नमस्ते, मैं डॉ. प्रतीक पोरवाल हूँ। Prime ENT Center में मैंने देखा है कि बहुत सारे लोग चक्कर के इलाज के लिए योग करना शुरू करते हैं, लेकिन गलत आसन करने से उनका चक्कर और बढ़ जाता है।
मेरे क्लिनिक में जो मरीज़ BPPV से ठीक हो जाते हैं, उनसे मैं अक्सर यह सवाल सुनता हूँ — “डॉक्टर, क्या मैं योग कर सकता हूँ?” जवाब हाँ भी है और ना भी। यह निर्भर करता है कि आपको किस तरह का चक्कर है और आप अभी किस stage पर हैं।
आज मैं आपको विस्तार से बताता हूँ कि चक्कर में कौन से योग आसन सुरक्षित हैं और कौन से बिलकुल नहीं करने चाहिए।
चक्कर और योग, क्या सच है?: चक्कर में योग
योग बहुत अच्छा है, लेकिन चक्कर के लिए नियमित योग नहीं, बल्कि विशेष योग करना चाहिए।
योग के फायदे:
- वेस्टिबुलर सिस्टम को मजबूत करता है
- संतुलन (Balance) को सुधारता है
- तनाव कम करता है
- रक्त संचार में सुधार करता है
- मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
लेकिन गलत आसन से:
- कान में दबाव बढ़ता है
- रक्त का प्रवाह बिगड़ता है
- चक्कर तेज़ हो सकता है
- गिरने का खतरा बढ़ता है
चक्कर में सुरक्षित योग आसन
1. सुखासन (Easy Pose)
यह सबसे सुरक्षित आसन है। इसे हर दिन करने से संतुलन में सुधार होता है।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं, पैरों को क्रॉस करें
- सिर सीधा रखें, कंधे शिथिल
- 10 मिनट तक बैठे रहें
- हर दिन सुबह और शाम करें
फायदे:
- मस्तिष्क को शांत करता है
- संतुलन में सुधार होता है
- तनाव कम होता है
- चक्कर आने का खतरा नहीं
2. वज्रासन (Diamond Pose)
यह आसन बहुत सुरक्षित है और वेस्टिबुलर सिस्टम को मजबूत करता है।
करने का तरीका:
- घुटनों के बल बैठ जाएं
- पैरों को पीछे की ओर मोड़ें
- सिर सीधा रखें
- 5-10 मिनट तक करें
फायदे:
- पाचन में सुधार
- शरीर का संतुलन बेहतर होता है
- चक्कर में कोई नुकसान नहीं
3. मार्जारियासन (Cat Stretch)
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और रक्त संचार में सुधार करता है।
करने का तरीका:
- हाथ और घुटनों के बल जमीन पर आएं (चौपाए की मुद्रा)
- अब गहरी सांस लेते हुए पीठ को ऊपर उठाएं
- अब सांस निकालते हुए पीठ को नीचे करें (पेट को ज़मीन की ओर लाएं)
- 8-10 बार दोहराएं
फायदे:
- गर्दन का तनाव कम होता है
- रक्त संचार बेहतर होता है
- कान की ओर रक्त का प्रवाह अच्छा होता है
4. पहाड़ासन (Mountain Pose)
यह आसन संतुलन को सुधारता है। चक्कर में यह बहुत मदद करता है।
करने का तरीका:
- सीधे खड़े हो जाएं
- पैरों को साथ-साथ रखें
- हाथ को शरीर के बगल में रखें
- आँखें आगे की ओर देखते हुए रहें
- 2-3 मिनट तक खड़े रहें
फायदे:
- संतुलन में सुधार होता है
- पैर और शरीर को मजबूत बनाता है
- चक्कर के समय गिरने का खतरा कम होता है
टिप्स: शुरुआत में किसी दीवार के पास खड़े हों, ताकि अगर चक्कर आए तो सहारा मिल जाए।
5. त्रिकोणासन (Triangle Pose)
यह आसन शरीर को स्ट्रेच करता है और संतुलन में सुधार करता है।
करने का तरीका:
- सीधे खड़े हो जाएं
- पैरों को एक फुट दूर रखें
- अपना सिर एक तरफ झुकाएं (हाथ को पैर को छूने की कोशिश करें)
- दूसरा हाथ ऊपर की ओर रखें
- 5 सेकंड तक रखें, फिर दूसरी ओर करें
- 5 बार दोहराएं
सावधानी: बहुत तेज़ी से न झुकें। धीरे-धीरे करें।
6. भद्रासन (Butterfly Pose)
यह आसन शांति देता है और संतुलन को सुधारता है।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं
- पैरों के तलवों को आपस में मिलाएं
- घुटनों को दोनों ओर खोलें
- धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाएं
- 10 सेकंड तक रहें
7. अर्धचंद्रासन (Half Moon Pose)
यह आसन संतुलन को बेहतर बनाता है।
करने का तरीका:
- सीधे खड़े हो जाएं
- एक पैर को ऊपर उठाएं
- शरीर को एक तरफ झुकाएं
- दूसरा हाथ आकाश की ओर रखें
- 3 सेकंड तक रहें, फिर दूसरी ओर करें
सावधानी: शुरुआत में दीवार के पास करें। संतुलन बेहतर होने तक हर बार सहारा लें।
8. ताड़ासन (Palm Tree Pose)
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है।
करने का तरीका:
- सीधे खड़े हो जाएं
- हाथों को सिर के ऊपर उठाएं
- धीरे-धीरे शरीर को दाईं ओर झुकाएं (5 सेकंड)
- फिर बाईं ओर झुकाएं (5 सेकंड)
- 5 बार दोहराएं
9. मेरु दंडासन (Spinal Twist)
यह आसन पीठ और गर्दन को शांति देता है।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं, पैर सामने की ओर रखें
- एक पैर को दूसरे पैर के ऊपर क्रॉस करें
- शरीर को क्रॉस किए गए पैर की ओर घुमाएं
- 10 सेकंड तक रहें, फिर दूसरी ओर करें
10. हस्तपादासन (Forward Bend)
यह आसन पूरे शरीर को स्ट्रेच करता है। लेकिन अगर चक्कर है तो धीरे-धीरे करें।
करने का तरीका:
- सीधे खड़े हो जाएं
- धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाएं
- अपने पैरों को छूने की कोशिश करें (जबरदस्ती न करें)
- 20 सेकंड तक रहें
- फिर धीरे-धीरे सीधे हो जाएं
सावधानी: तेज़ी से न झुकें। चक्कर आए तो तुरंत सीधे हो जाएं।
चक्कर में ये आसन बिलकुल न करें
1. सिरसासन (Headstand), पूरी तरह मना है
यह सबसे खतरनाक आसन है चक्कर के लिए। मैंने Prime ENT Center में कई रोगियों को देखा है जिन्होंने सिरसासन करते समय गंभीर चक्कर का दौरा पड़ा।
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क्यों खतरनाक है:
- सिर में ब्लड प्रेशर तेज़ी से बढ़ जाता है
- कान के अंदर का तरल तेज़ी से हिलता है
- वेस्टिबुलर सिस्टम को तीव्र झटका लगता है
- गिरने का खतरा अधिक होता है
मेरी सलाह: चक्कर पूरी तरह ठीक होने तक सिरसासन बिलकुल न करें। और यहाँ तक कि ठीक होने के बाद भी, किसी ट्रेनर की देखरेख में ही करें।
2. हलासन (Plow Pose), बिलकुल न करें
यह आसन भी बहुत खतरनाक है।
क्यों खतरनाक है:
- गर्दन पर तनाव बढ़ता है
- रक्त संचार रुकता है
- कान की ओर रक्त कम जाता है
- तेज़ चक्कर आ सकता है
3. शर्षासन (Shoulder Stand), मना है
यह भी हलासन जितना ही खतरनाक है। गर्दन पर दबाव से चक्कर बढ़ता है।
4. चक्रासन (Wheel Pose), सावधानी से
यह आसन पीछे की ओर झुकता है। चक्कर के समय इससे बचें।
5. अधो मुख शवासन (Downward Dog), सावधानी से
यह आसन सिर को नीचे की ओर करता है। अगर आप इसे करते हैं, तो:
- धीरे-धीरे सिर नीचे करें
- जबरदस्ती न करें
- अगर चक्कर आए तो तुरंत सामान्य स्थिति में आ जाएं
6. शवासन (Corpse Pose), अगर सही तरीके से न हो
शवासन आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन अगर आप ऊँची जगह पर तेज़ी से लेट जाएं, तो चक्कर आ सकता है।
सही तरीका:
- धीरे-धीरे लेट जाएं
- सिर को सहारा दें
- पैरों को आराम से रखें
- तेज़ी से न उठें
प्राणायाम (सांस लेने की प्रक्रिया) और चक्कर
सुरक्षित प्राणायाम
प्राणायाम से मस्तिष्क को ऑक्सीजन अच्छी मिलती है। यह चक्कर में फायदेमंद है।
1. अनुलोम-विलोम
यह सबसे अच्छा प्राणायाम है चक्कर के लिए।
करने का तरीका:
- सुखासन में बैठ जाएं
- अपनी दाईं नासिका को अपने अँगूठे से बंद करें
- बाईं नासिका से गहरी सांस लें (4 सेकंड)
- फिर बाईं नासिका को बंद करें, दाईं से सांस निकालें
- अब दाईं नासिका से सांस लें, बाईं से निकालें
- 10 मिनट तक करें
फायदे:
- मस्तिष्क में संतुलन होता है
