मेनियर रोग भइया, मेरी प्रैक्टिस में जो सबसे परेशान करने वाले मरीज़ आते हैं, उनमें से एक समस्या है, अचानक बहुत तेज़ चक्कर आता है, कान में सीटी की आवाज़ सुनाई देती है, और साथ ही सुनना भी कम हो जाता है। ये सब कुछ एक साथ होता है, और मरीज़ बिल्कुल घबरा जाता है। यही हाल मेरे एक मरीज़ मोहन भइया का था, वो 48 साल के किसान थे, गन्ने की खेती करते थे। एक दिन सुबह जागे, तो पूरा कमरा घूम रहा था। दो घंटे में उल्टी आ गई। और सबसे अजीब बात यह कि उसी समय उन्हें कान में लगातार “ट्रिप-ट्रिप” आवाज़ सुनाई देने लगी।
Table of Contents
- मेनियर रोग आखिर है क्या?
- मेनियर रोग के लक्षण क्या होते हैं?
- मेनियर रोग के दौरे की विशेषता क्या है?
- मेनियर रोग क्यों होता है? क्या कारण हैं?
- मेनियर रोग का निदान कैसे होता है?
- मेनियर रोग का इलाज क्या है?
- मेनियर रोग में आहार, क्या खाएँ, क्या न खाएँ?
- मेनियर रोग में जीवन कैसे जीएँ?
- मेनियर रोग का भविष्य क्या है?
- क्या मेनियर रोग खतरनाक है?
तीन दिन बाद जब वो मेरे पास आए, तो कहने लगे, “डाक्टर साहब, ये क्या हुआ मुझे? सुनना भी कम हो गया, कान में शोर भी है, और चक्कर भी नहीं रुक रहा।” मैंने परीक्षा की, कुछ टेस्ट किए, तो पता चला कि उन्हें मेनियर रोग है। यह एक ऐसी बीमारी है जो कान के अंदर की नाज़ुक चीज़ों को खराब कर देती है।
मेनियर रोग आखिर है क्या?
मेनियर रोग को समझने के लिए पहले यह समझ लीजिए कि आपके कान में एक जगह होती है जिसे “अंतरिक कान” (inner ear) कहते हैं। यह बहुत ही छोटी और नाज़ुक जगह होती है। इसमें एक तरल पदार्थ होता है जिसे “एंडोलिम्फ” कहते हैं। यह तरल पदार्थ आपको संतुलन बनाने में मदद करता है और आवाज़ को सुनने में भी काम आता है।
जब किसी वजह से इस तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, तो मेनियर रोग हो जाता है। यह तरल ज़्यादा होने के कारण अंतरिक कान के नाज़ुक हिस्सों को दबाव देता है। इसी दबाव के कारण चक्कर आता है, सुनना कम हो जाता है, और कान में अजीब आवाज़ें सुनाई देती हैं।
मेनियर रोग को पहचानना जरूरी है क्योंकि यह केवल चक्कर नहीं है। यह एक पूरी तरह की समस्या है जो आपके जीवन को प्रभावित करती है। मेरे मरीज़ों को देखते हुए मुझे लगता है कि इस बीमारी को बहुत से लोग समझते ही नहीं हैं।
मेनियर रोग के लक्षण क्या होते हैं?
