गर्भावस्था में चक्कर आना एक बहुत ही आम समस्या है। कुछ आँकड़ों के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाओं को कभी न कभी चक्कर आता है। कुछ महिलाओं को हल्का चक्कर आता है, दूसरों को बहुत गंभीर। यह आमतौर पर चिंता की बात नहीं है, लेकिन इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ कारण आसान होते हैं, कुछ गंभीर हो सकते हैं। यह समझना जरूरी है कि आपके चक्कर का कारण क्या है ताकि सही इलाज मिल सके और आपके साथ-साथ आपके बच्चे की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे। इस विस्तृत गाइड में हम समझेंगे कि गर्भावस्था में चक्कर क्यों आता है, कौन सी दवाएँ सुरक्षित हैं, और आप कैसे राहत पा सकते हैं।

Table of Contents
- गर्भावस्था में चक्कर के मुख्य कारण
- गर्भावस्था में कौन सी दवाएं सुरक्षित हैं?
- गर्भावस्था में Epley Maneuver कैसे करें?
- कब डॉक्टर को दिखाएँ?
- गर्भावस्था में चक्कर से बचाव
- परिवार की भूमिका
- गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में चक्कर
- डॉ (AAO-HNS 2017). प्रतीक पोरवाल की सलाह गर्भवती महिलाओं के लिए
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गर्भावस्था में चक्कर के मुख्य कारण
खून की कमी (एनीमिया) — सबसे आम कारण
यह सबसे आम कारण है। गर्भावस्था में शरीर को ज्यादा खून की जरूरत होती है क्योंकि बढ़ता भ्रूण भी खून की माँग करता है। साथ ही, बच्चे को पोषण देने के लिए प्लेसेंटा को भी ज्यादा खून चाहिए।
खून की कमी कई कारणों से हो सकती है। अगर आप के शरीर में पहले से ही खून की कमी थी, या आप पूरी तरह पोषण नहीं ले रही हैं, तो गर्भावस्था में यह कमी बहुत बढ़ जाती है। कम खून = कम ऑक्सीजन = मस्तिष्क को कम ऑक्सीजन = चक्कर आना।
एनीमिया की जाँच आसान है। हीमोग्लोबिन का रक्त परीक्षण करवाएँ। गर्भवती महिलाओं में सामान्य हीमोग्लोबिन 11 g/dL से अधिक होना चाहिए। अगर 11 g/dL से कम है, तो आप को एनीमिया है और आयरन सप्लीमेंट लेने की जरूरत है।
आयरन के अच्छे स्रोत: पालक, पोई, मांस, अंडे, लाल साग, काले चने, गुड़। नियमित सप्लीमेंट लेने से खून की कमी 2-3 महीने में ठीक हो सकती है।
रक्तचाप में गिरावट (लो ब्लड प्रेशर)
गर्भावस्था में रक्तचाप कम हो सकता है। यह पहली और दूसरी तिमाही में विशेषकर आम है। रक्तचाप कम होने से मस्तिष्क को कम खून मिलता है, जिससे चक्कर आता है। विशेषकर जब आप लेटे हुए हों और अचानक खड़े हों।
आप को अचानक खड़े होने या लेटी-लेटी बैठने की कोशिश करने पर सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है। इसे “orthostatic hypotension” कहते हैं। यह तभी होता है जब आप बहुत तेजी से पोजीशन बदलते हैं।
इसका इलाज सरल है: धीरे-धीरे खड़े हों (पहले बैठ जाएँ, फिर खड़े हों), बहुत पानी पिएँ, नमक की मात्रा पर्याप्त रखें। नमक से भी रक्तचाप नियंत्रित रहता है, लेकिन अतिरिक्त नमक न लें। आमतौर पर, दवा की जरूरत नहीं पड़ती।
BPPV (बेनाइन पैरॉक्सिसमल पजिशनल वर्टिगो)
यह कान में क्रिस्टल खिसकने से होने वाला चक्कर है। यह गर्भावस्था में भी हो सकता है। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के हार्मोनल परिवर्तन से कान के क्रिस्टल खिसक जाते हैं।
