चक्कर का इलाज तभी सही होता है जब पहले यह साफ हो जाए कि चक्कर बीपीपीवी, वेस्टिबुलर न्यूराइटिस, माइग्रेन, मेनिएर रोग, दवा के असर या किसी आपात स्थिति से है। इसलिए हर मरीज को एक ही गोली देना सही तरीका नहीं है।

चक्कर लेखक: डॉ. प्रतीक पोरवाल, ईएनटी सर्जन एवं वर्टिगो विशेषज्ञ | प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई (उत्तर प्रदेश) | VAI Budapest 2025 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता

मेरे हरदोई क्लिनिक में हर दिन 20-30 मरीज़ चक्कर की शिकायत लेकर आते हैं। ज़्यादातर को 5 साल से दवा दी जा रही होती है, लेकिन चक्कर का इलाज सही कारण पहचाने बिना पूरा नहीं होता। इसलिए वे ठीक नहीं हो पाते।

चक्कर आना कई कारणों से होता है। हर कारण का इलाज अलग है। गलत जांच और पहचान = गलत इलाज = हमेशा दवा खाते रहना।

आज मैं आपको बताता हूँ कि चक्कर का इलाज कारण के हिसाब से कैसे तय होता है, और कैसे एक ही मुलाकात में सही दिशा मिल सकती है।

चक्कर आना क्या है?

चक्कर आना मतलब, दुनिया घूमती हुई दिखना। आपका शरीर तो स्थिर है। पर कान के अंदर की वेस्टिबुलर तंत्र (संतुलन तंत्र) गलत signal भेजती है।

मेरे यूपी के मरीज़ों से मैं अक्सर सुनता हूँ: “डॉक्टर, कमरा घूमता है। सब हिल जाता है।” यह बिल्कुल सच की अनुभूति है। आपके दिमाग को सच में लगता है कि सब घूम रहा है।

चक्कर की तीन खासियतें हैं:

चक्कर का इलाज सही जांच और पहचान पर क्यों निर्भर है?

भारत में चक्कर की गलत जांच और पहचान की epidemic है। ज़्यादातर डॉक्टर बिना सही examination के दवा दे देते हैं।

यूपी में मैंने जो देखा है:

नतीजा? 5 साल बाद भी चक्कर आता है। शरीर में दवाइयों का जमावड़ा हो जाता है।

मैं अपने क्लिनिक में क्या करता हूँ:

एक मुलाकात में ही 90% मरीज़ों को पता चल जाता है कि उन्हें क्या समस्या है।

बीपीपीवी का इलाज, सबसे आम चक्कर की समस्या

बीपीपीवी का पूरा नाम है, Benign Paroxysmal Positional वर्टिगो। मतलब, कान के अंदर के क्रिस्टल (tiny stones) गलत जगह चले जाते हैं।

बीपीपीवी के लिए बीपीपीवी का पूरा गाइड पढ़ें।

बीपीपीवी का इलाज दवा से नहीं होता। इसका इलाज है, एप्ली मैनुवर और बैंगलोर मैनुवर

ये maneuvers क्या हैं? मैं आपको समझाता हूँ:

एप्ली मैनुवर (सामान्य तरीका)

एप्ली एक set का positions है। इसमें आप अपने सिर को धीरे-धीरे अलग-अलग तरीके से घुमाते हैं। इससे कान के अंदर का क्रिस्टल वापस अपनी सही जगह आ जाता है।

Process:

  1. आप बैठते हैं, सिर 45 डिग्री एक तरफ झुका हुआ।
  2. फिर तेजी से पीछे लेट जाते हैं, सिर बिस्तर से नीचे लटका हुआ।
  3. पाँच मिनट रुकते हो।
  4. फिर सिर दूसरी तरफ घुमाते हो, 30 सेकंड रुकते हो।
  5. फिर बैठ जाते हो।

ज़्यादातर लोगों को पहली ही बार में राहत मिलती है। कुछ लोगों को 2-3 बार करना पड़ता है।