अब मेरे एक दूसरे मरीज़ की बात करता हूँ, प्रिया नाम की एक महिला थीं, उम्र करीब 52 साल थी। उन्होंने मुझसे कहा, “डाक्टर साहब, मेरे साथ तो कुछ बहुत ही अजीब हो रहा है। कभी अचानक मुझे लगता है कि मैं पड़ी हूँ और दुनिया घूम रही है। कभी तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं ही घूम रही हूँ। और इसी बीच मेरे कान में लगातार एक भन-भन की आवाज़ सुनाई देती है।”
मेनियर रोग के मुख्य लक्षण ये हैं:
1. चक्कर (Vertigo), यह सबसे बड़ा लक्षण है। यह चक्कर बहुत ही तेज़ होता है। मरीज़ को ऐसा लगता है कि कमरा घूम रहा है या वह स्वयं घूम रहा है। कभी-कभी तो यह इतना तेज़ होता है कि मरीज़ चल नहीं पाते, बस लेट जाते हैं। यह चक्कर 20 मिनट से लेकर कई घंटों तक रह सकता है।
2. कान में आवाज़ (Tinnitus), “ट्रिप-ट्रिप”, “भन-भन”, “सीटी” की आवाज़ कान में सुनाई देती है। कभी-कभी तो यह आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि मरीज़ को कुछ और सुनाई ही नहीं देता।
3. सुनना कम होना (Hearing Loss), शुरुआत में कम सुनाई देता है, लेकिन समय के साथ यह और ख़राब हो सकता है। खास तौर पर नीची आवाज़ों को सुनना मुश्किल हो जाता है।
4. कान में दबाव का अहसास, मरीज़ कहते हैं कि कान भरा-भरा महसूस होता है, जैसे कोई बालूँ भर गया हो।
5. उल्टी और मतली, जब चक्कर आता है, तो उल्टी भी आ सकती है।
6. असंतुलन (Imbalance), चलते समय संतुलन बिगड़ जाता है। कभी एक तरफ़ झुक जाते हो, कभी दूसरी तरफ़।
मेनियर रोग के दौरे की विशेषता क्या है?
मेनियर रोग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अचानक आता है और अचानक चला जाता है। कोई पूर्वसूचना नहीं होती। एक मरीज़, हरीश नाम का, जो मेरे क्लिनिक में काम करते थे, उन्होंने बताया, “सर, मैं बैठा हूँ, चाय पी रहा हूँ, और अचानक पूरी दुनिया घूमने लगती है। एक सेकंड पहले सब ठीक था, अगले सेकंड में सब गड़बड़।”
ये दौरे कितने बार आएँ, यह व्यक्ति से व्यक्ति में अलग होता है। कुछ मरीज़ों को महीने में एक-दो बार आता है, कुछ को हफ़्ते में कई बार। और कुछ को महीनों तक तो सब ठीक रहता है, फिर अचानक शुरू हो जाता है।
मेनियर रोग क्यों होता है? क्या कारण हैं?
अरे भइया, यह सवाल सबसे मुश्किल है। दरअसल, आज तक डाक्टरों को पूरी तरह पता नहीं चल पाया है कि मेनियर रोग क्यों होता है। लेकिन कुछ बातें हैं जो इसे बढ़ाती हैं या जिनका असर होता है:
1. अंतरिक कान में तरल पदार्थ की समस्या, शायद किसी कारण से अंतरिक कान में तरल पदार्थ सही तरीके से बहता नहीं है। यह जमा हो जाता है। यह जमा होना ही समस्या का कारण है।
2. नमक का ज़्यादा सेवन, नमक पानी को शरीर में रोक लेता है। इससे कान के तरल में भी बदलाव आता है। मेरे हिसाब से यह सबसे बड़ा कारण है।
3. तनाव और चिंता, जब आप चिंता में रहते हो, तो शरीर में कुछ हार्मोन निकलते हैं जो सूजन बढ़ाते हैं। यह सूजन कान के तरल को भी प्रभावित करती है।
4. आनुवंशिकता, कुछ परिवारों में यह समस्या ज़्यादा होती है। अगर आपके माता-पिता को है, तो आपको होने की संभावना बढ़ जाती है।
5. माइग्रेन का रिश्ता, जिन लोगों को माइग्रेन होता है, उन्हें मेनियर रोग भी होने की संभावना ज़्यादा होती है। कई मरीज़ों में दोनों समस्याएँ होती हैं।
6. कान का संक्रमण, अगर आपको कान में कभी गंभीर संक्रमण हुआ हो, तो इसका भी असर हो सकता है।
7. खराब नींद और व्यायाम की कमी, जब आप ठीक से सोते नहीं हो, या व्यायाम नहीं करते हो, तो शरीर की प्रणाली गड़बड़ा जाती है।
मेनियर रोग का निदान कैसे होता है?
मेरे पास एक मरीज़ आए, विजय भइया। उन्हें चक्कर और कान में आवाज़ की समस्या थी। वो घबराए हुए थे। उन्होंने कहा, “डाक्टर, मेरे दिमाग़ को तो कोई बीमारी नहीं है न? मुझे कहीं कैंसर तो नहीं है?”
