अगर आपको अचानक चक्कर आते हैं, हल्कापन महसूस होता है, या गर्दन घुमाते समय, शेविंग करते समय, या तंग कॉलर पहनने पर आप थोड़े समय के लिए बेहोश होकर गिर जाते हैं, तो यह काफी चिंताजनक हो सकता है। ऐसे अनुभव आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी, काम करने की क्षमता और यहां तक कि गाड़ी चलाने जैसी गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकते हैं। क्लिनिक में हरदोइ से ऐसे कई बुज़ुर्ग मरिज़ आते हैं जो बताते हैं कि ऐसे दौरों के बाद उन्हें गिरने का डर लगा रहता है।

डॉक्टरी भाषा में इसे Carotid sinus syncope कहते हैं, और यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ गर्दन की एक नस बाहरी दबाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है।

अभी क्या करें

  • घर पर राहत: अगर आपको गर्दन घुमाने या तंग कपड़े पहनने से चक्कर या हल्कापन महसूस होता है, तो तुरंत उस गतिविधि को रोक दें। तंग कॉलर या टाई पहनने से बचें। जब भी उठें, धीरे-धीरे उठें, खासकर अगर आप बैठे या लेटे हुए हों।
  • डॉक्टर को दिखाएं: अगर आपको बार-बार बिना किसी स्पष्ट कारण के चक्कर आते हैं, या अगर आप बिना किसी चोट के बार-बार गिरते हैं, तो जल्द से जल्द ENT specialist से मिलें। यह Carotid sinus syncope का संकेत हो सकता है।
  • तुरंत जाएं: अगर आपको बेहोशी के दौरान चोट लग जाती है, जैसे फ्रैक्चर या सिर में चोट, या अगर आपको शारीरिक गतिविधि के दौरान बेहोशी आती है, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल जाएं। यह किसी गंभीर अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है।

Carotid sinus syncope के कारण

देखिये, Carotid sinus syncope में होता क्या है कि आपकी गर्दन में, गले के पास एक खास जगह होती है जिसे carotid sinus कहते हैं। यह जगह आपके शरीर के ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को कंट्रोल करने में मदद करती है। कुछ लोगों में, खासकर बुज़ुर्गों में, यह carotid sinus बहुत ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है।

जब इस पर कोई यांत्रिक दबाव पड़ता है, जैसे गर्दन घुमाना, शेविंग करना, या तंग कॉलर पहनना, तो यह ज़्यादा प्रतिक्रिया करता है।

इस ज़्यादा प्रतिक्रिया के कारण आपका दिल या तो बहुत धीरे धड़कने लगता है (जिसे cardioinhibitory type कहते हैं), या आपका ब्लडप्रेशर अचानक बहुत कम हो जाता है (जिसे vasodepressor type कहते हैं), या कभी-कभी दोनों ही हो सकते हैं (जिसे mixed type कहते हैं)। इन सभी स्थितियों में, दिमाग तक खून का बहाव अस्थायी रूप से कम हो जाता है, जिससे आपको चक्कर आते हैं, हल्कापन महसूस होता है, या आप थोड़े समय के लिए बेहोश भी हो सकते हैं। यह एक तरह का रिफ्लेक्स है जो शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया से ज़्यादा मज़बूत होता है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

  • चोट के साथ बेहोशी: अगर आपको बेहोशी के दौरान चोट लग जाती है, जैसे फ्रैक्चर या सिर में चोट, खासकर अगर आप बुज़ुर्ग हैं, तो यह तुरंत जांच का विषय है।
  • बार-बार बिना कारण गिरना: अगर आपको बार-बार बिना किसी स्पष्ट कारण के गिरना होता है, खासकर अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी जैसी समस्याएँ हैं, तो यह Carotid sinus syncope का संकेत हो सकता है।
  • शारीरिक गतिविधि के दौरान बेहोशी: अगर आप कोई शारीरिक काम करते समय बेहोश हो जाते हैं, तो यह Carotid sinus syncope नहीं है और यह दिल की किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
  • जांच से पहले गर्दन में असामान्य आवाज़: अगर डॉक्टर को आपकी गर्दन की धमनियों में कोई असामान्य आवाज़ सुनाई देती है, तो Carotid sinus massage से पहले सावधानी बरतनी ज़रूरी है।
  • हाल ही में स्ट्रोक या TIA: अगर आपको पिछले 3 महीनों में स्ट्रोक या मिनी-स्ट्रोक (TIA) हुआ है, तो Carotid sinus massage नहीं किया जाना चाहिए।
  • वेंट्रिकुलर अतालता का इतिहास: अगर आपको दिल की धड़कन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या का इतिहास है, तो Carotid sinus massage से बचना चाहिए।

