अगर शांति में बैठते ही कान में घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ सुनाई देती है, तो यह काफी परेशान करने वाली स्थिति हो सकती है। दरअसल, यह आवाज़ आपकी नींद, एकाग्रता और रोज़मर्रा के कामों को प्रभावित कर सकती है। क्लिनिक में ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि रात को सोने के समय यह आवाज़ और तेज़ महसूस होती है।

कई बार लोग इसे गर्दन की समस्या से जोड़कर देखते हैं, जिसे डॉक्टरी भाषा में Cervical vertigo कहा जाता है, पर इसकी असली वजह कुछ और भी हो सकती है।

अभी क्या करें

  • घर पर राहत: अगर आपको गर्दन में दर्द के साथ हल्का चक्कर महसूस हो रहा है, तो गर्दन पर गरम या ठंडा सेक लगा सकते हैं। एक साफ़ कपड़े को गरम पानी में भिगोकर निचोड़ लें और गर्दन पर रखें। इससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। काम करते समय हर घंटे में थोड़ी देर के लिए अपनी गर्दन को धीरे-धीरे घुमाकर आराम दें।
  • डॉक्टर को दिखाएं: अगर आपके चक्कर लगातार आ रहे हैं, गर्दन का दर्द बढ़ रहा है, या आपको ऐसा लग रहा है कि आपका संतुलन बिगड़ रहा है, तो जल्द से जल्द ENT specialist से मिलें। खासकर अगर ये लक्षण 2-3 दिन से ज़्यादा रहें, तो एक बार जांच करवाना ज़रूरी है।
  • तुरंत जाएं: अगर गर्दन के दर्द और चक्कर के साथ शरीर में कमज़ोरी, सुन्नपन, पेशाब या शौच पर कंट्रोल न रहना, या सिर घुमाने पर धुंधला या दोहरा दिखना जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। ये गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ये संकेत हैं कि आपको तुरंत मेडिकल हेल्प की ज़रूरत है:

  • गर्दन में दर्द के साथ नई कमज़ोरी, सुन्नपन, या पेशाब/शौच में बदलाव: यह रीढ़ की हड्डी पर दबाव का संकेत हो सकता है, जिसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।
  • सिर घुमाने पर चक्कर के साथ धुंधला या दोहरा दिखना: यह गर्दन की रक्त वाहिकाओं में समस्या या ‘बो हंटर सिंड्रोम’ का संकेत हो सकता है। यह सिंड्रोम दिमाग तक खून पहुंचने में रुकावट पैदा कर सकता है।
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीज़ों में नए गर्दन का दर्द और चक्कर: यह एटलेंटोएक्सियल सबलक्सेशन का संकेत हो सकता है, जिसमें गर्दन की हड्डियों के बीच अस्थिरता आ जाती है और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंच सकता है।
  • हाल ही में गर्दन की मैनिपुलेशन के बाद गंभीर सिरदर्द, गर्दन का दर्द, या शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी: यह वर्टेब्रल आर्टरी डिसेक्शन का संकेत हो सकता है, जो एक गंभीर रक्त वाहिका की चोट है।
  • किसी चोट के बाद लगातार गर्दन का दर्द और चक्कर: यह गर्दन में अस्थिरता या रक्त वाहिकाओं में चोट का संकेत हो सकता है, जिसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।

गर्दन से चक्कर के लक्षण

गर्दन से जुड़े चक्कर में कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं, जो अक्सर मरीज़ को बहुत परेशान करते हैं। मेरे अनुभव में, मरीज़ अक्सर इन लक्षणों के साथ मेरे पास आते हैं:

  • गर्दन में लगातार दर्द के साथ हल्का सिर घूमना या अस्थिरता महसूस होना: यह सबसे आम शिकायत है, जिसमें मरीज़ को लगता है कि वह सीधा खड़ा नहीं हो पा रहा है या उसे हल्का-हल्का चक्कर आ रहा है।
  • सिर घुमाने पर चक्कर आना और आंखों के सामने अंधेरा छाना: कुछ खास स्थितियों में, जैसे ‘बो हंटर सिंड्रोम’ में, सिर को एक तरफ घुमाने पर रक्त वाहिका दबने से चक्कर और आंखों में बदलाव दिख सकता है।
  • चोट लगने के 3 महीने बाद भी लगातार चक्कर आना: ‘व्हिपलैश’ जैसी चोट के बाद, अगर लंबे समय तक चक्कर आते रहें, तो यह ‘PPPD’ (Persistent Postural-Perceptual Dizziness) का संकेत हो सकता है।
  • गर्दन के पिछले हिस्से में दर्द के साथ चक्कर: गर्दन के पिछले हिस्से में होने वाला सिरदर्द, जिसे Cervicogenic headache कहते हैं, कभी-कभी चक्कर के साथ भी जुड़ा हो सकता है।
  • चलते समय संतुलन बनाए रखने में दिक्कत: मरीज़ को ऐसा महसूस हो सकता है कि वह लड़खड़ा रहा है या उसे किसी चीज़ का सहारा लेना पड़ रहा है।
  • गर्दन हिलाने पर आवाज़ या कड़कड़ाहट महसूस होना: यह गर्दन के जोड़ों में घिसाव या मांसपेशियों में तनाव के कारण हो सकता है, जो कभी-कभी चक्कर को बढ़ा सकता है।

गर्दन से चक्कर किस कारण से होता है

गर्दन से चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं, पर अक्सर यह किसी और समस्या का लक्षण होता है जिसे लोग गर्दन से जोड़ लेते हैं। मेरे OPD में मैंने देखा है कि कई बार मरीज़ों को लगता है कि उनकी गर्दन की वजह से चक्कर आ रहे हैं, जबकि असली वजह कुछ और ही निकलती है।

  • बिना पहचाना BPPV और गर्दन का दर्द: यह सबसे आम कारण है जहाँ मरीज़ को BPPV होता है, जो कान के अंदर की पथरी हिलने से होता है, पर साथ में गर्दन में भी दर्द होता है। लोग अक्सर इसे गर्दन से जोड़ लेते हैं, जबकि BPPV का इलाज करने से चक्कर ठीक हो जाते हैं।
  • वेस्टिबुलर माइग्रेन के साथ गर्दन में अकड़न: माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द नहीं होता, इसमें चक्कर भी आ सकते हैं, जिसे वेस्टिबुलर माइग्रेन कहते हैं। ऐसे हमलों के दौरान गर्दन में अकड़न या दर्द होना आम बात है।
  • व्हिपलैश के बाद PPPD: गर्दन में चोट (जैसे व्हिपलैश) लगने के बाद कुछ मरीज़ों को लंबे समय तक चक्कर आते रहते हैं। चोट तो ठीक हो जाती है, पर दिमाग संतुलन को लेकर ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है, जिससे PPPD की समस्या हो जाती है।
  • बो हंटर सिंड्रोम: यह एक दुर्लभ स्थिति है जहाँ सिर को एक खास तरीके से घुमाने पर गर्दन में मौजूद एक रक्त वाहिका दब जाती है। इससे दिमाग को खून की सप्लाई कम हो जाती है और चक्कर आने लगते हैं।
  • एटलेंटोएक्सियल अस्थिरता: यह गर्दन की पहली दो हड्डियों के बीच की अस्थिरता है। यह रूमेटॉइड आर्थराइटिस, डाउन सिंड्रोम या किसी गंभीर चोट के बाद हो सकती है। इसमें रीढ़ की हड्डी या रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है, जिससे चक्कर और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिख सकते हैं।
  • Cervicogenic headache: यह सिरदर्द गर्दन से शुरू होता है और सिर के पिछले हिस्से तक फैलता है। कभी-कभी इसके साथ चक्कर या संतुलन में कमी भी महसूस हो सकती है।

जांच और निदान

जब आप क्लिनिक में गर्दन से चक्कर की शिकायत लेकर आते हैं, तो मेरा पहला काम होता है असली वजह का पता लगाना। मैं जानता हूँ कि आप परेशान होंगे, पर सही जांच के बिना सही इलाज मुमकिन नहीं है।

सबसे पहले, मैं आपसे आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछूँगा – कब से चक्कर आ रहे हैं, कैसे महसूस होते हैं, गर्दन में दर्द कब शुरू हुआ, और क्या कोई और लक्षण भी हैं। इसके बाद मैं एक पूरी वेस्टिबुलर बेडसाइड जांच करता हूँ। इसमें सिर को एक तरफ झुकाकर चक्कर की जांच शामिल है, जो BPPV जैसी आम समस्याओं का पता लगाने में मदद करती है।