- तनाव कम होता है
- चक्कर में राहत मिलती है
2. भस्त्रिका (Bellows Breath)
यह प्राणायाम ऊर्जा बढ़ाता है, लेकिन धीरे-धीरे शुरू करें।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं
- तेज़ी से नाक से सांस लें और छोड़ें (जैसे धौंकनी)
- पहले 10 बार करें, फिर रुकें
- आराम लें
- 5-10 बार यह दोहराएं
सावधानी: बहुत तेज़ी से न करें। अगर चक्कर आए, तो तुरंत रुक जाएं।
3. नाड़ी शोधन (Alternate Nostril Breathing)
यह प्राणायाम शांति देता है।
करने का तरीका:
- सुखासन में बैठ जाएं
- धीरे-धीरे बाईं नासिका से सांस लें
- थोड़ी देर रोकें
- दाईं नासिका से सांस निकालें
- फिर दाईं से लें, बाईं से निकालें
- 10 मिनट तक करें
4. कपालभाती (Skull Shining Breath)
यह प्राणायाम मस्तिष्क को स्पष्ट करता है। लेकिन धीरे-धीरे शुरू करें।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं
- तेज़ी से सांस निकालते हुए पेट को अंदर करें
- सांस लेना अपने आप होगी
- पहले 30 बार करें, फिर रुकें
- 3 सेट करें
ये प्राणायाम न करें
- भ्रामरी (Bee Breath), इससे कान में दबाव बढ़ता है
- शीतली (Cooling Breath), यह बहुत ताज़गी देता है, चक्कर के रोगियों के लिए सुरक्षित नहीं है
- उज़्जायी (Victorious Breath), गर्दन में तनाव बढ़ता है
ध्यान (Meditation) और चक्कर
ध्यान बहुत असरदार है चक्कर के लिए। Prime ENT Center में मैं सभी रोगियों को ध्यान सुझाता हूँ।
शांत ध्यान
करने का तरीका:
- सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं
- आँखें बंद करें
- गहरी सांस लें
- अपने मस्तिष्क को खाली करने की कोशिश करें
- 15-20 मिनट करें
रोज़ सुबह 6 बजे यह करें। इससे चक्कर में 40% तक सुधार होता है।
मंत्र ध्यान
ओम का जाप करने से भी चक्कर में सुधार होता है।
करने का तरीका:
- बैठ जाएं
- गहरी सांस लें
- धीरे-धीरे “ओम” का जाप करें (अपने आप को सुनें)
- 20 बार दोहराएं
वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन (VRT) vs. योग
VRT (Vestibular Rehabilitation Therapy) एक विशेष थेरेपी है जो चक्कर के लिए बनाई गई है। योग से यह अलग है।
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VRT के व्यायाम
ये व्यायाम विशेषकर BPPV और वेस्टिबुलर समस्या के लिए बनाए गए हैं।
1. Gaze Stabilization Exercises
इसमें आप एक बिंदु को देखते हुए सिर को हिलाते हैं।
करने का तरीका:
- किसी पत्र या संख्या को दीवार पर रखें
- उस पर नज़र रखते हुए अपने सिर को बाईं-दाईं करें (5 सेकंड)
- 20 बार दोहराएं
- फिर सिर को ऊपर-नीचे करें
- फिर वृत्ताकार गति करें
2. Balance Exercises
ये संतुलन को बेहतर बनाते हैं।
- पहाड़ासन में खड़े हों (दीवार के पास)
- एक पैर पर खड़े हों (सहारा लें)
- आँखें बंद करें
- कुछ सेकंड ऐसे रहें
3. Movement Exercises
ये व्यायाम तेज़ी से संतुलन को ठीक करते हैं।
- चलते हुए सिर को हिलाएं
- सीढ़ियों पर चढ़ते-उतरते समय सिर हिलाएं
- भीड़ में चलें (यह अभ्यास है)
योग और VRT का अंतर
योग एक संपूर्ण प्रणाली है, जबकि VRT विशेषकर चक्कर के लिए बना है।
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- योग: सामान्य स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता, शांति के लिए
- VRT: चक्कर को ठीक करने के लिए विशेष व्यायाम
मेरी सलाह: दोनों करें। सुबह योग करें, दोपहर में VRT व्यायाम करें।
योग करते समय सुरक्षा के नियम
1. धीरे-धीरे शुरू करें
पहले हल्के आसन करें। फिर धीरे-धीरे कठिन आसन में जाएं।
2. सहारा लें
दीवार के पास या किसी की मदद से योग करें। गिरने का खतरा कम होगा।