Carotid sinus syncope के लक्षण

Carotid sinus syncope के लक्षण अक्सर अचानक और थोड़े समय के लिए होते हैं, लेकिन ये बहुत परेशान करने वाले हो सकते हैं।

  • गर्दन घुमाने, शेविंग करने या तंग कॉलर पहनने पर अचानक हल्कापन या बेहोशी: यह इस स्थिति का सबसे खास लक्षण है, जहाँ गर्दन पर दबाव पड़ने से ही समस्या शुरू होती है।
  • कुछ सेकंड तक बेहोशी: बेहोशी का दौरा आमतौर पर बहुत कम समय के लिए होता है, अक्सर कुछ सेकंड से ज़्यादा नहीं।
  • बुज़ुर्गों में बार-बार बिना कारण गिरना: कई बार बुज़ुर्ग मरीज़ों को बेहोशी का एहसास नहीं होता, बस वे अचानक गिर जाते हैं, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
  • गिरने से चोट लगना: अगर गिरने के कारण फ्रैक्चर या सिर में चोट जैसी गंभीर चोटें आती हैं, तो यह एक चेतावनी का संकेत है।
  • चक्कर आना या सिर घूमना: बेहोशी से पहले या उसके दौरान आपको तेज़ चक्कर या सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है।
  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाना: कुछ मरीज़ों को बेहोश होने से ठीक पहले आंखों के सामने अंधेरा छा जाने का अनुभव होता है।
  • कमज़ोरी या थकावट महसूस होना: बेहोशी के बाद कुछ समय के लिए शरीर में कमज़ोरी या बहुत ज़्यादा थकावट महसूस हो सकती है।

Carotid sinus syncope के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है।

  • Carotid sinus syndrome – cardioinhibitory: यह सबसे आम प्रकार है, जहाँ गर्दन पर दबाव पड़ने से दिल की धड़कन बहुत धीमी हो जाती है, कभी-कभी तो 3 सेकंड से ज़्यादा समय के लिए रुक भी जाती है।
  • Carotid sinus syndrome – vasodepressor: इस प्रकार में दिल की धड़कन में ज़्यादा बदलाव के बिना ब्लड प्रेशर अचानक 50 mmHg से ज़्यादा गिर जाता है, जिससे दिमाग में खून की कमी हो जाती है।
  • Carotid sinus syndrome – mixed: कुछ मरीज़ों में धीमी दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में गिरावट दोनों का अनुभव होता है, जो इन दोनों प्रकारों का मिश्रण है।
  • Vertebrobasilar insufficiency (bow hunter’s): यह एक अलग स्थिति है जहाँ गर्दन घुमाने पर रीढ़ की हड्डी से दिमाग तक खून ले जाने वाली धमनियों पर दबाव पड़ता है, जिससे चक्कर और धुंधला दिखना होता है, लेकिन आमतौर पर बेहोशी नहीं होती।
  • BPPV: कभी-कभी Carotid sinus syncope को BPPV समझ लिया जाता है, जहाँ कान के अंदर के छोटे क्रिस्टल अपनी जगह से हिल जाते हैं और सिर की खास पोजीशन पर तेज़ चक्कर आते हैं।
  • Shaver’s syncope, micturition syncope: ये अन्य प्रकार के रिफ्लेक्स सिंकोप हैं जो शेविंग या पेशाब करते समय शरीर की स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली की प्रतिक्रिया के कारण होते हैं।

जांच और निदान

जब आप क्लिनिक में Carotid sinus syncope जैसे लक्षणों के साथ आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपसे आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछता हूँ। मैं यह जानने की कोशिश करता हूँ कि आपको कब और कैसे चक्कर या बेहोशी आती है, क्या कोई खास गतिविधि इसे ट्रिगर करती है, और क्या आपको कोई और स्वास्थ्य समस्या है।

इसके बाद, मैं आपकी गर्दन की धमनियों की जांच करता हूँ और कुछ खास टेस्ट करवाता हूँ। सबसे महत्वपूर्ण टेस्टों में से एक है Carotid sinus massage, जिसे मॉनिटर की गई सेटिंग में किया जाता है। इस टेस्ट से पहले, हम Carotid duplex ultrasound करते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गर्दन की धमनियों में कोई रुकावट नहीं है, जिससे मालिश के दौरान स्ट्रोक का खतरा न हो।