मैं आपकी आंखों की गति, संतुलन और चाल की भी जांच करता हूँ।

ज़रूरत पड़ने पर, मैं कुछ खास टेस्ट भी करवाता हूँ, जैसे सुनने की जांच, VNG जो आंखों की गति को मापकर कान के संतुलन तंत्र की समस्या का पता लगाता है, और vHIT। अगर मुझे गर्दन की समस्या का शक होता है, तो मैं गर्दन की गति की सीमा, स्पूरलिंग टेस्ट और मांसपेशियों में दर्द की जांच करता हूँ। कुछ मामलों में, गर्दन का एक्स-रे या MRI cervical spine की ज़रूरत पड़ सकती है ताकि रीढ़ की हड्डी पर दबाव या अस्थिरता का पता चल सके।

‘बो हंटर सिंड्रोम’ के लिए, vertebral arteries की MRA या CT angiography की जा सकती है। यह सब इसलिए ताकि हम किसी भी गंभीर समस्या को नज़रअंदाज़ न करें और आपको सबसे सटीक इलाज मिल सके।

इलाज के विकल्प

गर्दन से जुड़े चक्कर का इलाज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि जांच में असली वजह क्या निकलती है। मेरा मकसद सिर्फ लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि जड़ तक पहुँचकर समस्या को ठीक करना है।

डॉक्टर का इलाज

अगर जांच में BPPV जैसी कोई समस्या निकलती है, जो अक्सर गर्दन के चक्कर जैसी दिखती है, तो हम कानों की पथरी को सही जगह वापस लाने की प्रक्रिया करते हैं। वेस्टिबुलर माइग्रेन के मामलों में, माइग्रेन को रोकने वाली दवाएं दी जाती हैं। यदि चक्कर का कारण व्हिपलैश के बाद PPPD है, तो SSRI-class antidepressant या SNRI-class antidepressant के साथ वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन और CBT का कॉम्बिनेशन बहुत प्रभावी होता है।

Cervicogenic headache के लिए फिजियोथेरेपी और कभी-कभी suboccipital nerve blocks भी दिए जा सकते हैं।

सर्जरी कब?

सर्जरी की ज़रूरत बहुत कम मामलों में पड़ती है, और वह भी तब जब कोई गंभीर यांत्रिक समस्या हो। उदाहरण के लिए, अगर ‘बो हंटर सिंड्रोम’ की पुष्टि हो जाती है और रक्त वाहिका पर दबाव बहुत ज़्यादा है, तो न्यूरोसर्जिकल डीकंप्रेशन पर विचार किया जा सकता है। इसी तरह, ‘एटलेंटोएक्सियल अस्थिरता’ के गंभीर मामलों में, जहाँ रीढ़ की हड्डी या रक्त वाहिकाओं पर खतरा हो, सर्जिकल स्टेबिलाइजेशन की ज़रूरत पड़ सकती है।

ज़्यादातर मामलों में, दवाइयों और फिजियोथेरेपी से ही आराम मिल जाता है।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

गर्दन से जुड़े चक्कर में घर पर कुछ बातों का ध्यान रखने से आपको काफी राहत मिल सकती है, पर कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिनसे आपको बचना चाहिए।

क्या करें

  • गर्दन के हल्के व्यायाम करें: अपने डॉक्टर की सलाह से गर्दन को धीरे-धीरे घुमाने वाले व्यायाम करें। इससे गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन आता है और तनाव कम होता है।
  • गरम या ठंडा सेक लगाएं: गर्दन पर गरम पानी की बोतल या आइस पैक लगाने से मांसपेशियों के दर्द और अकड़न में आराम मिल सकता है। 15-20 मिनट के लिए दिन में 2-3 बार ऐसा करें।
  • काम के दौरान मुद्रा का ध्यान रखें: अगर आप लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं या कोई ऐसा काम करते हैं जिसमें गर्दन झुकी रहती है, तो हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें और अपनी गर्दन को सीधा करें। सही posture बनाए रखने से गर्दन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।
  • पूरी वेस्टिबुलर जांच करवाएं: अगर आपको गर्दन के दर्द के साथ चक्कर आ रहे हैं, तो किसी भी ‘सर्वाइकल वर्टिगो’ के निदान को स्वीकार करने से पहले एक बार ENT specialist से पूरी वेस्टिबुलर जांच ज़रूर करवाएं। यह सुनिश्चित करेगा कि आप किसी और गंभीर समस्या को नज़रअंदाज़ नहीं कर रहे हैं।