एप्ली के बारे में मेरा अनुभव: यह सब तरीके से काम करता है। पर कुछ मरीज़ों के लिए कठिन होता है (गठिया, मोटापा, साँस की समस्या)।

डिक्स-हॉलपाइक टेस्ट से मैं पहचान लेता हूँ कि आपको बीपीपीवी है या नहीं।

बैंगलोर मैनुवर (मेरी खास technique)

मैंने अपने 15 साल की experience में देखा कि कुछ मरीज़ों को एप्ली से परेशानी होती है। उन्हें मतली (मतली) आती है। या फिर एप्ली काम ही नहीं करता।

तब मैंने बैंगलोर मैनुवर develop किया। यह ज़्यादा gentle है। complicated बीपीपीवी मामले में काम करता है।

बैंगलोर मैनुवर अलग है क्योंकि:

मेरे हरदोई क्लिनिक में 85% बीपीपीवी मरीज़ एक ही मुलाकात में एप्ली/बैंगलोर से ठीक हो जाते हैं।

वेस्टिबुलर न्यूराइटिस का इलाज

वेस्टिबुलर न्यूराइटिस मतलब, कान का नस सूज जाता है। अचानक तेज़ चक्कर आता है। आँखें हिलती हैं (nystagmus)।

यह बीमारी कुछ दिन बहुत गंभीर होती है। फिर धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।

इलाज:

वेस्टिबुलर न्यूराइटिस में 2-4 हफ्ते लगते हैं। धीरे-धीरे चक्कर कम होता जाता है।

मेनिएर रोग का इलाज

मेनिएर’s बहुत डरावनी बीमारी दिखती है। कान में दबाव, tinnitus (आवाज़), सुनने में कमी, और तेज़ चक्कर।

पर इलाज possible है। यह कान के अंदर तरल की excess मात्रा से होता है।

इलाज के तरीके:

पहला स्तर, Lifestyle बदलाव

दूसरा स्तर, दवाइयाँ

तीसरा स्तर, Injections/Surgery (अगर बाकी सब fail हो)

मेनिएर’s में मेरा इलाज का तरीका: नमक कम करना ही सबसे ज़रूरी है। ज़्यादातर मरीज़ सिर्फ यही करके ठीक हो जाते हैं।

वेस्टिबुलर माइग्रेन का इलाज

वेस्टिबुलर माइग्रेन मतलब, माइग्रेन + चक्कर। कुछ लोगों को सिरदर्द के साथ चक्कर आता है। कुछ को सिरदर्द के बिना ही।

वेस्टिबुलर माइग्रेन के बारे में विस्तार से जानें।

इलाज:

वेस्टिबुलर माइग्रेन को सही जांच और पहचान मिलना मुश्किल है। इसलिए मैं विस्तृत history लेता हूँ।

क्या (a रक्त-नली फैलाने वाली दवा) चक्कर को ठीक करती है?

यह सवाल बहुत अहम है। क्योंकि भारत में सबसे ज़्यादा चक्कर की दवा लिखी जाती है।

सच का जवाब: सिर्फ कुछ स्थितियों में काम करती है। बीपीपीवी में बिल्कुल नहीं।

यह गलत है: “चक्कर आ रहा है तो ले लो।”

सही बात: “पहले पता करो कि चक्कर किस कारण से है। फिर इलाज करो।”

किसमें काम करती है:

बीपीपीवी में क्यों नहीं काम करती? क्योंकि बीपीपीवी एक शारीरिक समस्या है। कान के अंदर क्रिस्टल गलत जगह पर है। दवा से क्रिस्टल नहीं हटेगा। मैनुवर से ही हटेगा।

कान में खून बहाव बढ़ाती है। पर क्रिस्टल को हिलना नहीं करती।

भारत में 5 साल से कोई ले रहा है और ठीक नहीं हुआ? तो 100% बीपीपीवी है। और एप्ली/बैंगलोर से ठीक होगा।