मालिश के दौरान, हम लगातार ECG और ब्लड प्रेशर की निगरानी करते हैं। अगर मालिश से दिल की धड़कन 3 सेकंड से ज़्यादा रुक जाती है या ब्लड प्रेशर 50 mmHg से ज़्यादा गिर जाता है और आपके लक्षण फिर से आते हैं, तो यह Carotid sinus syndrome का संकेत हो सकता है।

अन्य जांचों में Tilt-table test भी शामिल हो सकता है, जो शरीर की स्थिति बदलने पर ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन की प्रतिक्रिया को मापता है। 12-lead ECG और Holter monitor दिल की धड़कन की समस्याओं को जानने के लिए किए जाते हैं। Echocardiogram दिल की संरचनात्मक समस्याओं को देखने के लिए किया जा सकता है।

अगर हमें vertebrobasilar insufficiency का संदेह होता है, तो MRI brain या MRA of posterior circulation की सलाह दी जा सकती है। BPPV जैसी अन्य स्थितियों को बाहर करने के लिए Dix-Hallpike test सहित पूरी vestibular exam भी की जाती है। इन सभी जांचों से हमें सही निदान तक पहुँचने में मदद मिलती है ताकि आपको सबसे अच्छा इलाज मिल सके।

इलाज के विकल्प

Carotid sinus syncope का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस प्रकार की समस्या है और आपके लक्षण कितने गंभीर हैं।

डॉक्टर का इलाज

अगर आपको cardioinhibitory प्रकार का Carotid sinus syncope है, जहाँ दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और आपको बार-बार बेहोशी या गिरने की समस्या होती है, तो डॉक्टर dual-chamber pacemaker लगाने की सलाह दे सकते हैं। यह एक छोटा सा उपकरण है जो दिल की धड़कन को नियमित रखने में मदद करता है। vasodepressor प्रकार के लिए, जिसमें ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, डॉक्टर steroid dawai, midodrine जैसी दवाइयाँ या compression stockings पहनने की सलाह दे सकते हैं।

कभी-कभी, सिर्फ तंग कॉलर या गर्दन की टाई पहनने से बचने जैसी आदतों में बदलाव भी बहुत फर्क ला सकता है। अगर vertebrobasilar insufficiency के कारण समस्या है, तो कुछ मामलों में surgical decompression पर विचार किया जा सकता है।

सर्जरी कब?

सर्जरी की ज़रूरत मुख्य रूप से cardioinhibitory प्रकार के Carotid sinus syncope में पड़ती है, जब मरीज़ को बार-बार बेहोशी या गिरने की समस्या होती है और अन्य उपाय काम नहीं करते। ऐसे मामलों में, एक dual-chamber pacemaker लगाया जाता है। यह एक छोटी सी सर्जरी होती है जिसमें पेसमेकर को छाती के ऊपरी हिस्से में त्वचा के नीचे लगाया जाता है और उसके तार दिल से जोड़े जाते हैं।

यह दिल की धड़कन को नियंत्रित करके बेहोशी के दौरों को रोकने में मदद करता है। vertebrobasilar insufficiency के कुछ खास मामलों में, जहाँ गर्दन घुमाने पर धमनी पर दबाव पड़ता है, surgical decompression की ज़रूरत पड़ सकती है।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

Carotid sinus syncope के लक्षणों को मैनेज करने और गिरने के जोखिम को कम करने के लिए घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।

क्या करें

  • तंग कॉलर और नेक टाई से बचें: गर्दन पर किसी भी तरह का दबाव Carotid sinus को उत्तेजित कर सकता है। ढीले कपड़े पहनें ताकि गर्दन पर कोई खिंचाव न पड़े।
  • गर्दन घुमाने की बजाय पूरा शरीर घुमाएं: जब आपको पीछे मुड़कर देखना हो या ऊपर की ओर देखना हो, तो सिर्फ गर्दन घुमाने के बजाय पूरे शरीर को घुमाएं। इससे गर्दन पर अचानक दबाव नहीं पड़ेगा।
  • बैठने या लेटने के बाद धीरे-धीरे खड़े हों: अचानक खड़े होने से ब्लड प्रेशर तेज़ी से गिर सकता है। हमेशा धीरे-धीरे उठें और कुछ सेकंड के लिए बैठें या खड़े होने से पहले सहारा लें।
  • गिरने से लगी चोटों की तुरंत रिपोर्ट करें: अगर आपको गिरने के कारण कोई चोट लगती है, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।

