अगर आपको लगता है कि आपके एक या दोनों कानों में आवाज़ कम सुनाई दे रही है, या कान बंद लगना जैसा महसूस होता है, तो यह आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बहुत असर डाल सकता है। यह आपकी बातचीत, काम पर एकाग्रता और यहाँ तक कि रात की नींद को भी प्रभावित कर सकता है। क्लिनिक में और आस-पास के इलाकों से ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि उन्हें एक कान से कम सुनना या एक तरफ़ आवाज़ ज़्यादा महसूस होती है, और यह समस्या अक्सर उन्हें परेशान करती है।

ऐसे में, कान की सुनने की क्षमता की शुरुआती जांच के लिए रिने और वेबर टेस्ट बहुत मददगार होते हैं, जो हमें समस्या की जड़ तक पहुँचने में मदद करते हैं।

अभी क्या करें?

  • घर पर राहत: अगर आपको अचानक कान में कम सुनाई दे, तो सबसे पहले घबराएँ नहीं। किसी शांत जगह पर बैठ जाएँ और अपने कानों पर कोई दबाव न पड़ने दें। कान में कुछ भी डालने की कोशिश न करें, जैसे रुई या तेल। दरअसल, ऐसा करने से समस्या और बढ़ सकती है।
  • डॉक्टर को दिखाएं: अगर आपको कान में कम सुनाई की समस्या कुछ दिनों से ज़्यादा है, या इसके साथ कान में अजीब आवाज़, दर्द या भारीपन महसूस हो रहा है, तो तुरंत किसी ENT specialist से मिलें। मेरे क्लिनिक में अक्सर ऐसे मामले आते हैं, और मैं हमेशा सलाह देता हूँ कि क्लिनिक में आकर आप अपनी जांच करवा लें
  • तुरंत जाएं: अगर आपको अचानक एक कान से सुनना बंद हो जाए, या सुनने में कमी के साथ चक्कर आना, चेहरे की कमज़ोरी या तेज़ सिरदर्द हो, तो फिर बिना देर किए डॉक्टर के पास पहुँचें। ये गंभीर लक्षणों का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में इन्हें तत्काल इलाज की ज़रूरत होती है।

कान में कम सुनाई के कारण

कान में कम सुनाई कई कारणों से हो सकती है, और यह समझना ज़रूरी है कि समस्या बाहरी कान में है, मध्य कान में है या अंदरूनी कान में। मेरे अनुभव में, मरीज़ों को अक्सर धूल और प्रदूषण के कारण होने वाले इन्फेक्शन से भी सुनने में कमी की शिकायत होती है। इन कारणों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है: कंडक्टिव लॉस और सेंसरीन्यूरल लॉस।

कंडक्टिव लॉस तब होता है जब आवाज़ की तरंगें बाहरी या मध्य कान से अंदरूनी कान तक ठीक से नहीं पहुँच पातीं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कान में मैल जमना, कान के परदे में छेद होना, या मध्य कान में पानी भरना (जिसे ओटाइटिस मीडिया विद इफ्यूजन कहते हैं)। कभी-कभी कान की हड्डियों में समस्या (ओटोस्क्लेरोसिस) भी इसका कारण बन सकती है।

यह आमतौर पर इलाज योग्य होता है।

सेंसरीन्यूरल लॉस तब होता है जब अंदरूनी कान (कोक्लिया) या सुनने वाली नस में कोई समस्या होती है। यह उम्र बढ़ने के साथ (प्रेस्बीएक्यूसिस), तेज़ शोर के संपर्क में आने से, या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट से हो सकता है। अचानक सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

कुछ मामलों में, एक तरफ़ बढ़ती सुनने में कमी वेस्टिबुलर श्वानोमा (एक तरह का ट्यूमर) का संकेत भी हो सकती है, हालांकि यह दुर्लभ है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी नुकसान हो सकता है।

  • अचानक एक कान में सुनने में कमी: अगर आपको अचानक एक कान से कम सुनाई देने लगे, तो समझ लें कि यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है जिसे सडन सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) कहते हैं। इसमें इलाज का एक छोटा सा समय होता है। इसलिए तुरंत ENT specialist से मिलना ज़रूरी है।
  • एक तरफ़ बढ़ती सुनने में कमी और कान में आवाज़: अगर आपको एक कान में धीरे-धीरे सुनने में कमी महसूस हो रही है और साथ ही कान में सीटी बजना या भनभनाहट (टिनिटस) की आवाज़ आ रही है, तो हो सकता है कि यह वेस्टिबुलर श्वानोमा जैसे ट्यूमर का संकेत हो। आपको इसकी जांच ज़रूर करवानी चाहिए।
  • सुनने में कमी के साथ चक्कर, चेहरे की कमज़ोरी या तेज़ सिरदर्द: ये लक्षण किसी केंद्रीय समस्या, जैसे AICA स्ट्रोक या सेरेबेलोपोंटाइन-एंगल लीजन का संकेत हो सकते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तत्काल मेडिकल सहायता लें
  • कान से लगातार रिसाव के साथ कंडक्टिव लॉस: अगर आपके कान से लगातार पस या पानी निकल रहा है और साथ में सुनने में कमी भी है, तो ध्यान दें कि यह कोलेस्टेटोमा जैसी गंभीर इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। इसमें सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। इसलिए तुरंत जांच करवाएँ।

