जब आपको अचानक चक्कर आने लगें और साथ में थायराइड की दिक्कत भी हो, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर समस्या कहाँ से आ रही है। यह लगातार सिर घूमना या अस्थिरता आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, काम पर ध्यान लगाने और यहाँ तक कि रात की नींद भी खराब कर सकता है। क्लिनिक में ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि उन्हें थायराइड चक्कर आने की समस्या है और वे बहुत परेशान रहते हैं।
कई बार थायराइड की समस्याएँ सीधे तौर पर चक्कर का कारण बन सकती हैं या उन्हें और बढ़ा सकती हैं, जिससे सही इलाज की ज़रूरत पड़ती है।
अभी क्या करें
- घर पर राहत: अगर आपको अचानक चक्कर आने लगें, तो तुरंत बैठ जाएँ या लेट जाएँ। अपनी आँखें बंद करें और गहरी साँस लें। तेज़ी से उठने या चलने की कोशिश न करें, इससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
- डॉक्टर को दिखाएं: यदि आपको थायराइड की समस्या है और चक्कर लगातार आ रहे हैं, या उनके साथ घबराहट, दिल की धड़कन तेज़ होना, या बहुत ज़्यादा थकान जैसे लक्षण हैं, तो जल्द ही अपने डॉक्टर से मिलें।
- तुरंत जाएं: अगर चक्कर के साथ तेज़ बुखार, भ्रम, सीने में दर्द, साँस लेने में दिक्कत, या शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी महसूस हो, तो बिना देर किए तुरंत इमरजेंसी में जाएँ।
तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?
थायराइड की समस्या के साथ चक्कर आना कभी-कभी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत डॉक्टरी मदद की ज़रूरत होती है। इन लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:
- अनियमित या तेज़ दिल की धड़कन के साथ चक्कर: यदि आपको थायराइड की समस्या है और चक्कर के साथ दिल की धड़कन बहुत तेज़ या अनियमित महसूस हो रही है, तो यह ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ का संकेत हो सकता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- तेज़ बुखार, बेचैनी और भ्रम: अगर चक्कर के साथ अचानक तेज़ बुखार, बहुत ज़्यादा बेचैनी, भ्रम की स्थिति या दिल की धड़कन का बहुत तेज़ होना महसूस हो, तो यह ‘थायराइड स्टॉर्म’ का लक्षण हो सकता है, जो एक जानलेवा स्थिति है।
- अत्यधिक ठंड लगना, धीमी धड़कन और बेहोशी: यदि आपको थायराइड की कमी है और चक्कर के साथ शरीर बहुत ठंडा पड़ रहा है, दिल की धड़कन बहुत धीमी है, और आप बेहोशी महसूस कर रहे हैं, तो यह ‘मिक्सोएडेमा कोमा’ का संकेत हो सकता है, जिसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।
- अचानक दृष्टि में बदलाव: अगर आपको ‘थायराइड आई डिजीज’ है और चक्कर के साथ अचानक आँखों की रोशनी में बदलाव या दोहरी दृष्टि महसूस हो, तो यह आँखों की नस पर दबाव का संकेत हो सकता है, जिससे दृष्टि को नुकसान पहुँच सकता है।
- तेज़ सिरदर्द और गर्दन में अकड़न: चक्कर के साथ अगर अचानक तेज़ सिरदर्द हो, गर्दन अकड़ जाए, या चलने-फिरने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो, तो यह दिमाग से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
थायराइड चक्कर आने के लक्षण
थायराइड की समस्याएँ शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती हैं, और चक्कर आना या अस्थिरता उनमें से एक आम लक्षण है। थायराइड हार्मोन का असंतुलन आपके शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बिगाड़ देता है, जिससे आपको अलग-अलग तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं।