क्या न करें

  • अस्पष्टीकृत बेहोशी के दौरान गाड़ी न चलाएं: अगर आपको बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ते हैं और उनका कारण अभी तक पता नहीं चला है, तो गाड़ी चलाना बहुत खतरनाक हो सकता है।
  • बार-बार बिना कारण गिरने को नज़रअंदाज़ न करें: बुज़ुर्गों में बार-बार गिरने को अक्सर उम्र का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन यह Carotid sinus syncope या किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
  • गर्दन की आक्रामक मालिश से बचें: Carotid sinus massage एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसे केवल प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा ही मॉनिटर की गई सेटिंग में किया जाना चाहिए। घर पर गर्दन की ज़ोरदार मालिश करने से बचें, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाइ न लें: चक्कर या बेहोशी के लिए खुद से कोई भी दवाइ लेने से बचें। सही निदान के बिना दवाइ लेना नुकसानदेह हो सकता है।

WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।

बचाव

Carotid sinus syncope से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर जैसे हमारे जिले में जहाँ कुछ खास परिस्थितियाँ होती हैं।

  • गर्दन पर दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचें: तंग कॉलर वाली शर्ट, टाई या गर्दन पर दबाव डालने वाले गहने पहनने से बचें। शेविंग करते समय या गर्दन घुमाते समय सावधानी बरतें।
  • ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का प्रबंधन करें: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या मधुमेह जैसी कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या है, तो उसका नियमित रूप से इलाज करवाएं। ये स्थितियाँ Carotid sinus syncope के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
  • निर्जलीकरण से बचें: तेज़ गर्मी में पर्याप्त पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें। निर्जलीकरण से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, जिससे बेहोशी का खतरा बढ़ जाता है।
  • धीरे-धीरे उठें और बैठें: अचानक स्थिति बदलने से बचें। बैठने या लेटने के बाद हमेशा धीरे-धीरे खड़े हों ताकि ब्लड प्रेशर को एडजस्ट होने का समय मिल सके।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं: खासकर 60 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुषों को नियमित रूप से डॉक्टर से मिलना चाहिए। ESC 2018 Syncope Guideline के अनुसार, बुज़ुर्गों में बेहोशी के कारणों की जांच ज़रूरी है।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पेसमेकर कैरोटिड साइनस सिंकोप के सभी प्रकारों को ठीक कर देगा?

पेसमेकर कैरोटिड साइनस सिंकोप के कार्डियोइन्हिबिटरी प्रकार के लिए बहुत असरदार है, जिसमें मुख्य रूप से दिल की धड़कन धीमी हो जाती है। हालांकि, यह वासोडेप्रेसर प्रकार के लिए उतना असरदार नहीं होता, जहाँ मुख्य समस्या ब्लड प्रेशर का काफी कम हो जाना है। वासोडेप्रेसर प्रकार के लिए, हम आमतौर पर दूसरे इलाज पर ध्यान देते हैं, जैसे कुछ खास दवाएँ जो ब्लड प्रेशर बढ़ाने में मदद करती हैं या कंप्रेशन स्टॉकिंग्स का उपयोग करना। आपके खास प्रकार की पहचान करना ज़रूरी है ताकि आपको सबसे सही और असरदार इलाज योजना मिल सके।

कैरोटिड साइनस सिंकोप क्या है और यह आमतौर पर किसे होता है?

कैरोटिड साइनस सिंकोप एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपको अचानक, थोड़े समय के लिए चक्कर आते हैं या आप बेहोश होकर गिर जाते हैं। यह आमतौर पर ज़्यादा उम्र के पुरुषों को होता है, खासकर 60 साल से ज़्यादा उम्र वालों को। ऐसा तब होता है जब आपकी गर्दन में एक संवेदनशील जगह, जिसे कैरोटिड साइनस कहते हैं,
यांत्रिक उत्तेजना पर ज़्यादा प्रतिक्रिया करती है। गर्दन घुमाना, शेविंग करना, तंग कॉलर पहनना या ऊपर की ओर देखना जैसे सामान्य काम भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं। यह ज़्यादा प्रतिक्रिया कुछ समय के लिए आपके दिमाग में खून का बहाव कम कर देती है, जिससे आपको हल्कापन महसूस होता है या आप बेहोश भी हो सकते हैं। इसे चक्कर आने या गिरने के अन्य कारणों से अलग समझना ज़रूरी है।

मेरी गर्दन पर दबाव पड़ने से मैं बेहोश कैसे हो जाता हूँ?

