा संबंध
- डॉ. प्रतीक पोरवाल का BPPV उपचार अनुभव
- BPPV के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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BPPV क्या है? — समझें आसान भाषा में
कान की संरचना और संतुलन प्रणाली
आपके कान के अंदर एक जटिल संरचना है जिसे आंतरिक कान (inner ear) कहते हैं। यह संरचना बहुत छोटी होती है, लेकिन दो बहुत महत्वपूर्ण काम करती है: सुनना और संतुलन बनाना। हम अक्सर कान को सुनने के लिए जानते हैं, लेकिन संतुलन प्रणाली उतनी ही महत्वपूर्ण है।
सेमिसर्कुलर कैनल्स क्या हैं?
आंतरिक कान में तीन अर्धवृत्ताकार नलियाँ (सेमिसर्कुलर कैनल्स) होती हैं। ये तीन नलियाँ तीन अलग-अलग दिशाओं में होती हैं:
1. पिछली नली (posterior canal)
2. पार्श्व नली (lateral canal)
3. अगली नली (anterior canal)
इन नलियों में एक विशेष तरल होता है जिसे एंडोलिम्फ कहते हैं। जब आप अपना सिर हिलाते हैं, यह तरल भी हिलता है। आपके कान की अंदरूनी दीवारें इस तरल की गति को महसूस करती हैं और आपके मस्तिष्क को बताती हैं कि आपका सिर किस दिशा में गया।
यूट्रिकल और ओटोकोनिया (कान की रेत)
इन नलियों के पास एक थैली होती है जिसे यूट्रिकल (utricle) कहते हैं। यूट्रिकल संतुलन के लिए भी जिम्मेदार है, विशेषकर जब आप खड़े हों या चल रहे हों। इसी यूट्रिकल में छोटे-छोटे क्रिस्टल होते हैं जिन्हें ओटोकोनिया (otoconia) या आम भाषा में “कान की रेत” कहते हैं।
ये क्रिस्टल कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं। आपका शरीर ये क्रिस्टल खुद बनाता है। ये क्रिस्टल की लंबाई 10-100 माइक्रोमीटर होती है—बहुत ही छोटे, नंगी आँखों से दिखाई न दें।
जब आप सिर हिलाते हैं, ये क्रिस्टल यूट्रिकल में हलचल करते हैं। क्रिस्टल की बदलती स्थिति से कान की अंदरूनी कोशिकाएँ संकेत भेजती हैं। आपका मस्तिष्क इस संकेत को समझता है और जानता है कि आपका शरीर किस दिशा में जा रहा है। इसी तरह आपका संतुलन बना रहता है।
BPPV तब होता है जब क्रिस्टल खिसक जाते हैं
क्रिस्टल कहाँ खिसक जाते हैं?
कभी-कभी ये क्रिस्टल यूट्रिकल से निकलकर सेमिसर्कुलर कैनल्स में चले जाते हैं। यह सबसे अधिक पिछली नली (पोस्टीरियर कैनल) में होता है। जब ये क्रिस्टल गलत जगह में होते हैं, तो आपके सिर की हर हलचल से तरल पदार्थ की गलत हलचल होती है।
मान लीजिए आप बिस्तर में लेटना चाहते हैं। नार्मल परिस्थिति में, आपका सिर धीरे-धीरे पीछे जाता है और कोई समस्या नहीं होती। लेकिन अगर क्रिस्टल गलत नली में हैं, तो उन्हें अचानक तरल की गति का सामना करना पड़ता है। ये क्रिस्टल नली में आगे-पीछे उछलते हैं और अंदरूनी कोशिकाओं को गलत संकेत भेजते हैं।
आपका मस्तिष्क भ्रमित होता है। वह सोचता है कि आप घूम रहे हैं, भले ही आप बिल्कुल शांत हों। यही आपको चक्कर (vertigo) का अनुभव देता है।
BPPV शब्द का अर्थ
BPPV को “बेनाइन पैरॉक्सिसमल पजिशनल वर्टिगो” कहते हैं। हर शब्द का एक मतलब है:
– **बेनाइन** = खतरनाक नहीं। यह बीमारी आपकी जान के लिए खतरनाक नहीं है।
– **पैरॉक्सिसमल** = अचानक के छोटे झटके। लक्षण अचानक शुरू होते हैं और अचानक खत्म हो जाते हैं।
– **पजिशनल** = किसी विशेष स्थिति में। चक्कर केवल तभी आता है जब आप किसी खास पोजिशन में सिर ले जाते हैं।
– **वर्टिगो** = घूमने जैसा चक्कर। रोटेशनल चक्कर जो बहुत गंभीर होता है।
BPPV के लक्षण
