अगर आपको लगातार चक्कर आते हैं और साथ में मन उदास रहता है, किसी काम में मन नहीं लगता, तो यह सिर्फ शारीरिक कमज़ोरी भर नहीं है। बल्कि, अकेलापन, चक्कर आना और दिल घबराना जैसी भावनाएँ आपकी नींद, रोज़मर्रा के काम और लोगों से मिलने-जुलने की इच्छा को बहुत प्रभावित कर सकती हैं। क्लिनिक में ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि सिर घूमता रहता है और वे बिस्तर से उठना भी नहीं चाहते।

यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ चक्कर और उदासी एक-दूसरे को और बढ़ा सकते हैं, जिसे डॉक्टरी भाषा में क्रॉनिक वर्टिगो से जुड़ा डिप्रेशन कहते हैं।

अभी क्या करें

  • घर पर राहत: सबसे पहले, अपनी नींद का एक तय समय बनाएं, भले ही आपको नींद न आ रही हो। हर दिन एक ही समय पर उठने की कोशिश करें, यहाँ तक कि छुट्टी वाले दिन भी। अपनी दिनचर्या में हल्की-फुल्की गतिविधि शामिल करें, जैसे घर में ही थोड़ी देर टहलना या किसी से बात करना।
  • डॉक्टर को दिखाएं: अगर आपको दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से लगातार चक्कर आ रहे हैं और साथ में मन उदास है, किसी चीज़ में रुचि नहीं है, या आप अकेलापन महसूस कर रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। एक ENT specialist से मिलकर अपनी समस्या बताएं।
  • तुरंत जाएं: अगर आपको खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तेज़ी से वज़न कम हो रहा है, अजीब आवाज़ें सुनाई दे रही हैं, या आप अपनी देखभाल बिल्कुल नहीं कर पा रहे हैं, तो बिना देर किए तुरंत किसी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना बहुत ज़रूरी है।

  • आत्महत्या के विचार, योजनाएँ, या खुद को नुकसान पहुँचाना: यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर आपके मन में ऐसे विचार आ रहे हैं, तो बिना किसी देरी के तुरंत मदद लें।
  • भूख का पूरी तरह खत्म होना और तेज़ी से वज़न कम होना: अगर आपको बिल्कुल भूख नहीं लग रही और आपका वज़न अचानक बहुत कम हो गया है, तो यह गंभीर डिप्रेशन या किसी और स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
  • मनोविकृति के लक्षण — आवाज़ें सुनाई देना, दूसरों पर शक करना: अगर आपको ऐसी चीज़ें सुनाई या दिखाई दे रही हैं जो दूसरों को नहीं, या आपको लगता है कि कोई आपको नुकसान पहुँचाना चाहता है, तो यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति हो सकती है।
  • खुद की या आश्रितों की गंभीर उपेक्षा: अगर आप अपनी या अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल बिल्कुल नहीं कर पा रहे हैं, जैसे खाना बनाना, नहाना या बच्चों का ध्यान रखना, तो यह मदद की ज़रूरत का संकेत है।
  • नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण: अगर आपको शरीर के किसी हिस्से में नई कमज़ोरी, सुन्नपन, बोलने में दिक्कत या देखने में बदलाव महसूस हो रहा है, तो यह दिमाग से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
  • बच्चे के जन्म के बाद उदासी: अगर बच्चे के जन्म के बाद आपको बहुत ज़्यादा उदासी, अकेलापन या घबराहट महसूस हो रही है, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है और इसे तुरंत इलाज की ज़रूरत है।

Vertigo and चक्कर और उदासी के लक्षण

जब किसी को लंबे समय तक चक्कर आते हैं, तो यह सिर्फ़ शारीरिक परेशानी नहीं होती, बल्कि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। मेरे अनुभव में, के कई मरीज़ चक्कर और उदासी के साथ कई और लक्षण बताते हैं।