कान में कम सुनाई के लक्षण

कान में कम सुनाई के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो एक बार जांच करवाना अच्छा रहता है।

  • सुनने में कमी, कान बंद लगना, या सुनने में विषमता: आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि एक कान दूसरे से कम सुन रहा है, या दोनों कान बंद से लग रहे हैं।
  • अचानक सुनने में कमी: कभी-कभी यह अचानक हो सकता है, जैसे सुबह उठने पर एक कान से बिल्कुल सुनाई न देना।
  • कान में दर्द या रिसाव के साथ मध्य कान की समस्या: अगर आपको कान में दर्द है, या कान से पस या पानी निकल रहा है, तो यह मध्य कान में इन्फेक्शन या परदे में छेद का संकेत हो सकता है।
  • सुनने के लक्षणों के साथ चक्कर आना (वर्टिगो): अगर आपको सुनने में कमी के साथ चक्कर भी आते हैं, तो यह मेनियर रोग, लेबिरिंथाइटिस या कुछ अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है।
  • कान में अजीब आवाज़ या सीटी बजना: आपको कान में लगातार घंटी, सीटी, भनभनाहट या सिर में आवाज़ गूँजना जैसा महसूस हो सकता है, जिसे टिनिटस कहते हैं।
  • बातचीत समझने में मुश्किल: आपको भीड़ वाली जगहों पर या जब कई लोग एक साथ बात कर रहे हों, तो बातचीत समझने में परेशानी हो सकती है।
  • टीवी या रेडियो की आवाज़ तेज़ करना: आपको अक्सर टीवी या रेडियो की आवाज़ दूसरों से ज़्यादा तेज़ करनी पड़ती है।
  • फोन पर सुनने में दिक्कत: आपको फोन पर बात करते समय दूसरे व्यक्ति की आवाज़ ठीक से सुनाई नहीं देती।

कान में कम सुनाई किस कारण से होता है

कान में कम सुनाई के कई कारण हो सकते हैं, जो बाहरी कान से लेकर अंदरूनी कान और सुनने वाली नस तक कहीं भी हो सकते हैं। इन कारणों को समझना इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है।

  • कंडक्टिव लॉस: यह तब होता है जब आवाज़ की तरंगें आपके अंदरूनी कान तक ठीक से नहीं पहुँच पातीं। इसके सामान्य कारणों में कान में मैल (वैक्स) जमना, कान के परदे में छेद होना, या मध्य कान में पानी या इन्फेक्शन (ओटाइटिस मीडिया विद इफ्यूजन) शामिल हैं। कभी-कभी कान की छोटी हड्डियों (ऑसिकल्स) में समस्या, जैसे ओटोस्क्लेरोसिस, भी इसका कारण बन सकती है।
  • सेंसरीन्यूरल लॉस: यह तब होता है जब अंदरूनी कान (कोक्लिया) या सुनने वाली नस में कोई समस्या होती है। उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम होना (प्रेस्बीएक्यूसिस) इसका सबसे आम कारण है। तेज़ शोर के संपर्क में आना, कुछ दवाएं, या कुछ बीमारियाँ जैसे अचानक सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) भी इसके कारण हो सकते हैं।
  • डेड ईयर (गंभीर एकतरफा SNHL): यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक कान में सुनने की क्षमता बहुत ज़्यादा कम हो जाती है। इसमें बोन कंडक्शन के ज़रिए आवाज़ खोपड़ी से पार होकर दूसरे कान तक पहुँच सकती है, जिससे जांच में गलत परिणाम आ सकते हैं।
  • वेस्टिबुलर श्वानोमा: यह एक दुर्लभ ट्यूमर है जो सुनने वाली नस पर बनता है। यह धीरे-धीरे एक कान में सुनने में कमी, टिनिटस और कभी-कभी संतुलन की समस्याओं का कारण बन सकता है।