- हल्कापन या सिर घूमना: हाइपरथायरायडिज्म (ज़्यादा सक्रिय थायराइड) में आपको अक्सर हल्कापन या सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है, जैसे आप कभी भी गिर सकते हैं। यह शरीर में एड्रेनेर्जिक ओवरएक्टिविटी के कारण होता है।
- कंपकंपी और घबराहट: थायराइड के ज़्यादा सक्रिय होने पर हाथ-पैरों में हल्की कंपकंपी और अंदरूनी घबराहट महसूस हो सकती है, जिससे चक्कर आने का एहसास और बढ़ जाता है। यह थायराइड हार्मोन के अधिक उत्पादन का संकेत है।
- दिल की धड़कन तेज़ होना: हाइपरथायरायडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से ज़्यादा तेज़ हो सकती है, जिसे ‘पल्पिटेशन’ कहते हैं, और यह चक्कर आने की भावना को बढ़ा सकता है। खासकर बुज़ुर्गों में ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ का खतरा भी होता है।
- गर्मी बर्दाश्त न होना और वज़न कम होना: अगर आपको गर्मी ज़्यादा लगती है और बिना किसी कारण के वज़न कम हो रहा है, तो यह हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण हो सकते हैं, जो चक्कर आने के साथ दिख सकते हैं। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म के तेज़ होने का संकेत है।
- सुस्ती और धीमापन: हाइपोथायरायडिज्म (कम सक्रिय थायराइड) में आपको सुस्त, धुंधला और धीमा महसूस हो सकता है, जैसे दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा। यह शरीर की मेटाबॉलिक दर कम होने के कारण होता है।
- ठंड बर्दाश्त न होना और वज़न बढ़ना: थायराइड के कम सक्रिय होने पर आपको ठंड ज़्यादा लग सकती है और वज़न बढ़ने लगता है, भले ही आप ज़्यादा न खा रहे हों। यह भी चक्कर आने के साथ दिख सकता है।
- कब्ज़ और सूखी त्वचा: हाइपोथायरायडिज्म के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज़ की शिकायत रहती है, और त्वचा भी सूखी व खुरदुरी हो जाती है। ये लक्षण भी चक्कर आने के साथ जुड़े हो सकते हैं।
- टखने के रिफ्लेक्स का धीमा होना: कुछ मामलों में, हाइपोथायरायडिज्म के कारण टखने के रिफ्लेक्स धीमे हो सकते हैं, जो न्यूरोलॉजिकल प्रभाव का संकेत है।
थायराइड चक्कर आने के कारण
थायराइड की समस्याएँ कई कारणों से हो सकती हैं, और ये कारण सीधे या परोक्ष रूप से चक्कर आने की समस्या में योगदान कर सकते हैं। थायराइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ना ही इन लक्षणों की जड़ है।
- ग्रेव्स रोग: यह हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है, जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से थायराइड ग्रंथि को ज़्यादा हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है। नतीजतन, दिल की धड़कन तेज़ होना, घबराहट और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखते हैं।
- टॉक्सिक मल्टीनोड्यूलर गोइटर / टॉक्सिक एडेनोमा: कुछ लोगों में थायराइड ग्रंथि पर एक या ज़्यादा गांठें (नोड्यूल) बन जाती हैं जो ज़रूरत से ज़्यादा थायराइड हार्मोन बनाती हैं। यह स्थिति भी हाइपरथायरायडिज्म और उससे जुड़े चक्कर आने की वजह बन सकती है।
- हाशिमोटो थायराइडाइटिस: यह हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम ऑटोइम्यून कारण है, जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड ग्रंथि पर हमला करती है और उसे नुकसान पहुँचाती है, जिससे हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। इससे सुस्ती, धीमापन और अस्थिरता महसूस हो सकती है।
- प्रसवोत्तर थायराइडाइटिस: कुछ महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद थायराइड की समस्या हो जाती है, जिसमें पहले हाइपरथायरायडिज्म और फिर हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण दिख सकते हैं। यह स्थिति भी चक्कर आने का कारण बन सकती है।