अगर आपको चक्कर तभी आता है जब आप किसी विशेष पोजिशन में सिर ले जाते हैं (बिस्तर में लेटते समय, करवट बदलते समय, सिर ऊपर देखते समय), तो यह BPPV हो सकता है। अक्सर चक्कर के साथ आँखें भी अनायास हिलती हैं।
अच्छी खबर यह है कि BPPV का इलाज गर्भावस्था में भी संभव है। Epley maneuver (एक विशेष तरीका) से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन गर्भावस्था में इसे करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
हाइपरवेंटिलेशन (सांस लेने में बदलाव)
गर्भावस्था में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जो श्वसन को प्रभावित करते हैं। कुछ महिलाएँ अनजाने में तेजी से साँस लेने लगती हैं। इससे खून में कार्बन डाइऑक्साइड कम हो जाता है, जिससे चक्कर आ सकता है।
👉 Also read: प्रेगनेंसी में चक्कर आना, कब सामान्य है और कब डॉक्टर दिखाएं
इसका इलाज: धीमी, गहरी साँस लें। योग में “प्राणायाम” या “अनुलोम विलोम” बहुत मदद करता है।
रक्त शर्करा में गिरावट (हाइपोग्लाइसीमिया)
गर्भावस्था में भ्रूण शर्करा माँगता है। अगर आप समय पर खाना नहीं खाते या पोषण पूरा नहीं है, तो खून में शर्करा कम हो सकती है, जिससे चक्कर आ सकता है। साथ ही कमजोरी, पसीना आना, और हृदय की तेजी भी हो सकती है।
इसका इलाज आसान है: नियमित खाना खाएँ, भोजन को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करें। हर 2-3 घंटे में कुछ हल्का-फुल्का खाना खाएँ। मेवे, फल, दूध, रोटी आदि उपयोगी हैं।
गर्भ का दबाव (Supine Hypotensive Syndrome)
तीसरी तिमाही में, जब आप सीधे पीठ के बल लेटते हैं, तो बड़ा गर्भ प्रमुख रक्त वाहिका (inferior vena cava) पर दबाव डालता है। इससे रक्त संचार कम हो जाता है और चक्कर आ सकता है।
इसका इलाज: पीठ के बल न सोएँ। बाईं ओर करवट ले कर सोएँ। यह सबसे सुरक्षित स्थिति है।
गर्भावस्था में कौन सी दवाएं सुरक्षित हैं?
चक्कर के लिए सुरक्षित दवाएँ
अगर आपको चक्कर के लिए दवा लेनी है, तो आपको बहुत सावधानी से दवा चुननी होगी क्योंकि कुछ दवाएँ गर्भ को नुकसान पहुँचा सकती हैं। हमेशा अपने प्रसूति चिकित्सक (OB-GYN) या ENT डॉक्टर से परामर्श लें।
**सुरक्षित दवाएँ और विकल्प:** – **जिंजर (अदरक)**: सबसे सुरक्षित। प्राकृतिक और किसी भी साइड इफेक्ट नहीं। अदरक की चाय या गोली ले सकते हैं। – **विटामिन B6**: मतली और चक्कर दोनों में मदद करता है। 25- रोज सुरक्षित है। – **विटामिन B12**: ऊर्जा बढ़ाता है और चक्कर कम करता है। – **आयरन सप्लीमेंट**: अगर एनीमिया है। डॉक्टर की खुराक के अनुसार लें। – **कैल्शियम**: रक्तचाप नियंत्रित रखता है। दूध, दही से प्राकृतिक कैल्शियम लें।
जो दवाएँ बचनी चाहिए
**खतरनाक दवाएँ:** – **Dimenhydrinate **: मतली के लिए दी जाती है, लेकिन गर्भावस्था में सुरक्षा संदेह में है। पहली तिमाही में खासकर बचें। – **Cyclizine**: इसी तरह खतरनाक है। – **Anticholinergic दवाएँ**: गर्भ को नुकसान पहुँचा सकती हैं। – **an anti-nausea medication (Domperidone)**: हालाँकि कभी-कभी दी जाती है, पर सावधानी से दें। – **Antihistamines (Allergy दवाएँ)**: कुछ सुरक्षित हैं, कुछ नहीं। हमेशा डॉक्टर से पूछें। – **Aspirin**: विशेषकर तीसरी तिमाही में खतरनाक।
हमेशा अपने डॉक्टर से पूछें कि कौन सी दवा सुरक्षित है। कभी अपने मन से कोई दवा न लें।
गर्भावस्था में Epley Maneuver कैसे करें?