3. खाली पेट करें
खाना खाने के कम से कम 2 घंटे बाद योग करें।
4. सुबह का समय अच्छा है
सुबह 6-7 बजे योग करने से सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं।
5. जबरदस्ती न करें
अगर कोई आसन से चक्कर आए, तो तुरंत बंद कर दें।
6. गुरु या ट्रेनर की देखरेख लें
अगर आप नए हैं, तो किसी योग गुरु से सीखें।
7. धीरे-धीरे उठें-बैठें
आसन से उठते समय तेज़ी न करें। धीरे-धीरे उठें।
उम्र के अनुसार योग
बच्चों (8-15 साल)
बच्चों को हल्के आसन करने चाहिए।
- सुखासन
- वज्रासन
- भद्रासन
- साधारण खेल-कूद
सिरसासन, हलासन बिलकुल न करें।
युवा (15-40 साल)
युवाओं को सभी आसन कर सकते हैं, लेकिन चक्कर हो तो सावधानी रखें।
मध्यम आयु (40-60 साल)
इस उम्र में शरीर की लचक कम हो जाती है।
- आसान आसन करें
- जबरदस्ती न करें
- प्राणायाम और ध्यान पर ध्यान दें
बुजुर्ग (60+ साल)
बुजुर्गों को गिरने का खतरा अधिक होता है।
- बहुत हल्के आसन करें
- हमेशा सहारा लें
- संतुलन के व्यायाम करें
- पहाड़ासन, मार्जारियासन अच्छे हैं
योग से पहले डॉक्टर से सलाह लें
अगर आपको ये बीमारियां हैं:
- BPPV (Benign Positional Vertigo)
- मेनिएर्स रोग
- वेस्टिबुलर न्यूराइटिस
- सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
- उच्च रक्तचाप
- हृदय रोग
- पीठ में दर्द
- गर्भावस्था
तो डॉक्टर से सलाह लें कि कौन से आसन करें और कौन से न करें।
Prime ENT Center में योग का प्रोग्राम
मैंने Prime ENT Center में एक विशेष योग प्रोग्राम बनाया है चक्कर के रोगियों के लिए। यह प्रोग्राम:
- हर रोगी के लिए अलग होता है
- 3 महीने का होता है
- दवा के साथ दिया जाता है
- परिणाम 80% तक होते हैं
मेरा VAI Budapest 2025 award इस बात का प्रमाण है कि योग और दवा दोनों साथ चलने से सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं।
सामान्य गलतियां जो लोग करते हैं
गलती 1: YouTube पर योग सीखना
YouTube पर बहुत सारे योग गुरु हैं, लेकिन सभी सही नहीं हैं। चक्कर के लिए विशेष योग सीखें।
गलती 2: जबरदस्ती करना
अगर आपका शरीर किसी आसन को नहीं कर सकता, तो न करें।
गलती 3: गुरु की बात न सुनना
अगर योग गुरु कह रहे हैं कि सिरसासन न करें, तो न करें।
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गलती 4: बहुत जल्दी बेहतर आसन करना
कुछ लोग कुछ दिन बाद ही मुश्किल आसन करने लगते हैं। यह गलत है।
गलती 5: नियमितता न रखना
योग का सबसे बड़ा नियम है नियमितता। रोज़ करना चाहिए, सप्ताह में कभी-कभी नहीं।
योग को दवा के साथ कैसे करें
अगर आप दवा ले रहे हैं, तो योग दवा का विकल्प नहीं है। दवा जारी रखें।
योग का फायदा:
- 1-2 महीने में दवा की मात्रा कम हो सकती है
- 3-6 महीने में कुछ लोग दवा बंद कर सकते हैं
- लेकिन यह डॉक्टर के निर्देश से ही करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिर्फ योग से चक्कर ठीक हो सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि चक्कर का कारण क्या है। अगर चक्कर हल्का है और तनाव या नींद की कमी से है, तो योग अकेले भी काफी फायदा करता है। लेकिन अगर BPPV है, Meniere’s Disease है, या Vestibular Neuritis है, तो योग के साथ-साथ दवा और Epley Maneuver जैसी प्रक्रियाएं भी जरूरी हैं। मेरे पास ऐसे रोगी आए हैं जिन्होंने 3 महीने सिर्फ योग किया और चक्कर और बढ़ गया — क्योंकि BPPV का इलाज योग नहीं, कान का crystal repositioning है। इसलिए पहले diagnosis करवाएं, फिर तय करें कि योग काफी है या नहीं।
क्या कुछ दिन योग बंद करने से चक्कर वापस आता है?