BPPV के लक्षण बहुत विशिष्ट होते हैं, जो इसे अन्य प्रकार के चक्कर से अलग करते हैं। रोगी को चक्कर तभी आता है जब वह किसी खास पोजिशन में सिर ले जाता है। आम ट्रिगर (कारण) हैं:
1. **बिस्तर में लेटना**: आप सीधे बैठे हैं और अचानक लेट जाते हैं। चक्कर आ सकता है।
2. **करवट बदलना**: रात में जब आप करवट बदलते हैं, तो चक्कर हो सकता है।
3. **बिस्तर से उठना**: सुबह जब आप बिस्तर से उठने की कोशिश करते हैं, तो चक्कर आ सकता है।
4. **तेजी से सिर घुमाना**: अगर आप अचानक पीछे देखने के लिए सिर घुमाते हैं, तो चक्कर।
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5. **ऊपर की ओर देखना**: खिड़की साफ करते समय, आलमारी की ऊपरी अलमारी से चीजें निकालते समय। यह बहुत आम ट्रिगर है।
6. **नीचे झुकना**: माला बीनना, फर्श साफ करना, या झुककर कुछ उठाना।
7. **दाँत ब्रश करते समय सिर पीछे करना**: ये सभी गतिविधियाँ चक्कर ला सकती हैं।
चक्कर आमतौर पर 30 सेकंड से 2 मिनट तक रहता है। यह बहुत तीव्र होता है—रोगी को लगता है कि पूरा कमरा तेजी से घूम रहा है। आँखें भी अनायास हिलती हैं (इसे nystagmus कहते हैं)। लेकिन एक विशेष बात है: चक्कर बहुत अचानक शुरू होता है और बहुत अचानक ही खत्म हो जाता है।
कुछ रोगियों को मतली (nausea) भी होती है, खासकर अगर चक्कर गंभीर हो। कुछ को उल्टी तक आ सकती है। लेकिन उल्टी आने के बाद भी चक्कर तुरंत खत्म नहीं होता।
BPPV क्यों होता है?
उम्र सबसे बड़ा कारण
सबसे बड़ा कारण उम्र है। जैसे आपका शरीर उम्र के साथ कमजोर होता है, वैसे ही कान की संरचना भी कमजोर होती है। उम्र बढ़ने के साथ, क्रिस्टल अपनी जगह से खिसकने लगते हैं। इसका कारण एक गिरावट है जो कान की अंदरूनी संरचना में होती है।
50 के बाद उम्र में BPPV का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। 60 साल की उम्र तक, लगभग 10% लोगों को कभी न कभी BPPV हुआ होता है। 75+ साल की उम्र में, यह 50% तक बढ़ जाता है।
गिरना और सिर पर चोट
दूसरा प्रमुख कारण गिरना है। सिर पर चोट लगने से क्रिस्टल अपनी जगह से खिसक सकते हैं। कभी-कभी तो हल्की चोट भी BPPV का कारण बन सकती है। बुजुर्गों में गिरना BPPV का सबसे आम दूसरा कारण है।
यहाँ तक कि ऐसी चोट जो आप को गंभीर न लगे, वह भी क्रिस्टल को खिसका सकती है। उदाहरण के लिए, अगर आप जिम में तेजी से व्यायाम कर रहे हैं और अचानक मूर्छा आ जाए, तो यह BPPV ला सकता है।
विटामिन डी की कमी
हाल के अनुसंधान से पता चलता है कि विटामिन डी की कमी BPPV के जोखिम को बहुत बढ़ाती है। विटामिन डी का संबंध कैल्शियम के अवशोषण से है। विटामिन डी शरीर को कैल्शियम को सोखने में (absorb करने में) मदद करता है।
क्रिस्टल कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं। कम विटामिन डी का मतलब कम कैल्शियम अवशोषण। कम कैल्शियम = कमजोर क्रिस्टल = आसानी से खिसकना।
अध्ययनों में दिखा है कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें BPPV 2-3 गुना ज्यादा होता है। यह विशेषकर भारत में महत्वपूर्ण है, जहाँ यह माना जाता है कि धूप बहुत है। लेकिन वास्तविकता यह है कि ज्यादातर भारतीय विटामिन डी की कमी से जूझते हैं।
अन्य कारण
कभी-कभी BPPV बिना किसी स्पष्ट कारण के होता है। इसे “इडियोपैथिक BPPV” कहते हैं। कुछ अन्य जोखिम कारण हैं:
– **माइग्रेन**: जो लोगों को माइग्रेन होता है, उनमें BPPV ज्यादा होता है।