BPPV में Epley Maneuver
अगर आपको BPPV (कान का क्रिस्टल खिसकना) है, तो Epley maneuver से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन गर्भावस्था में इसे करते समय विशेष सावधानी जरूरी है। नियमित Epley maneuver गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है।
गर्भावस्था में सुरक्षित तरीका
सामान्य Epley maneuver में आप को तेजी से पीछे की ओर लिटाया जाता है। लेकिन गर्भावस्था में, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में, यह तरीका सुरक्षित नहीं है क्योंकि:
1. बड़ा पेट संतुलन बिगाड़ता है 2. तेजी से पीछे जाने से रक्तचाप अचानक गिर सकता है 3. गर्भ पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है 4. बेहोशी का खतरा बढ़ सकता है
इसलिए, गर्भावस्था में Epley maneuver को धीरे-धीरे करना चाहिए, बैठे-बैठे या बहुत ही धीमी गति से। आपका डॉक्टर आपको सही तरीका सिखाएगा। सुरक्षित संस्करण में:
– सिर को बहुत धीरे-धीरे हिलाया जाता है – बिस्तर का झुकाव आसान होता है – किसी की उपस्थिति में किया जाता है – हर चरण में विश्राम दिया जाता है
घर पर सुरक्षित व्यायाम
डॉक्टर की देखरेख में सीखने के बाद, आप घर पर कुछ हल्के व्यायाम कर सकते हैं: – गर्दन को धीरे-धीरे घुमाना (छोटे चक्कर में) – सिर को धीरे-धीरे बग़ल में झुकाना – आँखों को फोकस करके हिलाना (बिना सिर हिलाए) – गर्दन को सामने और पीछे करना (धीरे-धीरे)
ये सभी गतिविधियाँ धीरे-धीरे करें, कभी जल्दबाजी न करें। अगर चक्कर बढ़ जाए, तो तुरंत रुक जाएँ।
कब डॉक्टर को दिखाएँ?
तुरंत चिकित्सा सलाह लें अगर:
– **बहुत गंभीर चक्कर आए**: अगर चक्कर बहुत तेज हो और आप खड़े नहीं हो सकते या गिरने का खतरा हो – **साथ में छाती में दर्द हो**: यह हृदय समस्या का संकेत हो सकता है – **साथ में सिर दर्द हो जो सामान्य न हो**: विशेषकर अगर दर्द तेज हो – **साथ में दृष्टि समस्या हो (धुंधलापन, दोहरी दृष्टि)** – **साथ में कान का दर्द या कान से तरल आए** – **साथ में योनि से रक्तस्राव हो**: यह गंभीर समस्या का संकेत है – **साथ में पेट में तेज दर्द हो**: विशेषकर यदि ऐंठन हो – **साथ में बुखार हो** – **साथ में होश खो जाए (unconscious)** – **साथ में हाथ-पैर में सुन्नता हो** – **साथ में भ्रम या बेतुकी बातें करने लगें**
इन सभी स्थितियों में तुरंत अस्पताल जाएँ या एम्बुलेंस बुलाएँ।
नियमित परीक्षण के समय बताएँ:
अगर चक्कर आता है, लेकिन गंभीर नहीं है, तो अपने अगले प्रसूति परीक्षण के समय अपने डॉक्टर को बताएँ। वह आपकी रक्तचाप जाँचेंगे (हर बार चेक किया जाता है), खून की जाँच करेंगे, और आवश्यक सलाह देंगे।
गर्भावस्था में चक्कर से बचाव
आराम और विश्राम
– पर्याप्त नींद लें (कम से कम 8-10 घंटे) – दिन में 30 मिनट की झपकी लें (अगर संभव हो) – तनाव कम करें (योग, ध्यान, प्रार्थना करें) – बहुत काम न करें, आराम को प्राथमिकता दें – घर के काम में परिवार की मदद लें
👉 Also read: Vertigo During Pregnancy India
सही खान-पान
– पूरी तरह पोषण वाला खाना खाएँ – लोहे युक्त खाना: पालक, मांस, अंडे, काले चने, सोयाबीन, तिल, खजूर – कैल्शियम युक्त खाना: दूध, दही, पनीर, बीन्स – प्रोटीन: दाल, मांस, दूध, दही – फल और सब्जियाँ रोजाना – नियमित खाना खाएँ, भोजन न छोड़ें – हर 2-3 घंटे में कुछ हल्का खाएँ (नाश्ता करें) – मीठा न्यूनतम रखें, जटिल कार्बोहाइड्रेट लें
पानी और तरल पदार्थ
– रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएँ (गर्भावस्था में आवश्यकता बढ़ जाती है) – निर्जलीकरण (dehydration) चक्कर का एक बड़ा कारण है – दूध, जूस (ताजा निचोड़ा हुआ), सूप, नारियल पानी भी ले सकते हैं – चाय और कॉफी कम करें (कैफीन रक्तचाप को प्रभावित करता है)
धीरे-धीरे उठना
– बिस्तर से उठते समय धीरे-धीरे उठें (कम से कम 1-2 मिनट लगाएँ) – पहले सीधे बैठ जाएँ, पैर बिस्तर से नीचे करें – कुछ सेकंड बैठे रहें – फिर धीरे-धीरे खड़े हों – कभी अचानक खड़े न हों
भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें
– व्यस्त बाजार, भीड़ वाली दुकान, लंबी पंक्तियों से बचें – खुली हवा में रहें जहाँ आराम हो सके – गर्मी में ज्यादा न रहें (कूल जगह पर रहें) – भीड़ से डिस्टेंस बनाएँ (संक्रमण से बचने के लिए भी)
परिवार की भूमिका
पति/परिवार को क्या करना चाहिए?