कुछ लोगों में, गर्दन की धमनियों में मौजूद कैरोटिड साइनस नाम का सेंसर बहुत ज़्यादा संवेदनशील होता है। जब तंग कॉलर या गर्दन घुमाने जैसी चीज़ों से इसे उत्तेजित किया जाता है, तो यह आपके दिमाग को मज़बूत सिग्नल भेजता है। इससे आपकी दिल की धड़कन बहुत धीमी हो सकती है, कभी-कभी तो कुछ देर के लिए रुक भी सकती है, जिसे हम कार्डियोइन्हिबिटरी टाइप कहते हैं। या फिर, यह दिल की धड़कन में ज़्यादा बदलाव के बिना आपके ब्लड प्रेशर को काफी कम कर सकता है, जिसे वैसोडिप्रेसर टाइप के नाम से जाना जाता है। दोनों ही स्थितियों में दिमाग में खून का बहाव कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे थोड़े समय के लिए बेहोशी या लगभग बेहोशी की स्थिति आ जाती है।

क्या कैरोटिड साइनस सिंकोप के अलग-अलग प्रकार होते हैं?

हाँ, इसके तीन मुख्य प्रकार होते हैं। सबसे आम, जो लगभग 70% मामलों में होता है, वह कार्डियोइन्हिबिटरी टाइप है, जिसमें आपकी दिल की धड़कन काफी धीमी हो जाती है, कभी-कभी तो कुछ सेकंड के लिए रुक भी जाती है। दूसरा प्रकार, वैसोडिप्रेसर, आपके ब्लड प्रेशर को दिल की धड़कन में ज़्यादा बदलाव के बिना तेज़ी से गिरा देता है, जो लगभग 10% मामलों में होता है। बाकी 20% में मिक्स्ड टाइप होता है, जिसका मतलब है कि उन्हें धीमी दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में गिरावट दोनों का अनुभव होता है। यह जानना कि आपको कौन सा प्रकार है, हमें आपके लिए सबसे अच्छा इलाज चुनने में मदद करता है।

मुझे चक्कर आने या बेहोशी के दौरों के बारे में कब चिंता करनी चाहिए?

अगर आपकी बेहोशी से चोट लगती है, जैसे फ्रैक्चर या सिर में चोट, खासकर अगर आप बुज़ुर्ग हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर आपको बार-बार बिना किसी कारण के गिरना होता है, खासकर अगर आपको दिल या रक्त वाहिकाओं की समस्याओं के लिए जोखिम कारक हैं, या अगर आप शारीरिक गतिविधि के दौरान बेहोश हो जाते हैं, तो तुरंत जांच करवाना ज़रूरी है। अगर डॉक्टर को किसी भी जांच से पहले आपकी गर्दन की धमनियों में कोई खास आवाज़ सुनाई देती है, या अगर आपको हाल ही में स्ट्रोक या मिनी-स्ट्रोक हुआ है, या दिल की धड़कन से जुड़ी कुछ खास समस्याओं का इतिहास रहा है, तो तुरंत जांच की ज़रूरत है।

क्या गर्दन की मालिश का टेस्ट पॉज़िटिव आने का मतलब है कि मुझे यह बीमारी है?

ज़रूरी नहीं है। कैरोटिड साइनस मसाज नामक एक टेस्ट यह दिखा सकता है कि आपका कैरोटिड साइनस अतिसंवेदनशील है या नहीं, लेकिन यह संवेदनशीलता बुज़ुर्ग मरीज़ों में बिना किसी लक्षण के भी काफी आम है। कैरोटिड साइनस सिंकोप का निदान करने के लिए, आपके लक्षण, जैसे चक्कर आना या बेहोशी, मालिश के दौरान होने चाहिए। यह क्लिनिकल कोरिलेशन बहुत ज़रूरी है। टेस्ट के दौरान आपके लक्षणों का फिर से न होना, केवल पॉज़िटिव मसाज से कैरोटिड साइनस सिंकोप के निदान की पुष्टि नहीं करता है।


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  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.