– **अधिक समय तक बिस्तर में रहना**: बीमारी से या किसी और कारण से अगर आप लंबे समय तक बिस्तर में पड़े रहते हैं, तो क्रिस्टल खिसक सकते हैं।
– **आंतरिक कान की सूजन**: किसी बीमारी से अगर आंतरिक कान में सूजन हो, तो क्रिस्टल खिसक सकते हैं।
– **कुछ दवाएँ**: कुछ एंटीबायोटिक्स (जेंटामाइसिन जैसी) आंतरिक कान को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
– **कान की सर्जरी**: अगर किसी को पहले कान की सर्जरी हुई हो, तो BPPV का जोखिम बढ़ता है।
Epley Maneuver: BPPV का इलाज
Epley Maneuver क्या है?
Epley maneuver एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी तकनीक है जो क्रिस्टल को सही जगह पर वापस ले जाती है। इसे डॉक्टर द्वारा किया जाता है और महज 5-10 मिनट में पूरा हो जाता है। यह बिना दवा, बिना सर्जरी, बिना किसी दर्द के काम करता है।
Dr. John Epley नामक एक अमेरिकी ENT डॉक्टर ने 1992 में यह तकनीक खोजी थी। उनके नाम पर इसे Epley maneuver कहते हैं। यह तकनीक BPPV के इलाज में एक क्रांति लाई थी।
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Epley maneuver 90 प्रतिशत से ज्यादा BPPV के मामलों में काम करता है। कुछ रोगियों को तुरंत राहत मिलती है, दूसरों को कुछ घंटों में। यह सबसे प्रभावी, सुरक्षित और सस्ता इलाज है।
Epley Maneuver कैसे किया जाता है?
प्रक्रिया पूरी तरह बैज्ञानिक है। गुरुत्वाकर्षण की मदद से क्रिस्टल को सेमिसर्कुलर कैनल से वापस यूट्रिकल में ले जाया जाता है। चरण इस प्रकार हैं:
**चरण 1**: आप डॉक्टर के सामने सीधे बैठते हैं। डॉक्टर आपके सिर को मध्य रेखा से बीमार कान की ओर 45 डिग्री घुमाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका दायाँ कान बीमार है, तो डॉक्टर आपका सिर दाईं ओर 45 डिग्री घुमाते हैं।
**चरण 2**: डॉक्टर आपको तेजी से पीछे की ओर लिटा देते हैं। आपका सिर डॉक्टर के बिस्तर के किनारे लटकता है, पीछे की ओर लगभग 20 डिग्री। इस स्थिति में, बीमार कान नीचे की ओर होता है। आप का सिर अभी भी बीमार कान की ओर 45 डिग्री मुड़ा होता है। यह स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी वजह से क्रिस्टल हिलता है।
**चरण 3**: 30 सेकंड इसी स्थिति में रहने के बाद, डॉक्टर आपके सिर को दूसरी ओर 90 डिग्री घुमाते हैं। अब आपका सिर स्वस्थ कान की ओर 45 डिग्री होता है।
**चरण 4**: फिर से 30 सेकंड में, आप अपने आप को बग़ल में (बीमार कान की ओर) घुमाते हैं। अब आपका चेहरा फर्श की ओर होता है।
**चरण 5**: अंत में, आप धीरे-धीरे सीधे बैठ जाते हैं।
पूरी प्रक्रिया 5-10 मिनट लेती है। कुछ रोगियों को इसके दौरान चक्कर का अनुभव होता है, लेकिन यह ठीक है—इसका मतलब है कि क्रिस्टल हिल रहे हैं और सही जगह की ओर जा रहे हैं।
Epley Maneuver के बाद सावधानियाँ
इलाज के बाद 48 घंटे तक कुछ सावधानियाँ जरूरी हैं क्योंकि क्रिस्टल अभी हाल ही में यूट्रिकल में आए हैं और फिर से खिसक सकते हैं:
1. **तेजी से सिर न घुमाएँ**: धीरे-धीरे गतिविधियाँ करें।
2. **ऊपर की ओर न देखें**: छत न देखें, आलमारी की ऊपरी अलमारी न देखें।
3. **नीचे न झुकें**: फर्श साफ करना, वस्तुएँ उठाना, या झुककर कुछ करना मत करें।
4. **उल्टा न पड़ें**: पीठ के बल लेटते समय सिर को एक जैसे रखें।
ये सावधानियाँ नव-स्थानांतरित क्रिस्टल को फिर से खिसकने से बचाती हैं। 48 घंटे के बाद, आप सामान्य गतिविधि शुरू कर सकते हैं।
BPPV कितने समय में ठीक होता है?