जांच और निदान

जब आप क्लिनिक में कान में कम सुनाई की शिकायत लेकर आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी हिस्ट्री लेता हूँ। मैं आपसे पूछता हूँ कि आपको यह समस्या कब से है, क्या यह अचानक हुई है या धीरे-धीरे बढ़ी है, क्या इसके साथ कोई दर्द, चक्कर या कान में आवाज़ जैसी कोई और समस्या है। यह जानकारी मुझे समस्या की जड़ तक पहुँचने में मदद करती है।

इसके बाद, मैं आपके कान की Otoscopy करता हूँ। इससे मैं कान के बाहरी हिस्से, कान नहर और कान के परदे की स्थिति देखता हूँ। मैं देखता हूँ कि कहीं कान में मैल तो नहीं जमा है, कान का परदा फटा हुआ तो नहीं है, या मध्य कान में कोई इन्फेक्शन या पानी तो नहीं है।

फिर हम रिने और वेबर टेस्ट करते हैं, जो सुनने की क्षमता की जांच के लिए दो बहुत ही महत्वपूर्ण बेडसाइड टेस्ट हैं। इन टेस्ट के लिए हम एक 512 Hz का ट्यूनिंग फोर्क इस्तेमाल करते हैं। वेबर टेस्ट में, मैं कंपन करते हुए ट्यूनिंग फोर्क को आपके माथे के बीच में रखता हूँ और पूछता हूँ कि आपको आवाज़ किस कान में ज़्यादा तेज़ सुनाई दे रही है।

अगर आपको कंडक्टिव लॉस है, तो आवाज़ प्रभावित कान में ज़्यादा तेज़ सुनाई देगी। अगर सेंसरीन्यूरल लॉस है, तो आवाज़ अच्छे कान में ज़्यादा तेज़ सुनाई देगी।

रिने टेस्ट में, मैं ट्यूनिंग फोर्क को पहले आपके कान के पीछे की हड्डी (मैस्टॉइड) पर रखता हूँ (बोन कंडक्शन) और फिर उसे आपके कान के पास हवा में रखता हूँ (एयर कंडक्शन)। सामान्यतः, आपको हवा में आवाज़ ज़्यादा देर तक सुनाई देनी चाहिए (रिने पॉजिटिव)। अगर आपको हड्डी पर ज़्यादा देर तक सुनाई देती है (रिने नेगेटिव), तो यह कंडक्टिव लॉस का संकेत है।

ये दोनों टेस्ट मिलकर मुझे यह समझने में मदद करते हैं कि आपकी सुनने में कमी कंडक्टिव है या सेंसरीन्यूरल।

इन शुरुआती टेस्ट के बाद, अगर ज़रूरी हो, तो मैं Tympanometry भी करता हूँ, जो कान के परदे की गतिशीलता और मध्य कान के दबाव को मापता है। अंत में, सुनने की क्षमता का सटीक मूल्यांकन करने के लिए Pure Tone Audiometry की सलाह दी जाती है, जो सुनने में कमी की डिग्री और प्रकार को विस्तार से बताता है। यह सारी जांच हमें आपके लिए सबसे सही इलाज योजना बनाने में मदद करती है।

इलाज के विकल्प

कान में कम सुनाई का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। रिने और वेबर टेस्ट हमें यह समझने में मदद करते हैं कि समस्या कंडक्टिव है या सेंसरीन्यूरल, जिसके आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है।

डॉक्टर का इलाज

अगर सुनने में कमी का कारण कान में मैल जमा होना है, तो मैं माइक्रोस्कोप की मदद से उसे सुरक्षित रूप से निकाल देता हूँ। अगर मध्य कान में इन्फेक्शन या पानी भरा है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाई दे सकते हैं या कभी-कभी कान से पानी निकालने के लिए एक छोटी सी सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। अगर कान के परदे में छेद है, तो उसे ठीक करने के लिए सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।

सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस के मामलों में, खासकर अचानक सुनने में कमी होने पर, डॉक्टर स्टेरॉइड दवाई दे सकते हैं, जिसे समय पर लेना बहुत ज़रूरी है।

सर्जरी कब?