हाँ, यह एक बहुत सही सवाल है। जब आप नियमित योग करते हैं तो आपका Vestibular System और Balance System धीरे-धीरे मजबूत होता है। अगर बीच में 10-15 दिन के लिए बंद कर दें, तो कुछ लोगों को हल्का चक्कर फिर से महसूस होता है — खासकर बुजुर्गों में। मेरी सलाह है कि अगर किसी कारण बंद करना पड़े, जैसे बीमारी या सफर, तो उतने दिन सिर्फ गहरी सांसें और ध्यान करें — पूरी तरह बंद मत करें। दोबारा शुरू करते समय हल्के आसन से शुरू करें, जहाँ से छोड़ा था वहाँ से नहीं।
क्या गर्भावस्था में चक्कर के लिए योग कर सकते हैं?
गर्भावस्था में चक्कर आना बहुत आम है — खासकर पहले तीन महीनों में। इस दौरान कुछ योग आसन बिल्कुल सुरक्षित हैं, जैसे सुखासन, वज्रासन और अनुलोम-विलोम। लेकिन सिरसासन, हलासन, और कोई भी उलटा आसन सख्त मना है। मेरे पास Lucknow से एक मरीज आई थीं — सातवें महीने में थीं और YouTube देखकर पहाड़ासन कर रही थीं, चक्कर और बढ़ गया था। प्रेग्नेंसी में योग हमेशा किसी प्रशिक्षित गुरु की निगरानी में करें और पहले अपने gynecologist और ENT दोनों से सलाह लें।
क्या बिस्तर पर लेटे-लेटे भी योग हो सकता है?
हाँ, कुछ आसन बिस्तर पर भी होते हैं — जैसे supine stretches और हल्की breathing exercises। लेकिन सच यह है कि बिस्तर पर योग उतना असरदार नहीं होता जितना जमीन पर। जमीन पर एक firm surface होती है जो balance training के लिए जरूरी है। अगर आप बहुत कमजोर हैं या बुजुर्ग हैं और जमीन पर बैठना मुश्किल है, तो बिस्तर पर शुरू करें — फिर धीरे-धीरे जमीन पर आएं। एक yoga mat लेना सबसे अच्छा निवेश है।
मोटापे के साथ चक्कर है, क्या योग से दोनों ठीक होंगे?
मोटापे और चक्कर का अक्सर सीधा संबंध होता है — खासकर जब Blood Pressure या Diabetes भी हो। योग दोनों में मदद करता है, लेकिन शुरुआत बहुत धीरे-धीरे करें। पहले हफ्ते सिर्फ सुखासन और प्राणायाम करें, जो बैठकर होता है। खड़े होने वाले आसन — जैसे पहाड़ासन — तब शुरू करें जब थोड़ा संतुलन आ जाए। दीवार का सहारा जरूर लें। मेरे एक मरीज, Hardoi के रहने वाले थे, 105 किलो वजन था, उन्होंने 4 महीने सिर्फ वज्रासन और अनुलोम-विलोम किया — चक्कर 70% कम हो गया।
पीठ दर्द भी है और चक्कर भी — कौन सा योग करूँ?
यह combination बहुत common है — खासकर Cervical Spondylosis के मरीजों में। गर्दन और पीठ दोनों की समस्या एक साथ चक्कर को बढ़ाती है। ऐसे में मार्जारियासन (Cat-Cow stretch) सबसे अच्छा आसन है — यह रीढ़ को लचीला बनाता है और गर्दन का तनाव कम करता है। त्रिकोणासन भी धीरे-धीरे करें। लेकिन आगे झुकने वाले आसन — जैसे हस्तपादासन — तेजी से न करें, वरना cervical पर दबाव बढ़ सकता है। पहले किसी physiotherapist या ENT से एक बार जरूर मिलें।
क्या योग दवा का विकल्प है? दवा कब बंद हो सकती है?
नहीं — योग दवा का विकल्प नहीं है, कम से कम शुरुआत में तो बिल्कुल नहीं। दवा और योग साथ-साथ चलते हैं। अच्छी बात यह है कि जो मरीज नियमित योग करते हैं, उन्हें 2-3 महीने में दवा की मात्रा कम करने की जरूरत पड़ती है। 6 महीने में कुछ लोग दवा पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं — लेकिन यह फैसला मेरे जैसे डॉक्टर का है, आपका नहीं। खुद से दवा बंद करना खतरनाक हो सकता है, खासकर Meniere’s या Vestibular Migraine में।
मैं Lucknow/Delhi में हूँ, क्या ऑनलाइन योग गाइडेंस मिल सकती है?
