संक्षिप्त उत्तर: गर्भावस्था में करवट लेते समय चक्कर, बिस्तर से उठने, झुकने या ऊपर देखने पर कुछ सेकंड के लिए कमरा घूमने जैसा लगे तो BPPV एक संभावना है। केवल लक्षण से इसकी पुष्टि नहीं होती। गर्भावस्था के चरण और गर्दन-कमर की सुरक्षा देखकर प्रशिक्षित चिकित्सक स्थिति बदलकर आँखों की गति की जाँच करता है। घर पर स्वयं जाँच या सिर घुमाने वाला उपचार न करें।

तुरंत सहायता लें: चक्कर लगातार बना रहे, बेहोशी हो, बहुत तेज सिरदर्द, दोहरा दिखना, शरीर के एक ओर कमजोरी, बोलने में कठिनाई, अचानक सुनाई कम देना, सीने में दर्द, अधिक रक्तस्राव, तेज पेट दर्द या गर्भावस्था से जुड़ा कोई चेतावनी संकेत हो तो इसे BPPV मानकर घर पर उपचार न करें।

गर्भावस्था में करवट लेते समय चक्कर और सुरक्षित BPPV जाँच
स्थिति बदलने पर थोड़ी देर कमरा घूमना उपयोगी संकेत है, लेकिन सुरक्षित चिकित्सकीय जाँच से ही कारण की पुष्टि होती है।

BPPV क्या है?

BPPV का पूरा नाम बिनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजीशनल वर्टिगो है। इसमें भीतरी कान के बहुत छोटे कैल्शियम कण अपनी सामान्य जगह से खिसककर संतुलन की किसी नली में पहुँच सकते हैं। सिर की स्थिति बदलने पर वे तरल की गति को प्रभावित करते हैं और मस्तिष्क को गलत गति-संकेत मिल सकता है। इससे थोड़ी देर के लिए कमरा घूमना तथा आँखों की खास अनैच्छिक गति हो सकती है।

“बिनाइन” शब्द का अर्थ यह नहीं है कि हर स्थिति-निर्भर चक्कर हानिरहित है। माइग्रेन, रक्तचाप में बदलाव, दवा का प्रभाव, भीतरी कान के दूसरे रोग और स्नायु-तंत्र की समस्याएँ भी चक्कर दे सकती हैं। इसलिए केवल यह देखकर कि करवट पर चक्कर आया, स्वयं BPPV का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

गर्भावस्था में BPPV का आम स्वरूप और लक्षण

  • किसी खास करवट लेने पर कमरा घूमना;
  • बिस्तर पर लेटने या उससे उठने पर थोड़ी देर तेज घूमने जैसा लगना;
  • ऊपर देखने, नीचे झुकने या सिर पीछे करने पर घटना शुरू होना;
  • घूमने की घटना प्रायः कुछ सेकंड से एक मिनट से कम रहना, लेकिन बाद में मतली या हल्का असंतुलन बने रहना; और
  • एक ओर की स्थिति में दूसरी ओर की तुलना में लक्षण अधिक होना।

यदि चक्कर घंटों लगातार रहता है, केवल बेहोशी जैसा लगता है, या खड़े होते ही आँखों के आगे अँधेरा आता है, तो कारण BPPV से अलग भी हो सकता है। सामान्य कारणों और गर्भावस्था के चेतावनी संकेतों के लिए गर्भावस्था में सामान्य चक्कर की मार्गदर्शिका पढ़ें।

गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित तरीके से जाँच कैसे की जाती है?

चिकित्सक पहले पूछता है कि घटना किस स्थिति में शुरू होती है, कितनी देर रहती है और साथ में उल्टी, सिरदर्द, सुनाई कम देना या कोई स्नायु-तंत्र संबंधी लक्षण तो नहीं है। गर्भावस्था का सप्ताह, गर्दन या कमर की समस्या, रक्तस्राव, रक्तचाप से जुड़े लक्षण और प्रसूति विशेषज्ञ की सलाह भी महत्वपूर्ण हैं।

स्थिति बदलकर की जाने वाली जाँच तभी की जाती है जब वह उस महिला के लिए उचित हो। गर्भावस्था के आगे के महीनों में लंबे समय तक पूरी तरह पीठ के बल लेटना असहज या अनुपयुक्त हो सकता है। ऐसी स्थिति में तकिए, करवट या संशोधित जाँच-विधि का उपयोग किया जा सकता है। आँखों की गति की दिशा और समय से यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी संतुलन नली प्रभावित हो सकती है। केवल चक्कर महसूस होना पर्याप्त प्रमाण नहीं है। सामान्य BPPV में हर बार चित्रण जाँच आवश्यक नहीं होती; असामान्य संकेत होने पर चिकित्सक अलग जाँच चुन सकता है।

घर पर स्वयं जाँच क्यों नहीं करनी चाहिए?