**1. जिम्मेदारी लें**: घर का काम, खाना बनाना, कपड़े धोना, बाजार जाना आदि सब देख लें ताकि गर्भवती महिला को आराम मिले।
**2. खान-पान का ध्यान**: पूरा पोषण वाला खाना बनाएँ, दवाएँ समय पर दें, समय पर खाना परोसें।
**3. आराम कराएँ**: अगर चक्कर आए, तो तुरंत लिटा दें, पैर को ऊँचा करें, हवा दें।
**4. डॉक्टर के पास ले जाएँ**: गंभीर चक्कर में तुरंत अस्पताल ले जाएँ। प्रसूति परीक्षण के लिए नियमित साथ चलें।
**5. सहायता दें**: सीढ़ियों पर चलते समय, बाजार जाते समय, शारीरिक काम में सहायता दें।
**6. प्रेरणा दें**: व्यायाम (योग, सैर) के लिए प्रेरित करें, साथ चलें।
भावनात्मक सहारा
गर्भावस्था में महिलाओं को भावनात्मक सहारा भी जरूरी है। चक्कर आने से अक्सर डर लगता है—डर कि बच्चे को कोई समस्या न हो, चक्कर में गिर न जाऊँ, कोई समस्या न हो। परिवार का प्यार, समझ और सहारा इस डर को कम करता है। पति के प्यार भरे शब्दों से ही कई महिलाओं का तनाव कम होता है।
गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में चक्कर
पहली तिमाही (0-3 महीने)
इस समय हार्मोनल परिवर्तन सबसे तेज होते हैं। चक्कर और मतली आम हैं—50% महिलाओं को मतली आती है। खून की मात्रा भी बढ़ने लगती है, लेकिन अभी तक शरीर इसके अनुकूल नहीं हुआ होता। आमतौर पर यह समय चिंता की बात नहीं है, लेकिन बहुत गंभीर चक्कर हो तो डॉक्टर से मिलें।
दूसरी तिमाही (4-6 महीने)
यह समय आमतौर पर सबसे सुरक्षित माना जाता है। कुछ महिलाओं का चक्कर ठीक हो जाता है क्योंकि शरीर अब बदलावों के अनुकूल हो गया है। कुछ में यह जारी रहता है। इस समय खाना अच्छी तरह पचने लगता है, इसलिए पोषण बेहतर मिलता है।
तीसरी तिमाही (7-9 महीने)
पेट बहुत बड़ा हो जाता है, वजन बहुत बढ़ जाता है, संतुलन बिगड़ जाता है। चक्कर इस समय फिर से बढ़ सकता है। गिरने का खतरा सबसे ज्यादा इस समय होता है क्योंकि संतुलन की समस्या होती है। प्रसव से कुछ हफ्तों पहले कुछ महिलाओं को तेजी से चक्कर बढ़ता है।
डॉ. प्रतीक पोरवाल की सलाह गर्भवती महिलाओं के लिए
डॉ. प्रतीक पोरवाल, Prime ENT Center, हरदोई में गर्भवती महिलाओं के साथ बहुत अनुभव रखते हैं। उनकी सलाह:
**”गर्भावस्था में चक्कर आना आम है, लेकिन यह कभी सामान्य नहीं है। कारण जानना जरूरी है। अगर आपको चक्कर आता है, तो अपने प्रसूति चिकित्सक को बताएँ। वह रक्तचाप, खून की जाँच कर सकते हैं। अगर ENT समस्या (जैसे BPPV) है, तो मुझसे संपर्क करें। गर्भावस्था में ENT इलाज बिल्कुल सुरक्षित है। डॉक्टर की देखरेख में सही इलाज से आप और आपका बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे। डर न खाएँ, सही समय पर सलाह लें।”**
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या चक्कर से बच्चे को नुकसान होगा?