सर्जरी की ज़रूरत तब पड़ती है जब कंडक्टिव लॉस का कारण कोई ऐसी समस्या हो जिसे दवाइयों से ठीक नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, अगर कान के परदे में बड़ा छेद है जो अपने आप ठीक नहीं हो रहा, तो Tympanoplasty की जाती है। अगर कान की हड्डियों में कोई समस्या है, जैसे ओटोस्क्लेरोसिस, तो उसे ठीक करने के लिए भी सर्जरी की जा सकती है।

कोलेस्टेटोमा जैसे गंभीर इन्फेक्शन के मामलों में भी सर्जरी ज़रूरी होती है ताकि इन्फेक्शन को फैलने से रोका जा सके।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

कान में कम सुनाई की समस्या में घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि समस्या बढ़े नहीं और आप सुरक्षित रहें।

क्या करें

  • ENT specialist से मिलें: अगर आपको सुनने में कोई भी अचानक बदलाव महसूस हो, भले ही वह हल्का लगे, तो तुरंत ENT specialist से जांच करवाएँ। यह किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है।
  • लक्षणों पर ध्यान दें: नोट करें कि कौन सा कान प्रभावित है, क्या लक्षण लगातार बने रहते हैं या रुक-रुक कर आते हैं। यह जानकारी डॉक्टर को सही निदान तक पहुँचने में मदद करती है।
  • कानों को तेज़ आवाज़ से बचाएँ: अगर आप किसी शोरगुल वाले वातावरण में काम करते हैं या रहते हैं, तो ईयरप्लग या ईयरमफ्स का इस्तेमाल करें। तेज़ आवाज़ से अंदरूनी कान को नुकसान पहुँच सकता है।
  • कानों को सूखा रखें: नहाते या बाल धोते समय कानों में पानी जाने से बचाएँ। अगर पानी चला जाए, तो उसे बाहर निकालने के लिए सिर को झुकाएँ या हल्के से कान को खींचें।

क्या न करें

  • रुई की बड्स से कान साफ न करें: रुई की बड्स कान के मैल को और अंदर धकेल देती हैं, जिससे कान बंद हो सकता है या परदे को नुकसान पहुँच सकता है। कान की सफाई के लिए हमेशा डॉक्टर के पास जाएँ।
  • एकतरफा सुनने में कमी को नज़रअंदाज़ न करें: अगर आपको एक कान से कम सुनाई दे रहा है, तो इसे हफ्तों तक नज़रअंदाज़ न करें। यह वेस्टिबुलर श्वानोमा या अचानक सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
  • कान में तेल या घरेलू नुस्खे न डालें: कान में सरसों का तेल, लहसुन का रस या कोई भी अन्य घरेलू चीज़ डालने से इन्फेक्शन हो सकता है, खासकर अगर कान के परदे में छेद हो।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ न लें: कान की समस्या के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी ईयर ड्रॉप या एंटीबायोटिक न लें। गलत दवाइयाँ नुकसान पहुँचा सकती हैं।

WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।

बचाव

कान में कम सुनाई की समस्या से बचाव के लिए स्थानीय वातावरण और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।

  • शोर से कानों की सुरक्षा: अगर आप किसी ऐसे काम में लगे हैं जहाँ तेज़ आवाज़ होती है, जैसे कारखानों में या निर्माण स्थलों पर, तो हमेशा ईयरप्लग या ईयरमफ्स का इस्तेमाल करें। यह शोर-प्रेरित सुनने में कमी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
  • कान के इन्फेक्शन का तुरंत इलाज: मानसून के दौरान कान के इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको कान में दर्द या रिसाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और इन्फेक्शन का पूरा इलाज करवाएँ ताकि यह मध्य कान तक न फैले।
  • साफ पानी का उपयोग: नहाते समय या स्विमिंग करते समय साफ पानी का उपयोग करें। अगर संभव हो तो कान में पानी जाने से रोकने के लिए ईयरप्लग का इस्तेमाल करें, खासकर अगर आप तालाबों या नहरों में नहाते हैं।
  • नियमित जांच: अगर आपके परिवार में सुनने में कमी का इतिहास है या आप किसी जोखिम वाले वातावरण में रहते हैं, तो नियमित रूप से ENT specialist से अपने कानों की जांच करवाएँ। शुरुआती पहचान से कई समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘नेगेटिव रिने टेस्ट’ का क्या मतलब है?

‘नेगेटिव रिने’ का मतलब है कि जब ट्यूनिंग फोर्क को आपके कान के पीछे की हड्डी पर रखा जाता है, तो आपको हवा में कान के पास रखने की तुलना में ज़्यादा तेज़ आवाज़ सुनाई देती है। यह आमतौर पर कंडक्टिव सुनने में कमी की ओर इशारा करता है, जिसका मतलब है कि आपके बाहरी या मध्य कान में कोई समस्या है जो आवाज़ को आपके अंदरूनी कान तक ठीक से पहुंचने से रोक रही है। हालांकि, यह जानना ज़रूरी है कि बहुत गंभीर या ‘खराब’ कान में, आपको गलत-नेगेटिव रिने मिल सकता है क्योंकि आवाज़ वास्तव में आपके दूसरे कान द्वारा बोन कंडक्शन के ज़रिए सुनी जाती है। सटीक रीडिंग पाने के लिए हमें कभी-कभी अच्छे कान को ‘मास्क’ करना पड़ता है।