घर पर क्या करें और क्या न करें

चक्कर आते समय घर पर क्या करें:

करें:

न करें:

सबसे ज़रूरी: चक्कर के दौरान घबराहट न करें। ज़्यादा घबराहट = ज़्यादा चक्कर।

कब डॉक्टर के पास आएं? आपातकालीन संकेत

ज़्यादातर चक्कर serious नहीं होता। पर कुछ मामले में तुरंत डॉक्टर देखना ज़रूरी है।

Emergency संकेत:

चक्कर और स्ट्रोक में फर्क जानना बहुत ज़रूरी है।

ये सब संकेत स्ट्रोक के हो सकते हैं। तुरंत hospital जाएं।

सामान्य चक्कर में ये संकेत नहीं होते:

डॉ. प्रतीक का इलाज का तरीका: एक मुलाकात में जांच और पहचान + इलाज

मेरे हरदोई क्लिनिक में मैंने एक तंत्र बनाया है। जिसमें मरीज़ एक ही मुलाकात में पता लगा लेते हैं कि उन्हें क्या है। और सही इलाज भी मिल जाता है।

Step 1, Detailed History (10-15 मिनट)

इसी से मुझे 70% पता चल जाता है कि क्या स्थिति है।

Step 2, Physical Examination (5-10 मिनट)

ये सब जांचें से मुझे 95% पता चल जाता है।

Step 3, वीएनजी Testing (5 मिनट)

वीएनजी टेस्ट एक advanced जांच है। यह आपकी आँखों की गतिविधि को measure करता है। computer के through। इससे वेस्टिबुलर तंत्र की exact स्थिति पता चलती है।

Step 4, इलाज (5-15 मिनट)

बस। एक ही मुलाकात में जांच और पहचान + इलाज।

मैंने देखा है, जब मरीज़ को पता चल जाता है कि उसे क्या है। तो भी 50% राहत मिल जाती है। क्योंकि घबराहट कम हो जाती है।

यूपी में मरीज़ों की Common गलतियाँ

मेरे 15 साल के experience में मैंने देखा है कि यूपी के मरीज़ कुछ आम गलतियाँ करते हैं।

Mistake 1: बिना जाँच के दवा लेना

किसी को चक्कर आता है तो तुरंत किसी neighbor से पूछता है। neighbor कहता है, “मेरे को भी हुआ था। ले लो। ठीक हो जाएगा।” फिर 5 साल खाता है। ठीक नहीं होता।

सही बात: जांच और पहचान बिना हो नहीं सकता। हर चक्कर अलग है।

Mistake 2: एमआरआई करवा लेना

मेरे यहाँ आधे मरीज़ बताते हैं, “डॉक्टर, हमने तो एमआरआई भी करवा लिया। पर चक्कर खत्म नहीं हुआ।” एमआरआई कीमती है। पर ज़्यादातर चक्कर में एमआरआई की ज़रूरत नहीं।

एमआरआई कब चाहिए? जब Central वर्टिगो का संदेह हो। या फिर दिमाग में tumor का risk हो। नहीं तो Peripheral वर्टिगो के लिए एमआरआई waste है।

Mistake 3: “सर्वाइकल का चक्कर” diagnose करवा लेना

गलत जांच और पहचान की सबसे बड़ी परेशानी यह है। हर चक्कर को “सर्वाइकल” बता दिया जाता है। फिर सर्वाइकल collar लगवाया जाता है। मालिश करवाई जाती है।

सर्वाइकल और चक्कर, यह दोनों अलग हैं।

सर्वाइकल वर्टिगो बहुत rare है। 5% से कम। पर हर जगह diagnose किया जाता है।

Mistake 4: बिना इलाज के घर पर भरोसा करना

कुछ मरीज़ कहते हैं, “डॉक्टर, यह तो ठीक हो ही जाएगा। बस समय लगेगा।” हाँ, कुछ चक्कर (जैसे वेस्टिबुलर न्यूराइटिस) ठीक हो जाते हैं। पर बीपीपीवी? नहीं। इसे इलाज चाहिए।