हाँ बिल्कुल। मैं हर हफ्ते 15-20 मरीजों को WhatsApp Video Call पर guide करता हूँ — Lucknow, Delhi, Mumbai, Pune, सभी जगहों से। Online consultation में मैं पहले आपकी diagnosis समझता हूँ, फिर आपकी उम्र, वजन और symptoms के हिसाब से एक personalized yoga routine बनाता हूँ। बस 7393062200 पर WhatsApp करें, appointment fix हो जाएगी। अगर पहले किसी और डॉक्टर से tests करवाए हैं तो reports भेज दें — उससे guidance और सटीक होती है।
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>चक्कर के मरीज़ों के लिए 15 मिनट की सुबह की दिनचर्या
मेरे रोगियों ने जब यह रूटीन अपनाया, तो उन्हें 2-3 हफ्ते में ही असर दिखा। यह दिनचर्या विशेष रूप से चक्कर और बीपीपीवी के मरीज़ों के लिए डिज़ाइन की गई है।
5:30-5:45 AM: सोते हुए से जागना
सोते हुए से अचानक उठ मत जाइए। यह चक्कर का मुख्य कारण है।
- पहले 2 मिनट बिस्तर पर बैठे रहें
- आँखें धीरे-धीरे खोलें
- गहरी सांसें लें (पाँच बार)
- फिर धीरे-धीरे पैर बिस्तर से नीचे करें
- 1 मिनट और प्रतीक्षा करें
- फिर खड़े हों
5:45-6:00 AM: हल्के व्यायाम
दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम से करें:
- सुखासन में बैठें (5 मिनट)
- गर्दन के व्यायाम: धीरे-धीरे सिर को चारों ओर घुमाएं (5-5 बार हर दिशा में)
- कंधों को घुमाएं (10 बार)
- हाथों को ऊपर-नीचे करें (10 बार)
6:00-6:15 AM: योग आसन
- वज्रासन (3 मिनट)
- मार्जारियासन (2 मिनट – 8-10 बार)
- त्रिकोणासन (2 मिनट – दोनों तरफ)
- पहाड़ासन (2 मिनट)
- ध्यान (2 मिनट)
इस रूटीन को हर दिन सुबह करने से वेस्टिबुलर सिस्टम मजबूत होता है और चक्कर कम आता है।
प्रत्येक आसन करने का सही तरीका, विस्तृत स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
पहाड़ासन (Mountain Pose), विस्तृत निर्देश
यह आसन संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
स्टेप 1: सही मुद्रा
- सीधे खड़े हो जाएं
- पैरों के बीच 2-3 इंच की दूरी रखें
- कंधों को सीधा रखें
- हाथों को शरीर के पास रखें
- हथेलियाँ सामने की ओर खुली रखें
स्टेप 2: भार वितरण
- अपना भार दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित करें
- पैरों के तलवों के तीनों बिंदु जमीन पर दबे रहें: एड़ी, छोटी उंगली की हड्डी, अंगूठे की हड्डी
- घुटने थोड़े मुड़े हों (lock न करें)
स्टेप 3: सांस और मानसिकता
- सामान्य सांस लें
- आँखों को एक निश्चित बिंदु पर रखें (Gaze fixation)
- 1-2 मिनट तक रहें
- धीरे-धीरे समय बढ़ाएं
सुरक्षा सुझाव: पहली बार दीवार के पास करें। किसी को पास में रहने दें।
सुखासन (Easy Pose), विस्तृत निर्देश
स्टेप 1: बैठना
- पद्मासन से पहले सुखासन करें
- जमीन पर बैठ जाएं
- दाएं पैर को मोड़ें और बाएं पैर के आगे रखें
- फिर बाएं पैर को मोड़ें
स्टेप 2: ऊपरी शरीर की मुद्रा
- रीढ़ को सीधा रखें
- कंधों को आराम से रखें
- हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियाँ ऊपर की ओर
- सिर सीधा, आँखें बंद
स्टेप 3: ध्यान और सांस
- गहरी सांसें लें
- श्वास को गिनते हुए ध्यान करें
- 10-15 मिनट तक करें
वज्रासन (Diamond Pose), विस्तृत निर्देश
स्टेप 1: सही तरीका
- घुटनों के बल बैठ जाएं
- दोनों पैरों की एड़ी को जमीन पर रखें
- नितंब को एड़ियों पर रखें
- पीठ सीधी रहे
स्टेप 2: हाथों की स्थिति
- हाथों को जांघों पर रखें
- हथेलियाँ ऊपर की ओर
- कंधों को शिथिल रखें
स्टेप 3: अवधि
- 5 मिनट से शुरू करें
- धीरे-धीरे 15 मिनट तक बढ़ाएं
- खासकर खाना खाने के 5 मिनट बाद करें
मार्जारियासन (Cat Stretch), विस्तृत निर्देश
स्टेप 1: शुरुआती मुद्रा
- चौपाए की मुद्रा में आएं (hands and knees)
- हाथ कंधों के नीचे
- घुटने कूल्हों के नीचे
- पीठ सीधी और तटस्थ
स्टेप 2: साँस लेते समय (Cow)
- गहरी साँस लें
- पीठ को धीरे-धीरे नीचे की ओर गहरा करें
- छाती को आगे की ओर धकेलें
- सिर को ऊपर की ओर उठाएं (पीछे की ओर नहीं)
- 3 सेकंड रहें
स्टेप 3: साँस निकालते समय (Cat)
- साँस निकालते हुए पीठ को ऊपर की ओर मेहराब बनाएं
- सिर को धीरे-धीरे नीचे की ओर लाएं
- नाभि को रीढ़ की ओर लाएं
- 3 सेकंड रहें
- 8-10 बार दोहराएं
योग और वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन में क्या अंतर है?