- एमियोडारोन-प्रेरित थायराइड डिसफंक्शन: एमियोडारोन एक दिल की दवा है जो थायराइड की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है, जिससे हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म दोनों हो सकते हैं।
- आयोडीन कंट्रास्ट एक्सपोजर: कुछ मेडिकल टेस्ट में इस्तेमाल होने वाला आयोडीन कंट्रास्ट भी थायराइड हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे चक्कर आने जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
- थायरोटॉक्सिक पीरियोडिक पैरालिसिस: यह एक दुर्लभ स्थिति है जो हाइपरथायरायडिज्म से जुड़ी है, जिसमें मांसपेशियों में अचानक कमज़ोरी आ जाती है, जिससे गिरने का खतरा और चक्कर आने का एहसास बढ़ जाता है।
- हाशिमोटो एन्सेफैलोपैथी: यह एक बहुत ही दुर्लभ ऑटोइम्यून स्थिति है जो हाशिमोटो थायराइडाइटिस से जुड़ी है, जिसमें यह दिमाग को प्रभावित करता है और चक्कर, चलने में दिक्कत (अटैक्सिया) और संज्ञानात्मक बदलाव हो सकते हैं।
जांच और निदान
जब आप थायराइड चक्कर आने की शिकायत लेकर मेरे पास आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछता हूँ। इसमें आपके लक्षण कब से हैं, कितनी बार आते हैं, और उनके साथ और क्या-क्या महसूस होता है, यह सब शामिल होता है। इसके बाद, मैं कुछ ज़रूरी जांचों की सलाह देता हूँ ताकि समस्या की जड़ तक पहुँचा जा सके।
यदि ऑटोइम्यून थायराइडाइटिस का संदेह होता है, तो एंटी-टीपीओ एंटीबॉडी की जांच भी की जाती है।
चूंकि चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए हम यह भी देखते हैं कि क्या कोई अन्य समस्या तो नहीं है। दिल की धड़कन की अनियमितता की जांच के लिए ECG किया जा सकता है, खासकर यदि आपको हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण हों। यदि चक्कर आने में कान के संतुलन प्रणाली का योगदान लग रहा है, तो ऑडियोग्राम (सुनने की जांच) और VNG जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं।
ये टेस्ट यह पता लगाने में मदद करते हैं कि क्या आपके अंदरूनी कान में कोई समस्या है जो चक्कर का कारण बन रही है। दुर्लभ मामलों में, यदि दिमाग से जुड़ी कोई समस्या का संदेह हो, तो MRI ब्रेन, CSF (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) और EEG की भी ज़रूरत पड़ सकती है। यदि थायराइड ग्रंथि में गांठ का संदेह हो, तो थायराइड अल्ट्रासाउंड और FNAC (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) की सलाह दी जा सकती है। इन सभी जांचों के बाद ही हम एक सटीक निदान पर पहुँच पाते हैं और सही इलाज शुरू कर सकते हैं।
इलाज के विकल्प
थायराइड से जुड़े चक्कर आने का इलाज मुख्य रूप से थायराइड की मूल समस्या को ठीक करने पर केंद्रित होता है। जब थायराइड हार्मोन का स्तर सामान्य हो जाता है, तो चक्कर आने की समस्या में भी काफी आराम मिल सकता है।
डॉक्टर का इलाज
अगर आपका थायराइड ज़्यादा सक्रिय है (हाइपरथायरायडिज्म), तो आपके डॉक्टर एंटी-थायराइड दवाएं दे सकते हैं जो हार्मोन के उत्पादन को कम करती हैं। कुछ मामलों में, रेडियोआयोडिन थेरेपी या थायराइड ग्रंथि को हटाने के लिए सर्जरी की भी सलाह दी जा सकती है। यदि थायराइड कम सक्रिय है (हाइपोथायरायडिज्म), तो आपको थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा दी जाती है, जिसे आपको नियमित रूप से लेना होता है।
यदि थायराइड के कारण दिल की धड़कन अनियमित हो रही है, तो उस अनियमित धड़कन को नियंत्रित करने के लिए भी दवा दी जाती है। दुर्लभ मामलों में, जैसे हाशिमोटो एन्सेफैलोपैथी में, कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा देकर देखा जा सकता है।
सर्जरी कब?