मैंने उन्हें समझाया कि मेनियर रोग का निदान करने के लिए कुछ विशेष परीक्षण होते हैं:
1. कान की शारीरिक परीक्षा (Otoscopy), बस मैं अपने उपकरण से आपके कान को देखता हूँ। इससे पता चल जाता है कि कान में संक्रमण या मैल तो नहीं है।
2. श्रवण परीक्षा (Audiometry), इस परीक्षा में आप एक कमरे में बैठते हो और विभिन्न आवाज़ों को सुनते हो। इससे पता चल जाता है कि आपकी सुनने की क्षमता कितनी है। मेनियर रोग में खास तौर पर कम आवाज़ें सुनना मुश्किल हो जाता है।
3. विनीगर्ड परीक्षा (Romberg Test), इस परीक्षा में आप आँखें बंद करके खड़े होते हो। इससे पता चल जाता है कि आपका संतुलन कितना खराब है।
4. VNG परीक्षा (Video Nystagmography), यह एक विशेष परीक्षा है जिसमें कैमरे से आपकी आँखों की गति को देखा जाता है। आँखों की गति से पता चल जाता है कि आपके अंतरिक कान में क्या समस्या है।
5. एमआरआई (MRI), अगर कोई संदेह हो, तो एमआरआई कराया जाता है। इससे कान के अंदर की विस्तृत तस्वीर मिल जाती है।
मेनियर रोग का इलाज क्या है?
अब बात करते हैं इलाज की। मेनियर रोग का कोई पूरा इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। इलाज कई तरीकों से होता है:
पहला, आहार में बदलाव: नमक कम करना सबसे महत्वपूर्ण है। मैं अपने मरीज़ों को कहता हूँ, “भइया, नमक को अलविदा कहो।” नमक कितना कम करना है यह आपकी जांच, ब्लड प्रेशर और बाकी बीमारियों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं। अपने-आप बहुत सख्त नमक बंद करना सही नहीं है।
उन्नीस दिन उसी तरह के आहार का पालन करना चाहिए जो दिल के मरीज़ों के लिए सलाह दी जाती है, कम नमक, कम तेल, कम मसाला।
दूसरा, दवाइयाँ:
– कुछ मरीजों में डॉक्टर fluid balance के लिए diuretic वर्ग की दवा दे सकते हैं।
– चक्कर, उल्टी या कान के दबाव जैसे लक्षणों के लिए दवा मरीज की जांच के बाद चुनी जाती है।
– गंभीर या बार-बार लौटने वाले मामलों में specialist कान में injection treatment पर विचार कर सकते हैं।
तीसरा, व्यायाम और थेरेपी: कुछ विशेष व्यायाम हैं जो संतुलन को बेहतर बनाते हैं। कुछ लोगों को “Cawthorne-Cooksey exercises” से फ़ायदा मिलता है।
चौथा, आपरेशन: अगर दवाइयों से फ़ायदा नहीं मिल रहा हो, तो कुछ आपरेशन किए जाते हैं। ये ऑपरेशन कान के तरल को कम करते हैं।
मेनियर रोग में आहार, क्या खाएँ, क्या न खाएँ?
मेनियर रोग में आहार बहुत महत्वपूर्ण है। मेरे एक मरीज़, रीता जी, को जब नमक कम करने के लिए कहा, तो वो सुबह-शाम रो जाती थीं। “डाक्टर, इस घर में खाना कैसे बनेगा?” वो कहती थीं। लेकिन जब उन्होंने सच में नमक कम किया, तो उनके चक्कर 70 प्रतिशत कम हो गए। अब तो वो खुद ही सभी को बताती हैं कि नमक कम करो।
क्या खाएँ:
– ताज़ी सब्जियाँ (पालक, ब्रोकली, गाजर, शलगम)
– ताज़े फल (आम, अनार, सेब, पपीता)
– अंडे (पर सफ़ेद हिस्सा ज़्यादा खाएँ)
– कम वसा वाला दही
– मछली (कम नमक में पकाई गई)
– चावल (बिना नमक के)
– गेहूँ की रोटी
– दाल (कम नमक में)
– दूध (कम वसा वाला)
क्या न खाएँ:
– नमकीन खस्ता (चिप्स, नमकीन, सेव)
– अचार
– पापड़
– सॉयाबीन सॉस
– सूप में नमक
– डिब्बा बंद खाना
– बिस्कुट (ज़्यादातर नमकीन होते हैं)
– चीज़
– मक्खन
– नारियल तेल
– चिकनाई वाली चीज़ें
क्या कम करें:
– चाय-कॉफ़ी (कुछ लोगों में ये चक्कर बढ़ाती है)
– कोल्ड ड्रिंक्स (खास तौर पर ज़्यादा शक्कर वाली)
– शराब (बिल्कुल न लें)
– सिगरेट
– तनबाकू (किसी भी रूप में)
मेनियर रोग में जीवन कैसे जीएँ?