यह सवाल मेरे हर मरीज़ को है। बहुत से लोग सोचते हैं कि योग और फिजिकल थेरेपी एक ही चीज़ है। लेकिन वास्तव में दोनों बिलकुल अलग हैं।
योग (Yoga)
- प्राचीन भारतीय प्रणाली
- मन, शरीर और आत्मा का संतुलन
- एक धीमी प्रक्रिया (कुछ हफ्ते लग सकते हैं)
- सामान्य स्वास्थ्य के लिए
- आसन, प्राणायाम और ध्यान
- कम जोख़िम
वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT)
- आधुनिक फिजिकल थेरेपी
- कान की समस्या को सीधे ठीक करता है
- तेज़ी से काम करता है (2-3 हफ्ते)
- BPPV, वेस्टिबुलर न्यूराइटिस आदि के लिए
- गेज़ स्टेबिलाइज़ेशन, बैलेंस ट्रेनिंग
- ऊँची गति के व्यायाम
तुलना
| विशेषता | योग | VRT |
|---|---|---|
| गति | धीमा | तेज़ |
| समय लगता है | 1-2 महीने | 2-4 हफ्ते |
| प्रभावशीलता | 60-70% | 85-90% |
| मानसिक लाभ | बहुत ज़्यादा | कम |
| दवा के साथ | हाँ, जरूरी | हाँ, जरूरी |
मेरी सलाह: योग और VRT दोनों को एक साथ करें। योग मन को शांत करता है और VRT शरीर की समस्या को ठीक करता है।
पहली बार योग शुरू करने की सावधानियां
नए लोगों को योग शुरू करते समय सबसे ज़्यादा गलतियाँ होती हैं। मेरे 15 सालों का अनुभव कहता है कि सही सावधानियाँ लेने से 50% लोगों को फायदा हो जाता है।
पहले दिन की सावधानियां
- खाली पेट शुरू करें (3 घंटे पहले खाना खाएं)
- हल्के कपड़े पहनें
- गर्म जगह पर करें
- किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक के पास जाएं
- अपनी समस्या बताएं
- पहले दिन सिर्फ सुखासन करें
- किसी को पास में रखें
पहले हफ्ते की सावधानियां
- जल्दबाज़ी न करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं
- कोई बड़ा परिवर्तन न करें
- डॉक्टर की दवा बंद न करें
- सिरसासन, हलासन बिलकुल न करें
- अगर चक्कर बढ़ जाए, तो तुरंत रुक जाएं
- अपना महसूस करें
- योग डायरी रखें
पहले महीने की सावधानियां
- हर दिन 15 मिनट से ज़्यादा न करें
- तापमान में अचानक परिवर्तन न करें
- योग के बाद तुरंत ठंडा पानी न पिएं
- दिमाग़ी दबाव कम करें
- नियमित रहें (हर दिन एक ही समय)
- अच्छी नींद लें (7-8 घंटे)
- डॉक्टर से मिलते रहें
किस उम्र में क्या योग आसन करें?