सामान्य चक्कर से नहीं। बच्चे को चक्कर से सीधा नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर आप गिर जाती हैं, तो नुकसान हो सकता है। इसलिए सावधानी जरूरी है।
क्या चक्कर प्रसव में समस्या बनेगा?
नहीं। चक्कर और प्रसव में सीधा संबंध नहीं है। लेकिन अगर चक्कर किसी गंभीर समस्या (जैसे preeclampsia, gestational diabetes) का संकेत है, तो हाँ। इसलिए डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
क्या मुझे अस्पताल में भर्ती होना चाहिए?
अगर चक्कर सामान्य है, तो नहीं। लेकिन अगर चक्कर के साथ अन्य गंभीर लक्षण हैं (रक्तस्राव, तेज सिर दर्द, दृष्टि समस्या, सीने में दर्द), तो हाँ।
क्या गर्भावस्था के बाद चक्कर ठीक हो जाएगा?
अगर चक्कर का कारण हार्मोनल है (जो आम है), तो प्रसव के बाद धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। अगर कारण कुछ और है (जैसे BPPV), तो शायद न ठीक हो।
क्या मैं प्रेगनेंसी के दौरान काम कर सकती हूँ?
अगर चक्कर हल्का है, तो हल्का काम कर सकती हैं। अगर गंभीर है, तो विश्राम जरूरी है। डॉक्टर की सलाह लें।
क्या मुझे स्तनपान में समस्या होगी?
नहीं। चक्कर स्तनपान को प्रभावित नहीं करता।
अगली प्रेगनेंसी में भी चक्कर होगा?
संभावना है, लेकिन निश्चित नहीं। अगली बार आप सावधानी से कदम उठा सकती हैं और पहले से ही सावधानियाँ ले सकती हैं।
क्या चक्कर महिला की स्वास्थ्य में बदलाव का संकेत है?
हाँ, कभी-कभी। इसलिए नियमित जाँच जरूरी है। खून की कमी, रक्तचाप की समस्या, या ब्लड शुगर की समस्या को सही समय पर पकड़ना जरूरी है।
डॉ. प्रतीक पोरवाल से संपर्क करें
Prime ENT Center, हरदोई
डॉ. प्रतीक पोरवाल — ENT सर्जन
फोन: 7393062200
गर्भावस्था में चक्कर से परेशान हैं? विशेषज्ञ सलाह लें। गर्भावस्था में ENT इलाज बिल्कुल सुरक्षित है। अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य के लिए आज ही सलाह लें।
गर्भावस्था में चक्कर एक आम समस्या है, लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही कारण पहचानना और सही इलाज लेना महत्वपूर्ण है। खून की कमी, रक्तचाप की समस्या, या कान का विकार—हर समस्या का अपना इलाज है। आपके प्रसूति चिकित्सक के साथ-साथ, अगर जरूरत हो, तो ENT विशेषज्ञ से भी सलाह लें। डॉ. प्रतीक पोरवाल गर्भवती महिलाओं के साथ बहुत अनुभव रखते हैं। सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ प्रसव, और स्वस्थ बच्चे के लिए सही समय पर डॉक्टर से मिलना सबसे महत्वपूर्ण है।
Medical Disclaimer: This article is for educational purposes only. It does not constitute medical advice or prescribing guidance. All medications mentioned should only be taken under the direct supervision of a qualified physician. Specific doses, durations, and drug choices depend on your individual clinical condition and must be determined by your treating doctor. If you experience severe symptoms, please seek immediate medical attention.
References
- Biswas A. Vertigo in pregnancy. Journal of Obstetrics and Gynaecology of India. 2012.
Reference: Balance Disorders in the Elderly — Agrawal et al, 2009