क्या न करें

  • बिना ट्रेनिंग वाले व्यक्ति से तेज़ गर्दन की मैनिपुलेशन न करवाएं: तेज़ गर्दन की मैनिपुलेशन, खासकर बुज़ुर्गों या जिन्हें रक्त वाहिकाओं की समस्या है, उनके लिए खतरनाक हो सकती है। इससे गर्दन की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है।
  • ENT या न्यूरोलॉजी जांच के बिना कायरोप्रैक्टिक एडजस्टमेंट न करवाएं: गर्दन में किसी भी तरह का एडजस्टमेंट करवाने से पहले, यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि चक्कर का कारण गर्दन ही है और कोई और गंभीर समस्या नहीं है।
  • मायलोपैथी के लक्षणों (कमज़ोरी, पेशाब/शौच में बदलाव) को नज़रअंदाज़ न करें: ये रीढ़ की हड्डी पर दबाव के गंभीर संकेत हैं और इनमें तुरंत मेडिकल हेल्प की ज़रूरत होती है। इन्हें घर पर ठीक करने की कोशिश न करें।
  • सिर्फ सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के एक्स-रे को चक्कर का अंतिम कारण न मानें: एक्स-रे में स्पॉन्डिलोसिस दिखना आम है, खासकर 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में। यह ज़रूरी नहीं कि यही आपके चक्कर का कारण हो। असली वजह जानने के लिए पूरी जांच ज़रूरी है।

WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।

बचाव

अपनी कुछ खास बातें हैं जिनका ध्यान रखकर आप गर्दन से जुड़े चक्कर या इससे मिलती-जुलती समस्याओं से बच सकते हैं।

  • सही मुद्रा बनाए रखें: चाहे आप खेत में काम कर रहे हों, दुकान पर बैठे हों, या घर पर हों, अपनी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की कोशिश करें। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से बचें। हर घंटे में थोड़ी देर के लिए उठें और स्ट्रेच करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं: तेज़ गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी से भी चक्कर और कमज़ोरी महसूस हो सकती है।
  • नियमित व्यायाम: गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मज़बूत रखने के लिए हल्के व्यायाम करें। इससे मांसपेशियों का तनाव कम होगा और गर्दन से जुड़ी समस्याओं का खतरा घटेगा।
  • नियमित जांच करवाएं: अगर आपको गर्दन में दर्द या चक्कर की हल्की भी शिकायत है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। समय पर ENT specialist से जांच करवाने से किसी भी गंभीर समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्दन की समस्याओं से जुड़े चक्कर के क्या इलाज हैं?

गर्दन की समस्याओं से जुड़े चक्कर का इलाज पूरी तरह से उस असली वजह पर निर्भर करता है जिसका पता चलता है। अगर हमें कान के अंदर की कोई समस्या, जैसे BPPV मिलती है, तो खास तरह के रीपोजिशनिंग मैन्यूवर असरदार होते हैं। वेस्टिबुलर माइग्रेन से जुड़े चक्कर के लिए, माइग्रेन को रोकने वाली दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। अगर आपके चक्कर आने की वजह परसिस्टेंट पोस्टुरल-परसेप्चुअल डिज़ीनेस (PPPD) जैसी स्थिति है, तो कुछ खास एंटीडिप्रेसेंट दवाएं, संतुलन बनाने वाले व्यायाम और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी का मेल बहुत मददगार हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में, जब बो हंटर सिंड्रोम या एटलेंटोएक्सियल इनस्टेबिलिटी जैसी यांत्रिक समस्याएं पक्की हो जाती हैं, तो सर्जरी के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

क्या मेरे गर्दन के दर्द से सच में चक्कर आ सकते हैं?