मेनियर रोग के साथ जीना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। मेरे एक मरीज़, प्रोफ़ेसर साहब, को यह रोग था। उन्होंने कहा, “डाक्टर, मेरी पूरी ज़िंदगी बदल गई।” लेकिन सही इलाज और सही आदतों से उन्होंने एक सामान्य जीवन जीना शुरू किया।
कुछ सुझाव:
1. तनाव कम करें: योग करें, ध्यान करें, या बस बैठकर शांति से सोचें। तनाव इस रोग को बढ़ाता है। मेरे कई मरीज़ों का चक्कर तब बढ़ता है जब घर में कोई झगड़ा हो जाए।
2. नमक से बचें: यह सबसे महत्वपूर्ण है। घर में खाना पकाते समय बहुत कम नमक डालें। बाहर का खाना न खाएँ।
3. पानी ठीक तरीके से पिएँ: रोज़ दो-ढाई लीटर पानी पिएँ, लेकिन थोड़ा-थोड़ा करके। एक बार में बहुत ज़्यादा न पिएँ।
4. सोएँ ठीक से: कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी चक्कर को बढ़ाती है।
5. व्यायाम करें: हल्का व्यायाम जैसे चलना, योग। कम से कम 20-30 मिनट रोज़।
6. चक्कर के समय क्या करें: अगर चक्कर आ जाए, तो तुरंत लेट जाएँ। आँखें बंद न करें। एक जगह पर नज़र रखें। एक-दो घंटे तक चुप बैठे रहें। उल्टी के डर में पानी न लें, बस थोड़ा-सा चूसें।
7. तेज़ हिलने-डुलने से बचें: अचानक सिर घुमाना, तेज़ गति में घूमना, ये सब करने से पहले सावधानी रखें।
8. ऊँचाई से सावधानी रखें: सीढ़ियों पर, छत पर, या कहीं ऊँचाई पर चक्कर आ सकता है। सावधानी रखें।
मेनियर रोग का भविष्य क्या है?
एक सवाल जो सभी मरीज़ पूछते हैं, “डाक्टर, यह ठीक होगा या जीवन भर यही रहेगा?” मैं उन्हें सच बताता हूँ। मेनियर रोग का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, लेकिन समय के साथ कई लोगों में लक्षण कम हो जाते हैं।
मेरे एक मरीज़, कृष्णा, को पाँच साल पहले यह रोग हुआ था। पहली साल में उन्हें बहुत परेशानी हुई। लेकिन सही इलाज, सही आहार, और सही आदतों से अब उन्हें हर महीने एक-दो बार हल्का-फुल्का चक्कर आता है, बाकी समय वो बिल्कुल ठीक रहते हैं।
सुनने की क्षमता का क्या? हाँ, कुछ मरीज़ों में कुछ हद तक यह खोई हुई नहीं आती। लेकिन बाकी लक्षणों को इलाज से अच्छा किया जा सकता है।
क्या मेनियर रोग खतरनाक है?