सुनने में कमी के लिए मुझे तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको एक कान में अचानक सुनने में कमी महसूस होती है, तो आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए, खासकर अगर हमारे शुरुआती टेस्ट सेंसरीन्यूरल समस्या का संकेत देते हैं। अगर आपकी सुनने में कमी के साथ चक्कर आना (वर्टिगो), चेहरे की कमज़ोरी, या गंभीर सिरदर्द है, तो बिना देरी किए जांच करवाना ज़रूरी है। अगर आपको एक कान में धीरे-धीरे बढ़ती सुनने में कमी के साथ कान में बजने की आवाज़ (टिनिटस) है, या कंडक्टिव सुनने में कमी के साथ कान से लगातार रिसाव है, तो तत्काल परामर्श की भी सलाह दी जाती है। ये लक्षण ऐसी स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं जिन्हें तुरंत मेडिकल जांच की ज़रूरत होती है।

ये टेस्ट किस तरह की समस्याएँ पहचानने में मदद कर सकते हैं?

ये टेस्ट हमें जल्दी पता लगाने में मदद करते हैं कि आपकी सुनने की समस्या का कारण यह है कि आवाज़ आपके अंदरूनी कान तक ठीक से नहीं पहुँच रही है (जैसे कान में मैल जमना, कान के परदे की समस्याएँ, या बीच वाले कान में पानी भरना), या फिर समस्या अंदरूनी कान या सुनने वाली नस में ही है (जैसे उम्र के साथ सुनने की क्षमता कम होना, शोर से नुकसान, या अचानक अंदरूनी कान में सुनने की क्षमता का कम होना)। यह दिशा जानने से हमें यह तय करने में मदद मिलती है कि आपको आगे और जाँच, किसी विशेषज्ञ के पास जाने, या तुरंत इलाज की ज़रूरत है, खासकर अचानक सुनने की क्षमता कम होने या संतुलन से जुड़ी समस्याओं में।

ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट क्या होते हैं?

ये रिने और वेबर टेस्ट कहलाने वाले झटपट किए जाने वाले टेस्ट हैं। हम आपकी सुनने की क्षमता जांचने के लिए एक खास 512 हर्ट्ज़ का ट्यूनिंग फोर्क इस्तेमाल करते हैं। ये हमें यह बताने में मदद करते हैं कि आपकी सुनने में कमी आपके बाहरी या मध्य कान की समस्या (कंडक्टिव लॉस) के कारण है या आपके अंदरूनी कान या नस की समस्या (सेंसरीन्यूरल लॉस) के कारण। हालांकि ये हमें ऑडियोग्राम जैसी पूरी जानकारी नहीं देते, लेकिन ये एक मिनट से भी कम समय में एक अच्छा शुरुआती जवाब देते हैं, जिससे आपके इलाज के अगले कदम तय करने में हमारी मदद होती है।

ये ट्यूनिंग फोर्क टेस्ट कैसे काम करते हैं?

वेबर टेस्ट बोन कंडक्शन का इस्तेमाल करता है; हम कंपन करते हुए फोर्क को आपके माथे के बीच में रखते हैं। अगर आपको कंडक्टिव सुनने में कमी है, तो आपको प्रभावित कान में आवाज़ ज़्यादा तेज़ सुनाई देगी क्योंकि वह बाहर के शोर से बचा रहता है। अगर यह सेंसरीन्यूरल लॉस है, तो आपको आपके अच्छे कान में ज़्यादा तेज़ सुनाई देगी। रिने टेस्ट यह तुलना करता है कि आप हवा के ज़रिए और कान के पीछे की हड्डी के ज़रिए आवाज़ कितनी अच्छी तरह सुनते हैं। आमतौर पर, एयर कंडक्शन बेहतर होता है। अगर बोन कंडक्शन बेहतर है, तो यह कम से कम 20-25 डेसिबल की कंडक्टिव सुनने में कमी का संकेत देता है।


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  • Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD
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इस लेख की चिकित्सकीय समीक्षा Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB (ENT), CAMVD (Prime ENT Center, हरदोई) द्वारा की गई है। यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा के लिए है और किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।


Dr. Prateek Porwal

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) is a vertigo and BPPV specialist at Prime ENT Center, Nagheta Road, Hardoi, UP 241001. Inventor of the Bangalore Maneuver. Only VNG + Stabilometry setup in Central UP. Online consultations available across India — call/WhatsApp 7393062200.