हाँ, कुछ खास और अक्सर दुर्लभ स्थितियों में, गर्दन की समस्याओं से चक्कर आ सकते हैं। उदाहरण के लिए, ‘बो हंटर सिंड्रोम’ नामक एक स्थिति में गर्दन में एक रक्त वाहिका दब जाती है जब आप अपने सिर को एक खास तरीके से घुमाते हैं, जिससे चक्कर आते हैं। ‘एटलेंटोएक्सियल अस्थिरता’ (Atlantoaxial instability), जो ‘रूमेटॉइड आर्थराइटिस’ जैसी स्थितियों में या चोट लगने के बाद देखी जाती है, एक और वास्तविक कारण है। ‘व्हिपलैश’ (whiplash) चोट के बाद चक्कर आना आम है, लेकिन इसमें अक्सर एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक पहलू होता है। हालांकि, केवल गर्दन की मांसपेशियों या जोड़ों में संवेदी हानि के कारण होने वाले चक्कर क्लिनिकल अभ्यास में शायद ही कभी अकेला कारण होते हैं।

गर्दन में दर्द और चक्कर आने पर मुझे तुरंत डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

आपको तुरंत या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए, अगर आपके गर्दन के दर्द और चक्कर आने के साथ कुछ चेतावनी के लक्षण भी हों। इनमें नई कमजोरी, संवेदना में बदलाव (जैसे सुन्नपन या झुनझुनी), या पेशाब/शौच संबंधी समस्याएं शामिल हैं। अगर आपको सिर घुमाने पर धुंधला दिखाई दे या दोहरा दिखाई दे (डबल विजन), या अगर आपको रूमेटॉइड आर्थराइटिस है और आपको नया गर्दन का दर्द और चक्कर आने लगे, तो तुरंत जांच करवाना महत्वपूर्ण है। हाल ही में गर्दन की मैनिपुलेशन (जैसे मालिश या कोई थेरेपी) के बाद गंभीर सिरदर्द, गर्दन का दर्द, या नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण (जैसे शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन), या किसी चोट के बाद लगातार गर्दन का दर्द और चक्कर आना भी तुरंत देखभाल की मांग करते हैं।

क्या ग्रीवा स्पॉन्डिलोसिस से चक्कर आते हैं?

यह एक आम गलतफहमी है कि ग्रीवा स्पॉन्डिलोसिस, जो अक्सर एक्स-रे में देखा जाता है, सीधे तौर पर चक्कर आने की वजह बनता है। सच तो यह है कि ग्रीवा स्पॉन्डिलोसिस जैसे बदलाव 50 साल से ज़्यादा उम्र के लगभग सभी लोगों में पाए जाते हैं। किसी इमेजिंग स्कैन में इन बदलावों का मिलना अपने आप यह मतलब नहीं है कि वे आपके चक्कर आने का कारण हैं। चक्कर आना एक ऐसा लक्षण है जिसकी कई संभावित वजहें हो सकती हैं, और सिर्फ एक्स-रे में स्पॉन्डिलोसिस दिखना कारण का सीधा संबंध साबित नहीं करता। हमें पहले आपके चक्कर आने के दूसरे, ज़्यादा आम कारणों की तलाश करनी होगी।

क्या गर्दन की मैनिपुलेशन सुरक्षित है अगर मुझे चक्कर आते हैं?

तेज़ गर्दन की मैनिपुलेशन, खासकर ज़्यादा उम्र के लोगों में या जिन्हें पहले से रक्त वाहिकाओं की समस्या है, उसमें जोखिम हो सकता है। इससे गर्दन की वर्टेब्रल आर्टरी (धमनी) को नुकसान हो सकता है, जो दिमाग को खून पहुँचाती है। हम रूमेटॉइड आर्थराइटिस या डाउन सिंड्रोम जैसी बीमारियों वाले मरीज़ों में गर्दन की मैनिपुलेशन के खिलाफ भी कड़ी चेतावनी देते हैं, खासकर बिना पहले अस्थिरता की जाँच के लिए कुछ खास इमेजिंग टेस्ट किए। गर्दन की किसी भी तरह की मैनिपुलेशन पर विचार करने से पहले, अपने डॉक्टर से चक्कर आने के अपने किसी भी पिछले अनुभव के बारे में चर्चा करना ज़रूरी है।


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  • डॉक्टर से कैसे मिलें
  • बचाव के उपाय

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  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.