  • लगातार चक्कर आना: मरीज़ों को अक्सर लगता है कि उनका सिर घूम रहा है या वे असंतुलित महसूस कर रहे हैं, जिससे रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।
  • किसी चीज़ में रुचि न लेना: जो काम पहले पसंद थे, जैसे दोस्तों से मिलना या शौक पूरे करना, उनमें अब कोई मज़ा नहीं आता।
  • लगातार थकान और ऊर्जा की कमी: हमेशा थका हुआ महसूस करना, भले ही आपने पर्याप्त नींद ली हो, और किसी भी काम के लिए ऊर्जा न होना।
  • नींद नहीं सिर घूमना: रात को सोने में दिक्कत होना, या तो नींद न आना या बार-बार नींद टूटना, जिससे सुबह उठने पर भी ताज़गी महसूस न होना।
  • सामाजिक अलगाव: लोगों से दूर रहना, दोस्तों और परिवार से बातचीत कम करना, और अकेले रहना पसंद करना।
  • चिड़चिड़ापन या गुस्सा: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या चिड़चिड़ापन महसूस होना, जो पहले नहीं होता था।
  • एकाग्रता में कमी: किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होना, चाहे वह पढ़ना हो, काम करना हो या बातचीत करना हो।
  • भूख में बदलाव: या तो बहुत ज़्यादा भूख लगना या बिल्कुल भूख न लगना, जिससे वज़न में बदलाव आ सकता है।
  • मन उदास सिर घूमना: लगातार उदास महसूस करना, निराशावादी विचार आना, और भविष्य के बारे में नकारात्मक सोचना।

Vertigo and चक्कर और उदासी के कारण

चक्कर और उदासी का आपस में गहरा संबंध है। यह समझना ज़रूरी है कि डिप्रेशन का मतलब यह नहीं है कि आपके चक्कर असली नहीं थे; बल्कि, यह अक्सर लंबे समय तक चलने वाले चक्कर की वजह से होने वाली एक प्रतिक्रिया होती है।

  • पुरानी बीमारी से होने वाला डिप्रेशन: जब किसी को लंबे समय तक चक्कर आते हैं, तो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बहुत असर पड़ता है। वे गाड़ी नहीं चला पाते, काम पर नहीं जा पाते, सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाते, और अपनी आज़ादी खो देते हैं। इन सब नुकसानों की वजह से उदासी और निराशा महसूस होना एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है।
  • पहले से मौजूद डिप्रेशन: कुछ लोगों को चक्कर आने से पहले से ही डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। ऐसे मामलों में, चक्कर आने से उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
  • थायराइड, विटामिन डी, बी12 की कमी: कभी-कभी थायराइड हार्मोन का असंतुलन या विटामिन डी, बी12 और आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी भी डिप्रेशन जैसे लक्षण पैदा कर सकती है। ये कमियाँ शरीर के ऊर्जा स्तर और मूड को प्रभावित करती हैं, जिससे मन उदास सिर घूमना जैसी समस्या हो सकती है।
  • पेरिनेटल डिप्रेशन: गर्भावस्था या बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं में डिप्रेशन होना आम है। अगर इस दौरान चक्कर भी आते हैं, तो यह स्थिति और जटिल हो सकती है, क्योंकि हार्मोनल बदलाव और नई माँ बनने का तनाव दोनों ही चक्कर और उदासी को बढ़ा सकते हैं।

जांच और निदान

जब आप क्लिनिक में चक्कर और उदासी की शिकायत लेकर आते हैं, तो मेरा पहला काम आपकी बात को ध्यान से सुनना होता है। मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछता हूँ, जैसे चक्कर कब से आ रहे हैं, कितने तेज़ आते हैं, और उदासी के लक्षण कब से महसूस हो रहे हैं।

मैं आपसे कुछ खास सवाल पूछता हूँ, जैसे कि क्या आपको कभी खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आए हैं, या क्या आपको किसी चीज़ में रुचि नहीं रही। इसके लिए हम PHQ-9 और दो-प्रश्न डिप्रेशन स्क्रीन जैसे आसान टेस्ट का उपयोग करते हैं। ये हमें आपकी मानसिक स्थिति को समझने में मदद करते हैं।

इसके बाद, मैं कुछ शारीरिक जांचें भी करता हूँ। मैं आपके कान की Otoscopy करता हूँ ताकि यह पता चल सके कि चक्कर का कारण कान से जुड़ा है या नहीं। मैं कुछ ब्लड टेस्ट भी करवाता हूँ, जैसे थायराइड, विटामिन डी, बी12 और आयरन पैनल। ये टेस्ट यह जानने के लिए ज़रूरी हैं कि कहीं इन पोषक तत्वों की कमी तो नहीं है, क्योंकि इनकी कमी भी डिप्रेशन जैसे लक्षण पैदा कर सकती है। अगर ज़रूरत पड़े, तो मैं आत्महत्या के जोखिम का आकलन भी करता हूँ। इन सभी जांचों से मुझे आपकी समस्या की जड़ तक पहुँचने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।