  • अचानक तेज चक्कर, उल्टी या गिरने का खतरा हो सकता है।
  • गर्दन, कमर, गर्भनाल या गर्भावस्था में लेटने की सावधानियाँ हर व्यक्ति में अलग हो सकती हैं।
  • गलत ओर या गलत संतुलन नली मानकर किया गया प्रयास लक्षण बढ़ा सकता है।
  • स्नायु-तंत्र या प्रसूति संबंधी असामान्य चेतावनी संकेत छूट सकते हैं।

इंटरनेट वीडियो देखकर Dix-Hallpike, Epley, Semont या बार-बार करवट बदलने का अभ्यास न करें। पहले रोग की पुष्टि और प्रभावित ओर या नली की पहचान आवश्यक है। किसी साथ वाले व्यक्ति की मौजूदगी भी गलत जाँच को सुरक्षित नहीं बनाती।

गर्भावस्था में BPPV का उपचार

सामान्य BPPV की पुष्टि होने पर प्रशिक्षित चिकित्सक प्रभावित नली के अनुसार कणों को पुनःस्थापित करने वाली उपयुक्त क्रिया चुन सकता है। गर्भावस्था, गर्दन-कमर की गति और सुविधा के अनुसार क्रिया को बदला जा सकता है। इसका उद्देश्य खिसके हुए कणों को ऐसी जगह पहुँचाना है जहाँ वे गलत गति-संकेत न दें।

चक्कर की दवा इन कणों को वापस स्थान पर नहीं पहुँचाती। अधिक मतली में दवा की जरूरत हो तो प्रसूति विशेषज्ञ और उपचार करने वाला चिकित्सक गर्भावस्था की सुरक्षा, मात्रा और अवधि तय करें। अपनी ओर से चक्कर की गोली, नींद लाने वाली दवा या कोई घरेलू उपचार शुरू न करें। एक क्रिया से लाभ न हो तो इसे बार-बार स्वयं दोहराने के बजाय पुनः जाँच कराएँ।

डॉक्टर से मिलने तक गिरने के जोखिम से कैसे बचें?

  • रात में उठते समय रोशनी जलाएँ और पास में सहारा रखें।
  • करवट या शरीर की स्थिति धीरे बदलें; लक्षण जगाकर बार-बार जाँचने की कोशिश न करें।
  • संतुलन खराब हो तो स्नानघर या सीढ़ियों पर अकेले न जाएँ।
  • घटनाएँ सक्रिय रहने तक वाहन, दोपहिया और ऊँचाई से बचें।
  • उल्टी और पानी की मात्रा पर ध्यान दें; शरीर में पानी की कमी लगे तो प्रसूति सलाह लें।

दोबारा जाँच कब जरूरी होती है?

उपचार के बाद भी घटनाएँ बनी रहें, उनका स्वरूप बदल जाए, सुनाई कम देना या कान में आवाज जुड़ जाए, नया सिरदर्द या स्नायु-तंत्र के लक्षण आएँ, अथवा चक्कर स्थिति बदलने से जुड़ा न रहे तो पुनः जाँच आवश्यक है। BPPV दोबारा हो सकता है, लेकिन हर बार बिना जाँच वही रोग मानना ठीक नहीं है। चिकित्सकीय जाँच के लिए संपर्क किया जा सकता है और प्रसूति विशेषज्ञ को लक्षणों तथा प्रस्तावित क्रिया के बारे में बताना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भावस्था में BPPV कैसा महसूस होता है?

अक्सर करवट बदलने, बिस्तर से उठने, झुकने या ऊपर देखने पर कुछ सेकंड के लिए साफ तौर पर कमरा घूमता महसूस होता है। केवल इस अनुभव से रोग की पुष्टि नहीं होती।

क्या घर पर Dix-Hallpike जाँच करना सही है?

नहीं। गर्भावस्था का चरण, गर्दन-कमर की समस्या और गिरने का जोखिम देखकर प्रशिक्षित चिकित्सक को सुरक्षित या संशोधित जाँच चुननी चाहिए।

क्या गर्भावस्था में Epley क्रिया सुरक्षित है?

चुने हुए रोगियों में प्रशिक्षित चिकित्सक गर्भावस्था और हड्डी-मांसपेशी संबंधी सावधानियों के साथ उपयुक्त पुनःस्थापन क्रिया कर सकता है। इसे बिना आकलन घर पर न करें।

क्या BPPV से बच्चे को नुकसान होता है?

BPPV भीतरी कान का स्थिति-निर्भर विकार है। फिर भी उल्टी, शरीर में पानी की कमी और गिरने का खतरा गर्भवती महिला की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। प्रसूति संबंधी चेतावनी संकेतों का अलग आकलन आवश्यक है।

कब इसे BPPV नहीं मानना चाहिए?

लगातार चक्कर, बेहोशी, बहुत तेज सिरदर्द, दोहरा दिखना, शरीर के एक ओर कमजोरी, अचानक सुनाई कम देना, सीने में दर्द या प्रसूति संबंधी चेतावनी संकेतों में तुरंत चिकित्सकीय जाँच चाहिए।

संदर्भ

चिकित्सकीय सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, रोग-निदान या दवा लिखने की सलाह न मानें। अपनी स्थिति के अनुसार देखभाल के लिए अपने उपचार करने वाले डॉक्टर और प्रसूति विशेषज्ञ से परामर्श लें।

Dr. Prateek Porwal

ENT and vestibular clinician at Prime ENT Center, Hardoi. Clinical interests include vertigo, BPPV, balance disorders, hearing and general ENT care. In-person consultations and online guidance are available through the clinic.