तुरंत सुधार
कुछ रोगियों को Epley maneuver के दौरान ही पूर्ण राहत मिलती है। जब डॉक्टर इलाज पूरा करते हैं और आप सीधे बैठते हैं, तो चक्कर पूरी तरह चला जाता है। ऐसे रोगी घर जाकर सामान्य जीवन शुरू कर सकते हैं।
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कुछ घंटों में सुधार
अन्य रोगियों को इलाज के कुछ घंटों बाद पूर्ण राहत मिलती है। कुछ घंटों तक हल्का-फुल्का चक्कर या असंतुलन महसूस हो सकता है, लेकिन यह ज्यादा समय नहीं रहता। शाम तक वे सामान्य हो जाते हैं।
दोबारा जाँच
कुछ मामलों में (लगभग 10%), पहली बार Epley maneuver पूर्ण सफलता नहीं देता। अगर ऐसा हो, तो डॉक्टर कुछ दिन बाद दोबारा प्रयास कर सकते हैं। आमतौर पर दूसरी कोशिश में सफलता मिलती है। तीसरी बार की जरूरत बहुत दुर्लभ है।
क्या BPPV दोबारा होता है?
दोबारा होने का खतरा
हाँ, BPPV दोबारा हो सकता है। इसे “recurrent BPPV” कहते हैं। अनुसंधान से पता चलता है कि लगभग 15 से 20 प्रतिशत रोगियों को हर साल दोबारा BPPV होता है। यह एक उच्च दर है।
लेकिन यह चिंता की बात नहीं है क्योंकि दोबारा BPPV होने पर भी वह दोबारा Epley maneuver से ठीक हो जाता है। आपको तुरंत राहत मिल जाएगी।
दोबारा होने को कैसे रोकें?
कुछ सावधानियाँ दोबारा BPPV होने के जोखिम को कम करती हैं:
**1. सिर की सुरक्षा**: गिरने से बचें। यह विशेषकर बुजुर्गों के लिए महत्वपूर्ण है। अपने घर को गिरने के लिए सुरक्षित बनाएँ—सीढ़ियों में रेलिंग लगाएँ, अँधेरी जगहों में रोशनी बढ़ाएँ।
**2. विटामिन डी**: विटामिन डी की कमी न हो, इसके लिए कदम उठाएँ:
– रोजाना 20-30 मिनट सुबह की धूप लें (सीधी धूप सबसे अच्छी है)
– विटामिन डी युक्त खाना खाएँ: दूध, दही, पनीर, अंडे (जर्दी), मछली, सोयाबीन
– अगर जाँच में कमी मिले, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
**3. कैल्शियम**: कैल्शियम युक्त खान-पान सुनिश्चित करें—दूध, दही, पनीर, सोयाबीन, तिल। कैल्शियम क्रिस्टल को मजबूत रखता है।
**4. सुरक्षित सोना**: बिस्तर से उठते या लेटते समय धीरे-धीरे करें। अचानक की गतिविधियाँ क्रिस्टल को खिसका सकती हैं।
विटामिन डी और BPPV का गहरा संबंध
विटामिन डी का महत्व
हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि कम विटामिन डी वाले लोगों में BPPV 2-3 गुना ज्यादा होता है। यह संबंध बहुत मजबूत है। विटामिन डी शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। कम विटामिन डी = कम कैल्शियम अवशोषण = कमजोर क्रिस्टल = आसानी से खिसकना।
विटामिन डी कहाँ से मिलता है?