इलाज के विकल्प

चक्कर और उदासी का इलाज एक साथ करना ज़रूरी है, क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। मेरा लक्ष्य सिर्फ़ आपके चक्कर ठीक करना नहीं, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाना है।

डॉक्टर का इलाज

इलाज में अक्सर कई तरीके शामिल होते हैं। हम संरचित CBT जैसी बातचीत चिकित्सा का उपयोग करते हैं, जो आपको नकारात्मक विचारों और व्यवहारों को बदलने में मदद करती है। कुछ मामलों में, मैं SSRI-श्रेणी या SNRI-श्रेणी की एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ लेने की सलाह दे सकता हूँ।

ये दवाएँ आपके दिमाग के रसायनों को संतुलित करती हैं और उदासी को कम करने में मदद करती हैं। मैं आपको एक दैनिक गतिविधि लॉग बनाने और धीरे-धीरे अपनी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित करता हूँ, क्योंकि डिप्रेशन में प्रेरणा से पहले कार्रवाई आती है। नियमित रूप से एक ही समय पर जागना भी आपकी मनोदशा को स्थिर करने में बहुत मददगार होता है। अगर ब्लड टेस्ट में विटामिन डी, बी12, आयरन या थायराइड में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे ठीक करने के लिए दवाएँ दी जाती हैं। वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन (चक्कर के लिए व्यायाम) भी जारी रखना ज़रूरी है, क्योंकि व्यायाम खुद भी एंटीडिप्रेसेंट का काम करता है। परिवार के किसी सदस्य को इस प्रक्रिया में शामिल करना भी बहुत सहायक होता है, ताकि वे आपका साथ दे सकें।

सर्जरी कब?

चक्कर और उदासी के इलाज में आमतौर पर सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती है। सर्जरी केवल तभी की जाती है जब चक्कर का कोई ऐसा अंतर्निहित कारण हो जिसका इलाज सर्जरी से ही संभव हो, जैसे कि कान के पर्दे में छेद या कुछ खास तरह की वेस्टिबुलर समस्याएँ। डिप्रेशन के लिए कोई सर्जरी नहीं होती; इसका इलाज थेरेपी और दवाइयों से ही किया जाता है।

अगर आपके चक्कर का कारण ऐसा है जिसके लिए सर्जरी की ज़रूरत है, तो मैं आपको विस्तार से समझाऊँगा कि कौन सी सर्जरी आपके लिए सबसे अच्छी रहेगी।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

चक्कर और उदासी से निपटने के लिए घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। ये छोटे कदम आपके इलाज में बहुत मदद कर सकते हैं।

क्या करें

  • दैनिक गतिविधि लॉग: हर दिन एक छोटी सी गतिविधि, जैसे थोड़ी देर टहलना या किसी दोस्त से बात करना, ज़रूर करें। इससे आपको धीरे-धीरे सक्रिय होने में मदद मिलेगी।
  • निश्चित जागने का समय: हर दिन, यहाँ तक कि सप्ताहांत में भी, एक ही समय पर जागने की आदत डालें। यह आपके शरीर की आंतरिक घड़ी को नियंत्रित करता है और मूड को बेहतर बनाता है।
  • एक भरोसेमंद पारिवारिक सदस्य: अपने परिवार के किसी ऐसे सदस्य को अपनी स्थिति के बारे में बताएं जिस पर आप भरोसा करते हैं। उनका साथ और समझ आपको अकेलापन महसूस नहीं होने देगी।
  • विटामिन की कमी को ठीक करें: अगर आपके डॉक्टर ने विटामिन डी, बी12 या आयरन की कमी बताई है, तो उनकी सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लें। ये आपके ऊर्जा स्तर और मूड को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
  • वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन जारी रखें: अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट द्वारा बताए गए चक्कर के व्यायाम नियमित रूप से करते रहें। ये व्यायाम आपके संतुलन को बेहतर बनाने और चक्कर को कम करने में सहायक होते हैं।