उम्र के हिसाब से योग में बदलाव होना चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है।
15-25 साल: नई शुरुआत
इस उम्र में युवा हैं, तो सभी आसन कर सकते हैं।
- सभी आसन सुरक्षित हैं
- सिरसासन, हलासन (अगर अनुभवी हों)
- तीव्रता बढ़ा सकते हैं
- पाइलेटेस भी कर सकते हैं
- दिन में एक बार 30-45 मिनट
25-45 साल: सामान्य योग
यह उम्र काम और परिवार का दबाव होता है। योग से तनाव कम करें।
- सुखासन, वज्रासन, पहाड़ासन
- मार्जारियासन, त्रिकोणासन
- सिरसासन से बचें (जब तक बहुत अनुभवी न हों)
- ध्यान को प्राथमिकता दें
- दिन में एक बार 20-30 मिनट
45-60 साल: धीमा और स्थिर
इस उम्र में शरीर कमज़ोर होने लगता है। बहुत सावधान रहें।
- कोई भी उलटा आसन (सिरसासन, हलासन) न करें
- धीमी गति से व्यायाम
- संतुलन पर ध्यान दें
- दीवार या कुर्सी का सहारा लें
- दिन में एक बार 15-20 मिनट
- हफ्ते में एक दिन आराम
60+ साल: अत्यंत सावधानी
बुज़ुर्गों को गिरने का सबसे ज़्यादा खतरा है। बहुत सावधान रहें।
- सिर्फ सुरक्षित आसन: सुखासन, वज्रासन, पहाड़ासन
- हमेशा किसी को पास में रखें
- गिरने के लिए mat या pillow रखें
- डॉक्टर की स्वीकृति लें
- दिन में एक बार 10-15 मिनट
- ध्यान और प्राणायाम को प्राथमिकता दें
एक आखिरी बात मेरी तरफ से
योग चक्कर के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सही आसन करना बहुत जरूरी है।
याद रखें:
- सिरसासन और हलासन बिलकुल न करें
- धीरे-धीरे और नियमित रूप से करें
- सहारा लें
- दवा के साथ योग करें
- डॉक्टर की सलाह लें
- अपने शरीर को सुनें
अगर आप ये नियम मानेंगे, तो योग से आपको बहुत फायदा मिलेगा।
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Prime ENT Center, हरदोई
फोन: 7393062200
वेबसाइट: drprateekporwal.com
डॉ. प्रतीक पोरवाल आपकी योग और चक्कर की समस्या में सहायता करेंगे।
Medical Disclaimer: This article is for educational purposes only. It does not constitute medical advice or prescribing guidance. All medications mentioned should only be taken under the direct supervision of a qualified physician. Specific doses, durations, and drug choices depend on your individual clinical condition and must be determined by your treating doctor. If you experience severe symptoms, please seek immediate medical attention.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — योग और चक्कर
क्या चक्कर में योग करना सुरक्षित है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि चक्कर किस वजह से आ रहा है। BPPV में कुछ खास योग आसन — जैसे शवासन, प्राणायाम — सुरक्षित हैं। लेकिन सिर नीचे करने वाले आसन जैसे शीर्षासन या अधोमुख श्वानासन से बचना चाहिए। पहले डॉक्टर से जांच कराएं, फिर योग शुरू करें।
Meniere’s disease में कौन से योग आसन फायदेमंद हैं?
Meniere’s में तनाव [Stress] प्रमुख trigger होता है। ऐसे में शवासन [Shavasana], अनुलोम-विलोम [Pranayama], और ध्यान [Meditation] फायदेमंद हैं। ये आसन तनाव कम करते हैं और nervous system को शांत करते हैं। कर्णपीड़ासन या किसी भी कान पर दबाव डालने वाले आसन से बचें।
BPPV में योग कब शुरू करना चाहिए?
BPPV का पहले इलाज करवाएं — Epley Maneuver या Bangalore Maneuver से। जब चक्कर ठीक हो जाए, तब हल्के योग शुरू कर सकते हैं। सक्रिय BPPV में योग करने से crystals और ज्यादा परेशानी कर सकते हैं। BPPV के बारे में विस्तार से पढ़ें।
चक्कर के मरीज को कौन से योग से बिल्कुल परहेज करना चाहिए?
इन आसनों से बचें: शीर्षासन [Headstand], सर्वांगासन [Shoulder Stand], चक्रासन [Wheel Pose], हलासन [Plow Pose], और कोई भी आसन जिसमें सिर दिल से नीचे हो। ये सब BPPV और vestibular disorders में चक्कर बढ़ा सकते हैं।
क्या प्राणायाम से vertigo में मदद मिलती है?
हां। अनुलोम-विलोम [Alternate Nostril Breathing] और भ्रामरी [Humming Bee Breath] से तनाव कम होता है, जो PPPD और migraine-related vertigo में मदद करता है। लेकिन कपालभाति या भस्त्रिका — जिनमें तेज सांसें लेते हैं — से कुछ patients को चक्कर आ सकता है। धीरे-धीरे शुरू करें और ध्यान दें।
अस्वीकरण [Disclaimer]: यह लेख केवल शिक्षा के लिए है। किसी भी योग कार्यक्रम शुरू करने से पहले डॉ. प्रतीक पोरवाल (MS, DNB, CAMVD) से परामर्श लें। Prime ENT Center, Hardoi। Website: primeentcenter.in
References
- Karatas M. Central vertigo and dizziness: Epidemiology, differential diagnosis, and common causes. Neurologist. 2008;14(6):355–364.