**सूर्य की रोशनी**: सबसे अच्छा स्रोत। 20-30 मिनट सुबह की सीधी धूप रोजाना लगभग आधा कप दूध से ज्यादा विटामिन डी देती है। इसलिए सुबह की सैर बहुत महत्वपूर्ण है।
**भोजन**:
– दूध (500 ml दूध में Contact clinic for feesIU विटामिन डी)
– दही
– पनीर
– अंडे (विशेषकर जर्दी)
– मछली (सबसे अच्छा स्रोत, खासकर मैकेरल और सैल्मन)
– सोयाबीन
– तिल
**सप्लीमेंट**: अगर विटामिन डी की कमी गंभीर हो, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें। आमतौर पर Contact clinic for feesIU रोज दिया जाता है।
विटामिन डी की जाँच
अगर आप को बार-बार BPPV होता है, तो विटामिन डी की जाँच करवाएँ। रक्त परीक्षण से 25-hydroxyvitamin D का स्तर ज्ञात होता है।
सामान्य स्तर: 30-100 ng/mL (या 75-250 nmol/L)
कम स्तर अगर 20 ng/mL से कम हो, तो यह कमी है और सप्लीमेंट की जरूरत है। बहुत कम (10 ng/mL से कम) तो गंभीर कमी है और तुरंत उपचार जरूरी है।
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डॉ. प्रतीक पोरवाल का BPPV उपचार अनुभव
Prime ENT Center में BPPV इलाज
डॉ. प्रतीक पोरवाल Prime ENT Center, हरदोई में BPPV के विशेषज्ञ हैं। वे हजारों रोगियों का Epley maneuver किया है। उनकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है—जिसका मतलब है कि 9 में से 9 रोगियों को पहली ही कोशिश में राहत मिलती है।
निदान की त्वरित प्रक्रिया
डॉ. पोरवाल पहले आपके लक्षण विस्तार से सुनते हैं। फिर तुरंत Dix-Hallpike test करते हैं। इस टेस्ट में आप बैठे होते हैं, और डॉक्टर आपके सिर को तेजी से पीछे की ओर ले जाते हैं, आपकी बीमार कान नीचे की ओर। अगर आप को चक्कर आता है और आँखें एक खास तरीके से हिलती हैं (nystagmus), तो यह BPPV की पुष्टि है।
यह टेस्ट 5-10 सेकंड में पूरा हो जाता है। कोई परेशानी नहीं, कोई दर्द नहीं।
तुरंत इलाज
अगर BPPV की पुष्टि हो जाती है, तो डॉ. पोरवाल तुरंत Epley maneuver करते हैं। कोई इंतजार नहीं, कोई अतिरिक्त टेस्ट नहीं, कोई लंबी-चौड़ी प्रक्रिया नहीं। 10 मिनट में इलाज पूरा हो जाता है। रोगी घर जाकर जल्द ही सामान्य जीवन शुरू कर सकते हैं।
पालन-पोषण निर्देश और शिक्षा
इलाज के बाद, डॉ. पोरवाल विस्तार से समझाते हैं कि 48 घंटे तक क्या-क्या सावधानियाँ लें। वे लिखित निर्देश भी देते हैं जिन्हें आप घर जाकर पढ़ सकते हैं। वे विटामिन डी की कमी के बारे में भी बात करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर जाँच का सुझाव देते हैं।
कुछ रोगियों को दोबारा BPPV होने की संभावना अधिक होती है। डॉ. पोरवाल ऐसे रोगियों को विशेष सलाह देते हैं कि कैसे जोखिम कम करें।
BPPV के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या BPPV खतरनाक है?
BPPV खतरनाक नहीं है, लेकिन असहज जरूर है। इससे जानलेवा कोई बीमारी नहीं होती और न ही यह आपके सुनने को नुकसान पहुँचाता है। हाँ, बुजुर्गों में गिरने का जोखिम बढ़ता है, जो खतरनाक हो सकता है।
क्या Epley maneuver हमेशा काम करता है?