अरे, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। सीधा जवाब है, मेनियर रोग से आपको मरने का ख़तरा नहीं है। लेकिन यह आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बिल्कुल गड़बड़ा सकता है। ड्राइविंग करते समय चक्कर आ गया, तो दुर्घटना हो सकती है। काम पर ध्यान नहीं लगेगा। रिश्ते खराब हो सकते हैं।
इसलिए इसे गंभीरता से लेना चाहिए। और सही समय पर इलाज कराना चाहिए।
Dr. Prateek Porwal के पास मेनियर रोग का इलाज
मेरे यहाँ Prime ENT Center में हम मेनियर रोग के मरीज़ों को देखते हैं। हमारे पास VNG परीक्षा की सुविधा है। हम दवाइयों से लेकर आपरेशन तक सब कुछ कर सकते हैं। और सबसे अहम बात, हम आपको सही तरीके से समझाते हैं कि आपको क्या है और क्या करना चाहिए।
बहुत से मरीज़ आते हैं, घबराए हुए होते हैं। लेकिन जब हम उन्हें सब कुछ समझा देते हैं, तो उनका आधा डर ही निकल जाता है। और फिर सही इलाज से बाकी आधा डर भी निकल जाता है।
अगर आपको लगता है कि आपको मेनियर रोग है, तो आज ही फ़ोन करें, 7393062200। हम आपको सही मार्गदर्शन देंगे।
मेनियर रोग का भविष्य उज्ज्वल कैसे बनाएँ?
मेरे experience में मैंने देखा है कि जो मरीज़ seriously अपना treatment लेते हैं, और lifestyle को बदलते हैं, उन्हें 70-80 प्रतिशत improvement आ जाता है। पहले साल-डेढ़ साल मुश्किल होता है, लेकिन फिर manage करना आसान हो जाता है।
मेनियर रोग के साथ living का मतलब है कि आप अपने body को बेहतर तरीके से समझो। अपने triggers को identify करो। अपने medication schedule को regular रखो। और सबसे अहम बात, अपने lifestyle को balance में रखो।
कई बार मरीज़ को लगता है कि treatment काम नहीं कर रहा है। लेकिन असल में, उनके expectations overdue होते हैं। Meniere’s disease एक chronic condition है। इसका मतलब है कि आपको लंबे समय तक इसके साथ रहना होगा। पर सही management से आप एक productive और happy life जी सकते हो।
क्या Meniere’s Disease में Diet बहुत महत्वपूर्ण है?
हाँ भइया, बहुत महत्वपूर्ण। मेरे एक मरीज़ को जब नमक कम करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा, “डाक्टर, अगर नमक नहीं खाऊँ, तो खाना किसी काम का है ही नहीं।” लेकिन जब उन्होंने सच में कोशिश की, तो उनके symptoms में 60 प्रतिशत कमी आ गई।
तो diet का सीधा असर है। आप किस तरह का खाना खाते हो, कितना नमक लेते हो, कितना पानी पीते हो, सब का असर है आपके symptoms पर।
और सिर्फ़ नमक नहीं। Caffeine, sugar, processed foods, सब को limited रखना चाहिए। क्योंकि ये सब fluid balance को disturb करते हैं।
Meniere’s Disease में Stress Management क्यों ज़रूरी है?
Stress हर बीमारी को बढ़ाता है। लेकिन Meniere’s disease में तो stress की भूमिका बहुत ज़्यादा है। जब आप stressed होते हो, तो आपके body में cortisol नाम का hormone निकलता है। यह hormone fluid balance को disturb करता है। और fluid balance disturb होता है, तो Meniere’s के symptoms बढ़ जाते हैं।
मेरे एक मरीज़, राजीव जी, को business में बहुत tension था। और हर बार जब कोई बड़ा decision लेना होता था, तो उन्हें चक्कर का दौरा आता था। जब मैंने उन्हें yoga और meditation करने के लिए कहा, तो उन्होंने हँसते हुए कहा, “डाक्टर, meditation तो मेरे ऋषि-मुनियों के ज़माने का है।” लेकिन जब उन्होंने 2 महीने regular meditation किया, तो उनके attacks 50 प्रतिशत कम हो गए।
तो stress management बस therapy नहीं है, यह actual treatment है।
Meniere’s Disease में क्या Alcohol और Caffeine avoid करना चाहिए?
बिल्कुल। Alcohol और caffeine दोनों ही fluid balance को disturb करते हैं। Alcohol तो बिल्कुल avoid करना चाहिए। और caffeine को भी कम करना चाहिए।
Coffee, tea, chocolate, सब में caffeine होता है। और यह caffeine आपके symptoms को बढ़ा सकता है। मेरे कई मरीज़ों को जब coffee और tea छुड़वा दिया, तो उन्हें relief मिल गया।
लेकिन एकदम से बंद मत करो। Gradually reduce करो। क्योंकि अचानक बंद करने से withdrawal symptoms आ सकते हैं।
Meniere’s Disease में Vestibular Rehabilitation क्या है?