थायराइड से जुड़े चक्कर आने के लिए सीधे तौर पर सर्जरी की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है। सर्जरी आमतौर पर तब की जाती है जब थायराइड की समस्या खुद बहुत गंभीर हो। उदाहरण के लिए, यदि हाइपरथायरायडिज्म दवाओं या रेडियोआयोडिन थेरेपी से नियंत्रित नहीं हो रहा है, या यदि थायराइड ग्रंथि में कैंसर का संदेह हो, तो थायराइड ग्रंथि को हटाने के लिए थायराइडेक्टॉमी सर्जरी की जा सकती है।
यदि थायराइड में कोई गांठ है जो बड़ी हो रही है या कैंसरस है, तो भी सर्जरी एक विकल्प हो सकता है।
घर पर क्या करें, क्या न करें?
थायराइड की समस्या और चक्कर आने से निपटने के लिए घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। सही देखभाल से आप अपने लक्षणों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं।
क्या करें
ऐसा करने से दवा शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होती है। * एक ही ब्रांड की दवा लें: जहाँ तक संभव हो, एक ही ब्रांड की थायराइड की दवा का उपयोग करें। ब्रांड बदलने से हार्मोन के स्तर में थोड़ा बदलाव आ सकता है, इसलिए यदि बदलना ज़रूरी हो तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।
- नियमित TSH जांच कराएं: अपने थायराइड हार्मोन के स्तर की वार्षिक TSH जांच ज़रूर कराएं। यदि खुराक में बदलाव किया गया है, तो डॉक्टर के निर्देशानुसार ज़्यादा बार जांच कराएं।
क्या न करें
- दवा की खुराक खुद न बदलें: अपनी थायराइड की दवा की खुराक को खुद से कम या ज़्यादा करने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे आपके हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
- अन्य दवाएं अचानक न रोकें: यदि आपको थायराइड की समस्या के साथ माइग्रेन या दिल से जुड़ी कोई दवा चल रही है, तो उसे अपने डॉक्टर की सलाह के बिना अचानक न रोकें। इससे आपकी स्थिति बिगड़ सकती है।
- अज्ञात हर्बल उत्पादों का उपयोग न करें: सड़क किनारे या ऑनलाइन मिलने वाले “थायराइड + एनर्जी” जैसे हर्बल उत्पादों से बचें। इनमें अज्ञात सामग्री या हार्मोन की गलत खुराक हो सकती है जो हानिकारक हो सकती है।
- चक्कर आने पर तुरंत न उठें: यदि आपको चक्कर आ रहे हैं, तो तुरंत खड़े होने या तेज़ी से चलने की कोशिश न करें। इससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।
बचाव
थायराइड से जुड़े चक्कर आने की समस्या से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना लोगों के लिए खास तौर पर मददगार हो सकता है। यहाँ के वातावरण और जीवनशैली को देखते हुए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं।
- पानी की स्वच्छता: मानसून के दौरान पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए उबला हुआ या फ़िल्टर किया हुआ पानी पिएँ। शरीर को स्वस्थ रखने से थायराइड की कार्यप्रणाली भी बेहतर रहती है।
- संतुलित आहार: अपने आहार में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें और संतुलित भोजन लें जिसमें सभी ज़रूरी पोषक तत्व हों। यह थायराइड ग्रंथि को सही ढंग से काम करने में मदद करता है।
- नियमित व्यायाम: नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें, जैसे सुबह की सैर। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक रखता है और तनाव को कम करता है, जिससे थायराइड के लक्षणों और चक्कर आने की समस्या में आराम मिल सकता है।
- तनाव प्रबंधन: जीवन की भागदौड़ के बीच तनाव को मैनेज करना सीखें। योग, ध्यान या अपनी पसंद की कोई गतिविधि करें। तनाव थायराइड हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
थायराइड से जुड़े चक्कर के लिए क्या कोई घरेलू उपाय या सप्लीमेंट्स हैं जिनसे मुझे बचना चाहिए?