90 प्रतिशत मामलों में पहली कोशिश में काम करता है। बाकी 10 प्रतिशत को दोबारा या तीसरी कोशिश की जरूरत पड़ती है। कुल मिलाकर, 95-98% मामलों में Epley maneuver पूरी तरह काम करता है।
क्या BPPV अपने आप ठीक हो सकता है?
कुछ मामलों में हाँ, लेकिन यह महीनों लग सकते हैं। समय के साथ, शरीर क्रिस्टल को धीरे-धीरे यूट्रिकल में वापस लाता है। लेकिन Epley maneuver तुरंत ठीक कर देता है, इसलिए महीनों इंतजार करना अनावश्यक है।
BPPV का इलाज न कराने से क्या होता है?
BPPV आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन महीनों लग सकते हैं। इस बीच आप दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं, गिर सकते हैं, या काम में परेशानी आ सकती है। इसलिए तुरंत इलाज करना सबसे अच्छा है।
क्या दवा से BPPV ठीक हो सकता है?
नहीं। कोई दवा BPPV को ठीक नहीं कर सकती क्योंकि समस्या यांत्रिक है (क्रिस्टल खिसके हुए हैं)। दवा केवल मतली कम कर सकती है, लेकिन चक्कर नहीं ठीक करती।
Epley maneuver के बाद चक्कर फिर से क्यों आता है?
कभी-कभी क्रिस्टल फिर से खिसक जाते हैं। यह BPPV की एक प्राकृतिक प्रवृत्ति है। 15-20 प्रतिशत लोगों में हर साल फिर से होता है। लेकिन दोबारा होने पर भी Epley maneuver दोबारा काम करता है।
मुझे कौन सी सावधानियाँ लेनी चाहिए?
इलाज के 48 घंटे बाद: सिर न झुकाएँ, ऊपर न देखें, तेजी से न घुमाएँ, उल्टा न पड़ें। आम दिनों में: विटामिन डी पर्याप्त लें (धूप में रहें, विटामिन डी युक्त खाना खाएँ), गिरने से बचें, उम्र के अनुसार व्यायाम करें।
क्या बुजुर्गों में BPPV ज्यादा होता है?
हाँ। 50 के बाद जोखिम तेजी से बढ़ता है। 70+ उम्र में BPPV बहुत आम है। बुजुर्गों में गिरने का जोखिम भी अधिक होता है, इसलिए उन्हें BPPV का इलाज तुरंत करवाना चाहिए।
डॉ. प्रतीक पोरवाल से संपर्क करें
Prime ENT Center, हरदोई
डॉ. प्रतीक पोरवाल — ENT सर्जन व चक्कर विशेषज्ञ
फोन: 7393062200
BPPV से पीड़ित हैं? चक्कर आता है? तुरंत संपर्क करें। Epley maneuver से एक ही मुलाकात में पूर्ण राहत। आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें।
BPPV कान में क्रिस्टल के खिसकने से होने वाला चक्कर है। यह चक्कर का सबसे आम कारण है, लेकिन इसका इलाज भी सबसे आसान है। Epley maneuver एक सरल, प्रभावी, और बिल्कुल सुरक्षित तरीका है जो 90 प्रतिशत रोगियों को तुरंत राहत देता है। अगर आप को BPPV के लक्षण हैं, तो डॉ. प्रतीक पोरवाल से संपर्क करें। कोई बड़ी बीमारी नहीं, बस एक छोटी सी प्रक्रिया जो आपका जीवन पूरी तरह बदल देगी। विटामिन डी पर ध्यान दें, सुरक्षित रहें, और यह चक्कर अब आपको परेशान नहीं करेगा।
Medical Disclaimer: This article is for educational purposes only and does not constitute medical advice, diagnosis or prescribing guidance. Consult Dr. Prateek Porwal at Prime ENT Center, Hardoi for personalised treatment.
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- Epley JM. The canalith repositioning procedure: For treatment of benign paroxysmal positional vertigo. Otolaryngology–Head and Neck Surgery. 1992;107(3):399–404.
This article is for educational purposes. Please consult Dr. Prateek Porwal at Prime ENT Center, Hardoi for personal medical advice.
Reference: Balance Disorders in the Elderly — Agrawal et al, 2009