क्या न करें

  • शराब या भांग का सेवन: शराब या भांग का उपयोग अपनी उदासी या चक्कर को कम करने के लिए न करें। ये दोनों ही आपकी स्थिति को और खराब कर सकते हैं और इलाज में बाधा डाल सकते हैं।
  • एंटीडिप्रेसेंट अचानक बंद करना: अगर आप एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ ले रहे हैं, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना अचानक बंद न करें। इससे चक्कर सहित अप्रिय विड्रॉल के लक्षण हो सकते हैं।
  • पूरी तरह से निष्क्रिय रहना: यह सोचकर कि “जब बेहतर महसूस करूँगा तब कुछ करूँगा” अपनी सभी गतिविधियाँ न छोड़ें। डिप्रेशन में प्रेरणा से पहले कार्रवाई आती है, इसलिए थोड़ा सक्रिय रहना ज़रूरी है।
  • गुरुओं या ज्योतिषियों पर भरोसा: डॉक्टरी इलाज के बजाय गुरुओं, ज्योतिषियों या व्हाट्सएप पर आने वाले बिना पुष्टि वाले उपचारों पर भरोसा न करें। इससे आपका इलाज टल सकता है और स्थिति बिगड़ सकती है।
  • बच्चे के जन्म के बाद मूड में बदलाव को नज़रअंदाज़ करना: अगर आप एक नई माँ हैं और आपको बच्चे के जन्म के बाद उदासी या चक्कर आ रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यह पेरिनेटल डिप्रेशन हो सकता है और इसे तुरंत इलाज की ज़रूरत है।
  • परिवार द्वारा ‘आलसी’ या ‘नकारात्मक’ कहना: अगर आपका परिवार आपको ‘आलसी’ या ‘नकारात्मक’ कह रहा है, तो उन्हें अपनी मेडिकल कंडीशन के बारे में समझाएं। यह आपको और अकेला महसूस करा सकता है।

WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।

बचाव

चक्कर और उदासी से बचाव के लिए स्थानीय वातावरण और जीवनशैली को ध्यान में रखना ज़रूरी है। कुछ सावधानियाँ आपको इस समस्या से दूर रहने में मदद कर सकती हैं।

  • नियमित स्वास्थ्य जांच: अपने थायराइड, विटामिन डी, बी12 और आयरन के स्तर की नियमित जांच करवाएं। इन पोषक तत्वों की कमी को समय पर पूरा करने से चक्कर और उदासी दोनों से बचा जा सकता है।
  • तनाव प्रबंधन: योग, ध्यान या अपनी पसंद की कोई भी गतिविधि करके तनाव को कम करने का प्रयास करें। तनाव चक्कर और उदासी दोनों को बढ़ा सकता है, इसलिए इसे नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।
  • पर्याप्त नींद और स्वस्थ आहार: हर रात 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। संतुलित आहार लें जिसमें ताज़े फल, सब्ज़ियाँ और अनाज शामिल हों। यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद है।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे अपने मन खराब होने के लिए तुरंत मदद कब लेनी चाहिए?

यदि आपको खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार या योजनाएँ आ रही हैं, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है। यदि आपको पूरी तरह से भूख न लगे और तेज़ी से वज़न कम हो, आवाज़ें सुनाई दें, अजीबोगरीब धारणाएँ हों कि दूसरे आपको सता रहे हैं, या आप खुद की या अपने आश्रितों की गंभीर रूप से उपेक्षा कर रहे हैं, तो भी तत्काल जाँच की ज़रूरत है। यदि आपको अपने शरीर में नई कमज़ोरी या सुन्नपन महसूस हो, या यदि ये उदासी की भावनाएँ बच्चे के जन्म के बाद शुरू हुई हैं, तो कृपया तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये गंभीर लक्षण हैं जिनकी तुरंत जाँच की आवश्यकता है।

जब डिप्रेशन वर्टिगो से जुड़ा हो तो आप उसका इलाज कैसे करते हैं?

हम सबसे पहले आपकी भावनाओं पर खुलकर चर्चा करते हैं और डिप्रेशन की जाँच करते हैं। इलाज में अक्सर कई रणनीतियाँ शामिल होती हैं। संरचित बातचीत चिकित्साएँ, जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), बहुत प्रभावी हो सकती हैं। हम धीरे-धीरे रोज़मर्रा की गतिविधियों को फिर से शुरू करने पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि प्रेरणा से पहले अक्सर कार्रवाई आती है। हर दिन, यहाँ तक कि सप्ताहांत में भी, एक निश्चित समय पर जागने की आदत बनाना मनोदशा को नियंत्रित करने में काफी मदद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, हम विटामिन डी, बी12, आयरन या थायराइड फ़ंक्शन में किसी भी कमी की जाँच करते हैं और उसे ठीक करते हैं, क्योंकि ये आपकी मनोदशा और ऊर्जा को प्रभावित कर सकते हैं।

इस तरह के डिप्रेशन के लिए दवाई के बारे में क्या?