हाँ, सावधानी बरतना ज़रूरी है। सबसे पहले, अपनी थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट दवा की खुराक खुद से बदलने की कोशिश न करें, या चक्कर जैसे अस्पष्ट लक्षणों को ठीक करने की उम्मीद में बताई गई खुराक से ज़्यादा न लें। इससे थायराइड ज़्यादा सक्रिय हो सकता है, जिसके अपने जोखिम होते हैं। दूसरा, “थायराइड + एनर्जी” वाले सप्लीमेंट्स से बहुत सावधान रहें, खासकर जो सड़क किनारे या ऑनलाइन बिना किसी सही डॉक्टरी सलाह के बेचे जाते हैं। इनमें अज्ञात सामग्री या हार्मोन की गलत खुराक हो सकती है, जो हानिकारक हो सकते हैं और आपकी स्थिति को खराब कर सकते हैं या आपकी बताई गई दवाओं के साथ खतरनाक तरीके से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। किसी भी सप्लीमेंट के बारे में हमेशा पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
चक्कर आने की शिकायत पर मेरे डॉक्टर मेरी थायराइड की जांच क्यों करते हैं?
चक्कर आना एक आम लक्षण है जिसके कई कारण हो सकते हैं, और थायराइड की समस्याओं पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। थायराइड का ज़्यादा सक्रिय होना (हाइपरथायरायडिज्म) और कम सक्रिय होना (हाइपोथायरायडिज्म) दोनों ही अस्थिरता या हल्केपन का एहसास करा सकते हैं। हाइपरथायरायडिज्म से धड़कनें तेज़ होना और घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं, जबकि हाइपोथायरायडिज्म आपकी सोचने की गति को धीमा कर सकता है और आपको सुस्त महसूस करा सकता है। आपकी थायराइड की कार्यप्रणाली की जांच एक साधारण रक्त परीक्षण है जो हमें महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है, जिससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि क्या आपका थायराइड आपके चक्कर आने का कारण है, उसमें योगदान दे रहा है, या बस उसके साथ मौजूद है। यह आपके लक्षणों को पूरी तरह से समझने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
थायराइड की समस्याएँ मुझे चक्कर या अस्थिर महसूस कैसे करा सकती हैं?
एक ज़्यादा सक्रिय थायराइड, या हाइपरथायरायडिज्म, कुछ हार्मोन के अधिक होने के कारण आपको चक्कर महसूस करा सकता है। इससे आपका शरीर “ओवर-रेव्ड” महसूस कर सकता है, जिससे कंपकंपी, तेज़ दिल की धड़कन, घबराहट और कभी-कभी एट्रियल फिब्रिलेशन नामक अनियमित दिल की धड़कन जैसे लक्षण हो सकते हैं, ये सभी हल्केपन में योगदान कर सकते हैं। दूसरी ओर, एक कम सक्रिय थायराइड, या हाइपोथायरायडिज्म, आपके शरीर की प्रक्रियाओं को धीमा कर देता है। इसके परिणामस्वरूप सुस्ती, धुंधलापन और अस्थिरता का सामान्य एहसास हो सकता है। दुर्लभ मामलों में, गंभीर हाइपोथायरायडिज्म आपके मस्तिष्क या नसों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे संतुलन की समस्याएँ हो सकती हैं।
क्या थायराइड की समस्याएँ सीधे मेरे भीतरी कान को प्रभावित कर सकती हैं?