Mistake 5: कसरत सही तरीके से न करना

कुछ मरीज़ मैं रिहैबिलिटेशन कसरत देता हूँ। पर वो सही तरीके से नहीं करते। या तो कसरत बिल्कुल नहीं करते। या फिर गलत तरीके से करते हैं।

मेरी सलाह: कसरत के लिए एक physiotherapist से consult करें। जिसे वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन की knowledge हो।

क्या बेताहिस्टीन से बीपीपीवी ठीक होता है?

यह सवाल मुझसे हर दिन पूछा जाता है। इसलिए मैं directly जवाब दे देता हूँ।

नहीं। बीपीपीवी में काम नहीं करती।

क्यों? क्योंकि बीपीपीवी एक mechanical समस्या है। Crystals गलत जगह पर हैं। दवा से क्रिस्टल हिलना नहीं होगा। sirf मैनुवर से हिलना होगा।

का mechanism: यह भीतरी कान में खून बहाव बढ़ाती है। वेस्टिबुलर नस को oxygen supply बेहतर करती है। पर क्रिस्टल को नहीं हटाती।

बीपीपीवी के लिए सही इलाज: बीपीपीवी का पूरा गाइड पढ़ें। वहाँ एप्ली और बैंगलोर मैनुवर की विस्तृत जानकारी है।

दूसरी दवाइयाँ जो चक्कर में दी जाती हैं

के अलावा और भी दवाइयाँ हैं जो चक्कर में दी जाती हैं।

1. (an मतली रोकने वाली दवा)

2. a वेस्टिबुलर दबाने वाली दवा

3. a वेस्टिबुलर दबाने वाली दवा (Valium)

मेरी सलाह: short-term के लिए ये दवाइयाँ ठीक हैं। पर लंबे समय का नहीं। क्योंकि वेस्टिबुलर compensation रुक जाता है।

दवाइयों पर निर्भरता का खतरा

भारत में बहुत लोग 5-10 साल से चक्कर की दवा खा रहे हैं। और ठीक नहीं हुए।

क्यों?

क्योंकि दवा से लक्षण को suppress (दबा) दिया जाता है। पर actual समस्या नहीं हटाई जाती। और इसी में सबसे बड़ा खतरा है।

वेस्टिबुलर Compensation क्या है?

जब आपका वेस्टिबुलर तंत्र damage होता है (जैसे वेस्टिबुलर न्यूराइटिस में), तो आपका दिमाग नया संतुलन तंत्र develop करता है। पुरानी damaged तंत्र के बिना। यह process 4-6 हफ्ते में होता है।

पर अगर आप दवा लेते रहो तो यह compensation नहीं होगा। आप हमेशा दवा पर निर्भर रहोगे।

सही इलाज का तरीका:

Summary: चक्कर का सही इलाज कैसे होता है

एक सामान्य story सुनो, मेरे हरदोई क्लिनिक से:

मरीज़: राजेश, 52 साल

राजेश को 3 साल से चक्कर आ रहा है। हर बार सुबह उठते हुए। और जब कपड़े पहनते हुए आगे झुकता है। उसने 10 अलग-अलग डॉक्टरों से दिखवाया। सब ने कहा, “सर्वाइकल है। X-ray लो। physiotherapy करो।”

3 साल बाद भी ठीक नहीं हुआ। राजेश बहुत depressed था। सोचता था, “लाइलाज है।”

फिर वह मेरे क्लिनिक में आया।

मैंने 15 मिनट में जांच और पहचान कर दिया, “100% बीपीपीवी है। Posterior canal।”

फिर मैंने एप्ली मैनुवर किया। 10 मिनट में।

राजेश बैठा। बोला, “डॉक्टर, चक्कर चला गया।”