कुछ लोगों के लिए, दवाई इलाज का एक बहुत मददगार हिस्सा हो सकती है। हम अक्सर SSRI-श्रेणी या SNRI-श्रेणी की एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ लेने पर विचार करते हैं। ये नींद की गोलियाँ नहीं हैं और न ही आपको “ज़ोंबी” बनाती हैं या आपके मूल व्यक्तित्व को बदलती हैं। सही खुराक पर लेने पर, ये दिमाग के रसायनों को संतुलित करने में मदद करती हैं। कोई भी दुष्प्रभाव, जैसे हल्की मतली या नींद में बदलाव, आमतौर पर अस्थायी होते हैं और पहले एक से दो हफ़्तों के भीतर ठीक हो जाते हैं। ये दवाएँ मनोदशा में काफी सुधार कर सकती हैं और आपको अपने जीवन की गुणवत्ता वापस पाने में मदद कर सकती हैं।

क्या एंटीडिप्रेसेंट मुझे बदल देंगी या मुझे इन्हें हमेशा लेना होगा?

नहीं, SSRI-श्रेणी की एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ, जब सही चिकित्सीय खुराक पर इस्तेमाल की जाती हैं, तो आपके व्यक्तित्व को नहीं बदलतीं और न ही आपको “ज़ोंबी” जैसा महसूस कराती हैं। कोई भी शुरुआती दुष्प्रभाव, जैसे हल्की मतली या नींद में बदलाव, आमतौर पर अस्थायी होते हैं और एक या दो हफ़्ते के भीतर ठीक हो जाते हैं। अवधि के संबंध में, ये दवाएँ आमतौर पर जीवन भर के लिए नहीं होतीं। एक सामान्य कोर्स में, पूरी तरह से ठीक होने और आपकी मनोदशा स्थिर होने के बाद इन्हें 9 से 12 महीने तक लेना शामिल होता है। इसके बाद, हम चिकित्सा मार्गदर्शन में धीरे-धीरे खुराक कम करने के लिए आपके साथ काम करते हैं।

क्या डिप्रेशन महसूस करना कमजोरी की निशानी है या परिवार के लिए शर्म की बात है?

बिल्कुल नहीं। डिप्रेशन एक मेडिकल कंडीशन है, ठीक वैसे ही जैसे हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज; यह व्यक्तिगत कमजोरी या इच्छाशक्ति की कमी की निशानी नहीं है। यह एक असली बीमारी है जिसे सही डॉक्टरी इलाज की ज़रूरत है। हालाँकि कुछ परिवारों में, खासकर भारत में, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक तरह का कलंक या शर्मिंदगी हो सकती है, बिना इलाज किया हुआ डिप्रेशन असल में आपके वर्टिगो से ठीक होने में बाधा डाल सकता है और आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को बहुत ज़्यादा प्रभावित कर सकता है। याद रखें, विशेषज्ञों के साथ गोपनीय वीडियो कंसल्टेशन उपलब्ध हैं, जिससे बिना किसी को बताए मदद लेना आसान हो जाता है।

चक्कर आने और मन उदास रहने पर मुझे किन चीज़ों से बचना चाहिए?

शराब या भांग (गांजा) से खुद अपना इलाज करने से बचें, क्योंकि ये आपके लक्षणों को और खराब कर सकते हैं और सही इलाज में बाधा डाल सकते हैं। कोई भी निर्धारित एंटीडिप्रेसेंट दवा अचानक बंद न करें; इससे अप्रिय विड्रॉल के लक्षण हो सकते हैं। जब तक आप “बेहतर महसूस न करें”, तब तक अपनी सभी रोज़मर्रा की गतिविधियाँ न छोड़ें, क्योंकि थोड़ा भी सक्रिय रहना ठीक होने में मदद करता है। डॉक्टरी इलाज के बजाय गुरुओं, ज्योतिषियों या बिना पुष्टि वाले व्हाट्सएप उपचारों पर भरोसा करना भी खतरनाक है। अंत में, यदि आप एक महिला हैं जिन्हें बच्चे के जन्म के बाद मूड में बदलाव आ रहे हैं और साथ में चक्कर भी आ रहे हैं, तो कृपया तुरंत डॉक्टर से मिलें।


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  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.