हाँ, कभी-कभी। हालांकि थायराइड की समस्याएँ आमतौर पर ज़्यादातर मामलों में भीतरी कान को सीधा नुकसान नहीं पहुँचातीं, लेकिन एक ज्ञात संबंध है। उदाहरण के लिए, ऑटोइम्यून थायराइड की स्थितियाँ, जहाँ आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से आपके थायराइड पर हमला करती है, कभी-कभी अन्य ऑटोइम्यून स्थितियों के साथ मौजूद हो सकती हैं जो भीतरी कान को प्रभावित करती हैं। इसका मतलब है कि यदि आपको ऑटोइम्यून थायराइड की स्थिति है, तो आपको मेनियर रोग जैसे भीतरी कान के विकारों का भी अधिक खतरा हो सकता है, जिससे चक्कर, सुनने में कमी और कानों में बजने की आवाज़ होती है। ऐसी स्थितियों में, हम आपके लक्षणों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए दोनों स्थितियों का अलग-अलग इलाज करते हैं।
मेरे थायराइड का स्तर थोड़ा सा ही बढ़ा या कम है। क्या यह मेरे लगातार चक्कर आने का कारण बनने के लिए काफी है?
यह एक आम धारणा है कि थायराइड के स्तर में थोड़ा सा बदलाव, जिसे अक्सर ‘सबक्लिनिकल’ बदलाव कहा जाता है, लगातार चक्कर आने की पूरी वजह हो सकता है। हालांकि, कई मामलों में, ये छोटे बदलाव अपने आप चक्कर को पूरी तरह से ठीक नहीं करते हैं। हम हमेशा थायराइड के असंतुलन को ठीक करते हैं, लेकिन अगर आपके थायराइड का स्तर स्थिर होने के बाद भी चक्कर आते रहते हैं, तो अन्य कारणों की तलाश करना महत्वपूर्ण है। हम तब भी आपके ‘वेस्टिबुलर सिस्टम’ – आपके अंदरूनी कान और दिमाग के उन रास्तों की पूरी जांच की सलाह देंगे जो संतुलन को नियंत्रित करते हैं – ताकि आपके लगातार चक्कर आने का असली कारण पता चल सके।
मुझे हाइपोथायरायडिज्म (कम थायराइड) है और चक्कर भी आते हैं। क्या मेरे थायराइड की समस्या ही हमेशा इसका कारण है?
ज़रूरी नहीं है। लोगों में, खासकर महिलाओं में, हाइपोथायरायडिज्म और चक्कर दोनों का एक साथ होना बहुत आम है। हालांकि, कम सक्रिय थायराइड अस्थिरता या धुंधलेपन की भावना में योगदान कर सकता है, लेकिन यह हमेशा चक्कर आने का एकमात्र कारण नहीं होता। कई अन्य स्थितियाँ भी चक्कर का कारण बन सकती हैं, जिनमें अंदरूनी कान की समस्याएँ शामिल हैं। हम अक्सर इन समस्याओं को एक साथ देखते हैं। सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी थायराइड हार्मोन के स्तर को दवा से अच्छी तरह नियंत्रित रखें। अगर आपके थायराइड का स्तर स्थिर होने के बाद भी चक्कर आते रहते हैं, तो हमें अन्य संभावित कारणों की जांच करने की आवश्यकता होगी, जिसमें एक पूरी ‘वेस्टिबुलर वर्कअप’ भी शामिल है।
इस विषय पर अन्य गाइड
- कारण और लक्षण
- कब डॉक्टर को दिखाएं
- घर पर देखभाल
- डॉक्टर से कैसे मिलें
- बचाव के उपाय
चक्कर, वर्टिगो, या कान-नाक-गले से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए Dr. Prateek Porwal से सलाह लें। अभी WhatsApp करें या क्लिनिक पर अपॉइंटमेंट बुक करें।
- Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
- Dr. Prateek Porwal — ENT & Vertigo Specialist
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