मैंने कहा, “हाँ, 3 साल से आप बीपीपीवी के साथ जी रहे हैं। इसे सिर्फ मैनुवर चाहिए। दवा नहीं।”

अब वह 2 साल से बिल्कुल ठीक है।

यही मेरा इलाज का तरीका है।

जांच और पहचान सही करो। इलाज सरल होगा।

यूपी के मरीज़ों के लिए मेरा message

अगर आपका चक्कर 2 हफ्ते से ज़्यादा है, या फिर बार-बार आ रहा है, तो सही जांच और पहचान करवा लीजिए।

प्राइम ईएनटी सेंटर आइए। मैं एक ही मुलाकात में आपको बताता हूँ कि समस्या क्या है और उसका सही इलाज क्या है।

5-10 साल की दवा खाने की ज़रूरत नहीं है। चक्कर ठीक हो सकता है।

परिवार के साथ डॉक्टर के पास आएं। क्योंकि चक्कर सिर्फ रोगी को ही नहीं, पूरे परिवार को परेशान करता है।

Clinical practice guidelines और PubMed पर उपलब्ध reviews भी यही दिखाते हैं कि चक्कर का इलाज हमेशा उसके सही कारण की पहचान से शुरू होता है।

चक्कर आ रहा है? एक बार में सही इलाज पाएं।

डॉ. प्रतीक पोरवाल, ईएनटी सर्जन एवं वर्टिगो विशेषज्ञ, प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई (उत्तर प्रदेश), VAI Budapest 2025 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता। ज़्यादातर बीपीपीवी के मरीज़ एक ही बार में ठीक हो जाते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चक्कर से स्ट्रोक हो सकता है?

ज़्यादातर चक्कर से स्ट्रोक नहीं होता। पर स्ट्रोक से चक्कर हो सकता है। दोनों में फर्क जानना ज़रूरी है। अगर चेहरा टेढ़ा हो, एक तरफ कमज़ोरी हो, या बोलने में दिक्कत हो, तो तुरंत hospital जाएं।

क्या चक्कर आने से मरीज़ का दिमाग़ खराब हो सकता है?

नहीं। चक्कर से दिमाग़ खराब नहीं होता। पर चक्कर से घबराहट और depression हो सकता है। इसलिए सही इलाज ज़रूरी है।

क्या pregnancy में चक्कर आना normal है?

हाँ, pregnancy में चक्कर आम है। खून दबाव में change से। पर अगर तेज़ चक्कर हो तो डॉक्टर को बताएं। कुछ मामले में इलाज चाहिए।

क्या elderly लोगों में चक्कर ज़्यादा होता है?

हाँ। 50 साल के बाद बीपीपीवी बहुत आम है। खासकर महिलाओं में। vitamin D की कमी इसका एक कारण है।

क्या चक्कर की दवा सुरक्षित है? कोई दुष्प्रभाव तो नहीं?

ज़्यादातर दवाइयाँ सुरक्षित हैं अगर short-term दी जाएं। पर लंबे समय का इस्तेमाल में दुष्प्रभाव हो सकते हैं। जैसे मतली, drowsiness, या निर्भरता। इसलिए सही जांच और पहचान के बाद ही दवा दें।

क्या एप्ली मैनुवर को घर पर भी कर सकते हैं?

नहीं। एप्ली को डॉक्टर के supervision में ही करना चाहिए। गलत तरीके से करने से चक्कर बढ़ सकता है।


Medical Disclaimer: This article है के लिए educational purposes only और does not constitute चिकित्सकीय सलाह, जांच और पहचान or prescribing guidance. Consult डॉ. प्रतीक पोरवाल at प्राइम ईएनटी सेंटर, हरदोई के लिए personalised इलाज.

References

  1. Karatas M. Central वर्टिगो और चक्कर: Epidemiology, differential जांच और पहचान, और आम causes. न्यूरोलॉजिस्ट. 2008;14(6):355–364.