Vestibular rehabilitation एक type की therapy है जो आपके balance system को strengthen करती है। इसमें कुछ specific exercises करने होते हैं। ये exercises आपके balance को improve करते हैं। और जब balance improve हो जाता है, तो दिन-ब-दिन की activities आसान हो जाती हैं।
मेरे clinic में मैं अपने Meniere’s patients को ये exercises सिखाता हूँ। Gaze stabilization exercises, balance training, और vestibular adaptation exercises। और जो मरीज़ इन exercises को regular करते हैं, उन्हें वाकई improvement आता है।
क्या Meniere’s Disease का कोई Cure है?
दुर्भाग्यवश, आज तक कोई long-term management ofनहीं है। लेकिन यह मतलब नहीं कि आप इसके साथ नहीं रह सकते। Medical science लगातार develop हो रहा है। नई-नई treatments आ रही हैं। Intratympanic injections, endolymphatic sac decompression surgery, ये सब options हैं।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है, सही diagnosis, सही treatment, और सही lifestyle management। अगर ये तीनों सही हों, तो आप Meniere’s disease के साथ एक बहुत ही normal life जी सकते हो।
निष्कर्ष
मेनियर रोग एक ऐसी बीमारी है जो अचानक आती है और जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। लेकिन सही समझ, सही इलाज, और सही आहार से इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। और जैसे मेरे कई मरीज़ अब सामान्य जीवन जी रहे हैं, वैसे ही आप भी जी सकते हैं।
याद रखिए, चक्कर आया, तो घबराइए नहीं। यह मेनियर रोग हो सकता है, या कोई और समस्या हो सकती है। इसलिए किसी अच्छे ENT डाक्टर से मिलिए। अपना सही निदान कराइए। और फिर सही इलाज शुरू करिए।
और हाँ, नमक कम करना मत भूलिए। यह सबसे महत्वपूर्ण है। बाकी सब इसी के ऊपर निर्भर करता है। नियमित व्यायाम करो। Stress कम करो। सही नींद लो। और अपने body को सुनो।
Meniere’s disease के साथ millions of people दुनिया भर में normal life जी रहे हैं। आप भी कर सकते हो। बस सही guidance और commitment चाहिए।
अगर आपको लगता है कि आपको Meniere’s disease है, तो आज ही मेरे पास आइए। Prime ENT Center में हम आपको detailed care देंगे।
Dr. Prateek Porwal, Prime ENT Center, Hardoi, Uttar Pradesh
फ़ोन: 7393062200
Medical Disclaimer: This article is for educational purposes only and does not constitute medical advice, diagnosis or prescribing guidance. All medications must be taken under direct supervision of a qualified physician. Consult Dr. Prateek Porwal at Prime ENT Center, Hardoi for personalised treatment.
References
- Committee on Hearing and Equilibrium guidelines for the diagnosis and evaluation of therapy in Meniere’s disease. Otolaryngology–Head and Neck Surgery. 1995;113(3):181–185.
- Thirlwall AS, Kundu S. Diuretics for Ménière’s disease or syndrome. Cochrane Database of Systematic Reviews. 2006;(3):CD003599.
- Pullens B, van Benthem PP. Intratympanic an ototoxic antibiotic for unilateral Menière’s disease or syndrome. Cochrane Database of Systematic Reviews. 2011;(3):CD008234.
This article is for educational purposes. Please consult Dr. Prateek Porwal at Prime ENT Center, Hardoi for personal medical advice.
Dr. Prateek Porwal is an ENT & Vertigo Specialist with over 13 years of experience, holding MBBS (GSVM Medical College), DNB ENT (Tata Main Hospital), and CAMVD (Yenepoya University). He is the originator of the Bangalore Maneuver for Anterior Canal BPPV and has published research in Frontiers in Neurology and IJOHNS. Serving at Prime ENT Center, Hardoi.
Reference: Balance Disorders in the Elderly — Agrawal et al, 2009
